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शांतिकुंज पहुंच विदेशी दल ने जाना भारतीय संस्कृति को

शांतिकुंज पहुंच विदेशी दल ने जाना भारतीय संस्कृति को

    अमेरिका के 14 सदस्यीय दल उत्तराखंड के अपने दो दिवसीय प्रवास के दौरान शांतिकुंज पहुंचा.

    उन्होंने गायत्री तीर्थ में चलाए जा रहे रचनात्मक कार्य का अध्ययन किया तो वहीं देवसंस्कृति विवि में समाजोत्थान के लिए समर्पित युवाओं से मुलाकात की. दल में वकील, मनोवैज्ञानिक, डॉक्टर्स एवं कृषि वैज्ञानिक शामिल थे.

    दल ने गायत्री परिवार प्रमुख डॉ. प्रणव पण्ड्या और शैलदीदी से मुलाकात की. इस अवसर पर गायत्री परिवार प्रमुख डॉ. पण्ड्या ने कहा कि भारतीय संस्कृति विश्व की प्राचीन संस्कृति है. यहां प्राचीन ऋषियों द्वारा सिंचित, अवतारों और महापुरुषों द्वारा संरक्षित धर्म और संस्कृति पल्लवित होते रहते हैं.

    उन्हीं की छत्रछाया में लोकसेयिों द्वारा विभिन्न प्रकल्प चलाए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि युवाओं के मन से निराशा एवं हताशा के भावों को उखाड़ फेंकने के लिए गायत्री परिवार स्थान-स्थान पर युवा जागरण शिविरों का आयोजन कर रहा है.

    इन शिविरों के माध्यम से युवाओं के दृष्टिकोण को सकारात्मक दिशा दी जाती है. युवाओं में आत्मविश्वास जगाने के साथ-साथ उनमें परिवार, समाज व राष्ट्र के उत्थान का भाव जगाया जाता है. दल के सदस्यों ने दो दिवसीय प्रवास के दौरान शांतिकुंज के हिमालय-ध्यान कक्ष में ध्यान किया और 27 कुण्डीय यज्ञशाला में हवन किया.

    दल में शामिल डोनेट ला चेपले ने 12 प्रकार की जड़ी-बूटियों से निर्मित आयुर्वेदिक प्रज्ञापेय के प्रति विशेष रुचि दिखाई. दल देवसंस्कृति विवि में गौ उत्पाद, सिलाई-कढ़ाई प्रशिक्षण केन्द्र, हस्तकरघा, कागज उद्योग, ग्राम प्रबंधन आदि प्रकल्पों को देखकर काफी प्रभावित हुआ.

    मनोवैज्ञानिक लिंडा बेडनर्ज, बैंकर इस्टर फ्रेंक, कार्यक्रम निदेशक रोनाल्ड गिलबर्ट ने कहा कि अमेरिका में भी एक ऐसा विश्वविद्यालय होना चाहिए जैसे संस्कृतिनिष्ठ युवा गढ़ने की टकसाल के रूप में यहां है. दल में लिस्ले ब्रोंकर, लारेंस कोनिक, स्टुवर्ट एलिन मार्टिन आदि शामिल थे.

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