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देहरादून में 'ग्रेजुएट कचौड़ी वाला' की धूम! युवाओं के लिए मिसाल बने पारस कश्यप, पढ़ें कहानी

Graduate Kachori Wala Dehradun: देहरादून में इन दिनों 'ग्रेजुएट कचौड़ी वाला' चर्चा में है. दरअसल बैचलर ऑफ साइंस से ग्रेज ...अधिक पढ़ें

    रिपोर्ट: हिना आज़मी

    देहरादून. उत्तराखंड के युवा पढ़ने के बाद सरकारी या निजी नौकरी की तलाश करते हैं. नौकरी न मिलने से युवा परेशान रहते हैं. वहीं मेहनत करने वाले आराम से नहीं बैठते हैं. ऐसे ही देहरादून के एक युवा पारस कश्यप ने बीएससी करने के बाद ग्रेजुएट कचौड़ी वाला (Graduate Kachori Wala Dehradun) के नाम से अपना स्टॉल लगाया है, जिस पर वह छोले-कचौड़ी, भटूरे आदि बना रहे हैं. उनके पास खाने के लिए दूर-दूर से लोग आ रहे हैं.

    देहरादून के रहने वाले पारस कश्यप ने बताया कि उन्होंने बैचलर ऑफ साइंस से ग्रेजुएशन किया है. ग्रेजुएशन करने के बाद उन्होंने डेढ़ साल तक सरकारी नौकरी की तैयारी की, लेकिन जब उन्हें कोई सफलता नहीं मिली, तो उन्होंने अपने फैमिली बिजनेस का रुख किया. उनके पिता मदनलाल ठेला लगाकर छोले, भटूरे-कचौड़ी बनाते थे, जिसे देखते हुए पारस बड़े हुए. उसी काम को पारस ने अपनाया और अपना काम शुरू कर दिया. पारस कश्यप का कहना है कि एमबीए चाय वाले से इंस्पायर होकर उन्होंने अपने बिजनेस को ग्रेजुएट कचौड़ी वाला के नाम से शुरू किया. इसके साथ वह छोले-भटूरे जैसे लजीज पकवान परोस रहे हैं.

    पारस कश्यप के पिता मदनलाल अपने बेटे के इस कदम से बहुत खुश हैं. उनका कहना है कि नौकरी से ज्यादा अपने बिजनेस में कमाई है. उनके बेटे ने उनका फैमिली बिजनेस आगे बढ़ाने की सोची है, यह बात उन्हें बहुत अच्छी लगी.

    ‘ग्रेजुएट कचौड़ी वाला’ की कचौड़ी खाने पहुंची रेणु ने पारस की तारीफ करते हुए कहा कि पारस कश्यप जैसे लोग अपने ट्रेडिशनल बिजनेस को बढ़ाकर नाम कमा रहे हैं. हम इसके कई उदाहरण देख सकते हैं. रेणु का मानना है कि आज के युवा एक तरफ नौकरी की तलाश में ही अपना बहुत वक्त बिता देते हैं. वहीं कुछ युवा किसी काम को छोटा बड़ा न समझकर छोटे से काम से ही बड़ा नाम बनाते हैं. इस लिस्ट में पारस कश्यप का नाम भी शामिल हो, इसकी शुभकामनाएं भी रेणु ने दी है.

    इसके अलावा उन्होंने पारस के पढ़े-लिखे होने से उनके काम करने के तरीकों की तारीफ करते हुए कहा कि ग्रेजुएशन करने के बाद पारस सही ढंग से काम कर रहे हैं. जैसे उन्हें पता है कि प्लास्टिक के इस्तेमाल से पर्यावरण को नुकसान होता है, इसीलिए वह पत्तों में छोले-कचौड़ी परोस रहे हैं. वहीं उन्होंने सोशल मीडिया अकाउंट भी बनाये हैं, जिससे वह अपनी मार्केटिंग कर लोगों को जोड़ सकें और अपने पास बुला सकें. कुल मिलाकर उन्होंने कहा कि पारस ने पढ़-लिखकर सिखाई गई बातों को यहां लागू किया है, जो सराहनीय है.

    कैसे खा सकते हैं ‘ग्रेजुएट कचौड़ी वाला’ की कचौड़ी?
    अगर आप भी ‘ग्रेजुएट कचौड़ी वाला’ की कचौड़ी का स्वाद लेना चाहते हैं, तो आपको देहरादून के गांधी पार्क आना होगा. इसके पास पारस अपना वेंडर लगाते हैं. एक प्लेट कचौड़ी की कीमत 25 रुपये से शुरू हो रही है.

     

    Tags: Dehradun news, Street Food, Uttarakhand news

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