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Uttarakhand Politics: BJP को बड़ा झटका, भीमताल में बागी हुए नेता, पार्टी के खिलाफ लड़ने का ऐलान किया

Uttarakhand Politics: BJP को बड़ा झटका, भीमताल में बागी हुए नेता, पार्टी के खिलाफ लड़ने का ऐलान किया

बीजेपी में भीमताल सीट पर बगावत खुलकर सामने आ गई.

बीजेपी में भीमताल सीट पर बगावत खुलकर सामने आ गई.

Uttarakhand Election : भीमताल से निर्दलीय विधायक राम सिंह कैड़ा (Ram Singh Kaira) को भाजपा ने अपना उम्मीदवार बनाया तो 10 साल से चुनाव लड़ने की आस लगाए बैठे नेता मनोज साह (Manoj Sah) ने खुली बगावत कर दी. साह का दावा है कि सर्वे में वही नंबर-वन दावेदार थे, लेकिन कांग्रेस बैकग्राउंड के कैड़ा को बीजेपी ने तवज्जो दी. बीजेपी के टिकट (BJP Tickets) पर अधिकार जताने वाले साह का कहना है कि ओरीजनल बीजेपी के लोग उन्हें जिताएंगे. उनके पास बीजेपी का सिंबल (BJP Symbol) भले न हो, वह पीएम मोदी (PM Narendra Modi) की ही विचारधारा पर चुनाव लड़ेंगे. जानिए भाजपा को कितना नुकसान होने वाला है!

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हल्द्वानी. उत्तराखंड चुनाव को लेकर 59 टिकटों का ऐलान होने के बाद बीजेपी के भीतर बगावत का सिलसिला शुरू हो चुका है. नैनीताल ज़िले में आने वाली छह विधानसभाओं में से एक भीमताल में बीजेपी के खिलाफ उसके एक नेता ने मोर्चा खोल दिया. बीजेपी ने इस सीट से निर्दलीय विधायक रहे रामसिंह कैड़ा को पार्टी में शामिल कर उन्हें प्रत्याशी घोषित किया है. पार्टी कार्यकर्ता खुलकर विरोध कर रहे हैं. साल 2012 से ही भीमताल से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे और पूर्व में बीजेपी के नैनीताल जिलाध्यक्ष रहे मनोज साह ने तो अपने समर्थकों समेत खुली बगावत कर पार्टी के खिलाफ चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया.

मनोज साह हल्द्वानी में मंडी समिति के अध्यक्ष रहे हैं. रामगढ़ के रहने वाले साह ने शुक्रवार को भीमताल में खुली बैठक की और इसी दौरान निर्दलीय लड़ने का ऐलान कर डाला. उनके साथ बीजेपी के कई पदाधिकारियों ने भी पार्टी से इस्तीफा दे दिया. बीजेपी के मंडल अध्यक्ष से लेकर मंडल महामंत्री और कई पूर्व पदाधिकारियों ने पार्टी छोड़ दी. बीजेपी से इस्तीफा देने के बाद साह ने न्यूज़18 से बात करते हुए कहा कि वो बचपन से संघ के स्वयंसेवक रहे. बीजेपी में कई दायित्व निभाते हुए लंबे समय से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे. साह ने कहा कि भाजपा ही उनकी इकलौती पार्टी रही, लेकिन उनके साथ न्याय नहीं हुआ.

कैड़ा के विरोध में किन पदाधिकारियों ने छोड़ी भाजपा?
2017 में निर्दलीय विधायक चुने गए राम सिंह कैड़ा कुछ दिन पहले बीजेपी में शामिल हुए थे. बीजेपी कार्यकर्ता शुरू से ही कैड़ा को पार्टी में शामिल करने का विरोध कर रहे थे, लेकिन पार्टी आलाकमान ने नज़रअंदाज़ किया. शुक्रवार को जिन पार्टी पदाधिकारियों ने साह के साथ बीजेपी छोड़ने का ऐलान किया, उनमें धारी मंडल के अध्यक्ष कैलाश गुणवंत, मंडल महामंत्री हीरेश बिष्ट, दीपू मेलकानी, रामगढ़ के मंडल महामंत्री शेर सिंह बिष्ट, ओखलकांडा के महामंत्री आलम नगदली, इंद्र कुमार, बीजेपी युवा मोर्चा के पूर्व जिलाध्यक्ष चतुर सिंह बोरा आदि शामिल हैं.

रामगढ़ और धारी में भी हो सकता है नुकसान
साह के निर्दलीय चुनाव लड़ने से बीजेपी को रामगढ़, धारी, मुक्तेश्वर और भीमताल इलाकों में भारी नुकसान हो सकता है क्योंकि यहां साह की अच्छी पकड़ मानी जाती है. साथ ही, कैड़ा के गृह क्षेत्र ओखलकांडा में भी मंडी परिषद का अध्यक्ष रहते हुए मनोज साह ने किसानों को बीमा से लेकर कई तरह के काम किए हैं. ओखलकांडा के स्वास्थ्य केंद्र को अपग्रेड करना रहा हो या टेली मेडीसिन सेंटर में कई तरह की जाचें शुरू करवाना, साह की भूमिका बड़ी रही.

ये है भीमताल का चुनावी गणित
साल 2012 के परिसीमन से अस्तित्व में आई भीमताल सीट पर पहली बार बीजेपी ने चुनावी बाज़ी मारी. 2012 में बीजेपी से दान सिंह भंडारी 6443 वोटों के अंतर से जीतकर विधायक बने. 2017 में भंडारी बीजेपी छोड़ कांग्रेस में शामिल हो गए. उस साल निर्दलीय उम्मीदवार राम सिंह कैड़ा चुनाव जीते, जबकि बीजेपी के प्रत्याशी पूर्व मंत्री गोविंद सिंह बिष्ट दूसरे नंबर पर रहे. कैड़ा ने बिष्ट को 3,446 वोटों से हराया.

Tags: BJP Candidate, Uttarakhand Assembly Election

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