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Haldwani : देश का पहला ‘जुरासिक पार्क’ तैयार, आप ऐसे जान सकते हैं डायनासोर की कुंडली

Haldwani : देश का पहला ‘जुरासिक पार्क’ तैयार, आप ऐसे जान सकते हैं डायनासोर की कुंडली

जुरासिक काल की ऐसी ही सात तरह की वनस्पतियों को वन अनुसंधान केंद्र ने रिसर्च के बाद जुरासिक पार्क में संरक्षित किया है. इसमें लिवरवॉटस, मॉस, गिंको, फर्न, साइकस, पाइन और आकड की प्रजाति शामिल है. फर्न और गिंको शुरुआती जुरासिक काल के प्रमुख पौधे लगाए हैं.

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रिपोर्ट – पवन सिंह तंवर

हल्द्वानी. आज हम आपको वन अनुसंधान केंद्र में बने डायनासोर पार्क के बारे बताने जा रहे हैं. केंद्र ने पर्यटन के लिहाज से बॉटनी वैज्ञानिकों की मदद से ऐसे जुरासिक पार्क की स्थापना की है, जिसमें डायनासोर की प्रजातियों और उनके खानपान के जानकारी दी जाएगी. डायनासोर काल की वनस्पतियां अब वन अनुसंधान केंद्र हल्द्वानी द्वारा बनाए गए जुरासिक पार्क में खिलखिला रही हैं. जिस वजह से बड़ी संख्या में यहां छात्र भी पहुंच रहे हैं, जिन्हें यहां लगे बोर्ड के जरिये इनके बारे में पूरी जानकारी भी मिल रही है. असल में तो डायनासोर को इंसानों ने नहीं देखा लेकिन इस पार्क के जरिए लोगों को पता चल सकेगा कि आखिर डायनासोर क्या खाते थे.

करीब 24 करोड़ 80 लाख साल पहले डायनासोर की उत्पत्ति हुई और 6.50 करोड़ साल पहले डायनासोर का पृथ्वी से खात्मा हो गया. डायनासोर का खात्मा कैसे हुआ, इसको लेकर दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से डायनासोर के कई कंकाल मिले, जिनसे वैज्ञानिकों को उनकी मौजूदगी का पता चला. जुरासिक काल में वनों के अंदर किस तरह के वनस्पति होते थे और डायनासोर कौन सी वनस्पति खाते थे ? उसको लेकर हल्द्वानी वन अनुसंधान केंद्र ने रिसर्च करते हुए भारत के पहले जुरासिक पार्क की स्थापना की है.

ऐसे थे शाकाहारी और मांसाहारी डायनासोर

केंद्र द्वारा लगाए गए बोर्ड के मुताबिक डायनासोर में शाकाहारी व मांसाहारी दोनो प्रजाति मिलती थी. शाकाहारी प्रजाति के ब्राचियोसोरस 26 मीटर लंबे और 62 टन वजन के थे, जो कि जिंको बाइलोबा प्रजाति के वनस्पतियों को भोजन के तौर पर लेते थे. वहीं, शाकाहारी स्पिनोसारस प्रजाति का सिर्फ सिर छह फीट लंबा था. मांसाहारी डायनासोरों में यह सबसे विशालकाय थे. माना जाता है कि यह बड़ी मछलियों को भोजन के तौर पर खाते थे.

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वही हल्द्वानी के वन अनुसंधान केंद्र की रेंजर मदन सिंह बिष्ट का कहना है वन अनुसंधान केंद्र में कोई भी आकर डायनासोर पार्क के बारे में जानकारी और अन्य वनस्पतियों के बारे में भी जान सकता है. उनका कहना है कि 18 वर्ष से कम आयु के लोगों के लिए वन अनुसंधान केंद्र की ओर से ₹10 का और 18 वर्ष से ऊपर की आयु के लोगों के लिए ₹25 का चार्ज लगता है- केंद्र में पूरा एजुकेशन का हब तैयार किया गया है जिसका मकसद लोगों को ज्यादा से ज्यादा जानकारी देना है.

Tags: Dinosaurs, Uttarakhand Forest Department

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