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हल्द्वानी: रानीबाग क्षेत्र के इन मंदिरों को 'धार्मिक पर्यटन सर्किट' से मिलेगी नई पहचान

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रानीबाग क्षेत्र में मार्कण्डेय ऋषि की तपोभूमि, चित्रेश्वर धाम, मां शीतला माता मंदिर, कालीचौड़ मंदिर, हैड़ाखान धाम और छोटा कैलाश है, जिन्हें अब 'धार्मिक पर्यटन सर्किट' के रूप में जाना जाएगा.

    रिपोर्ट- पवन सिंह कुंवर, हल्द्वानी

    हल्द्वानी में रानीबाग क्षेत्र के मंदिर अब जल्द ही पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होंगे. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) के प्रस्ताव पर सरकार ने कार्यदायी संस्था के तौर पर कुमाऊं मंडल विकास निगम (KMVN) को नामित किया है. निगम की एक टीम इस क्षेत्र में आने वाले मंदिरों का निरीक्षण कर चुकी है. जिसके बाद मंदिरों के सौंदर्यीकरण की कवायद जल्द शुरू होने जा रही है.

    रानीबाग क्षेत्र ऋषि-मुनियों की तपोस्थली रहा है. महज धार्मिक ही नहीं बल्कि पौराणिक साहित्यों में भी रानीबाग क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक प्रमुखता का वर्णन किया गया है. रानीबाग क्षेत्र में मार्कण्डेय ऋषि की तपोभूमि, चित्रेश्वर धाम, मां शीतला माता मंदिर, कालीचौड़ मंदिर, हैड़ाखान धाम और छोटा कैलाश है, जिन्हें अब 'धार्मिक पर्यटन सर्किट' के रूप में जाना जाएगा.

    रानीबाग में धार्मिक पर्यटन सर्किट बनने के बाद स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे. पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होते ही यहां पर्यटकों की आवाजाही बढ़ेगी और इसका सीधा फायदा टैक्सी चालकों को भी मिलेगा.

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