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​हल्द्वानी से इंदिरा हृदयेश का उत्तराधिकारी कौन? हरीश रावत के इस बयान ने बढ़ाया सस्पेंस

​हल्द्वानी से इंदिरा हृदयेश का उत्तराधिकारी कौन? हरीश रावत के इस बयान ने बढ़ाया सस्पेंस

हरिश रावत ने इंदिरा हृदयेश की उत्तराधिकारी के रूप में सुमित हृदयेश का नाम खारिज नहीं किया, लेकिन उसपर मुहर भी नहीं लगाई.

हरिश रावत ने इंदिरा हृदयेश की उत्तराधिकारी के रूप में सुमित हृदयेश का नाम खारिज नहीं किया, लेकिन उसपर मुहर भी नहीं लगाई.

Uttarakhand Assembly Elections : कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गोविंद सिंह कुंजवाल ने सुमित हृदयेश को ही इंदिरा का स्वाभाविक उत्तराधिकारी माना था. पूर्व सीएम हरीश रावत ने भी तब कुंजवाल के सुर से सुर मिलाए थे. लेकिन अब हरीश रावत ने अपनी बात साफ की है. हरीश रावत ने न्यूज18 से कहा 'मेरे से जब पूछा गया कि इंदिरा जी के कामों को कौन आगे बढ़ाएगा, तो मैंने कहा कि उनके बेटे सुमित काम करते हैं तो वे उनके काम आगे बढ़ाएंगे. रावत के मुताबिक, काम आगे बढ़ाने का अर्थ चुनाव से नहीं होता. उसका अर्थ होता है जो सामाजिक जीवन.

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हल्द्वानी. साल 2022 की हल्द्वानी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की कद्दावर नेता इंदिरा हृदयेश का उत्तराधिकारी कौन होगा – इस सवाल पर उत्तराखंड कांग्रेस कैंपेन कमेटी के अध्यक्ष और पूर्व सीएम हरीश रावत ने सस्पेंस बढ़ा दिया है. उत्तराखंड की राजनीति में मैडम के नाम से मशहूर इंदिरा हृदयेश का उत्तराधिकारी कौन होगा इस पर कयासों का बाजार गर्म है.

गौरतलब है कि इंदिरा हृदयेश के निधन के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और हरीश रावत के बेहद करीबी गोविंद सिंह कुंजवाल ने सुमित हृदयेश को ही इंदिरा का स्वाभाविक उत्तराधिकारी माना था. पूर्व सीएम हरीश रावत ने भी तब कुंजवाल के सुर से सुर मिलाए थे. लेकिन अब हरीश रावत ने अपनी बात साफ की है. हरीश रावत ने न्यूज18 से कहा ‘मेरे से जब पूछा गया कि इंदिरा जी के कामों को कौन आगे बढ़ाएगा, तो मैंने कहा कि उनके बेटे सुमित काम करते हैं तो वे उनके काम आगे बढ़ाएंगे. रावत के मुताबिक, काम आगे बढ़ाने का अर्थ चुनाव से नहीं होता. उसका अर्थ होता है जो सामाजिक जीवन. सामाजिक जीवन में माता-पिता के जो कर्तव्य होते हैं उन कर्तव्यों को बेटा और बेटी ही तो आगे बढ़ाते हैं. रावत ने कहा कि बहुत सारे निर्णय हमारे हाथ में नहीं होते. जनता के हाथ में होते हैं. और चुनाव के वक्त में जीतने वाले को ही देखा जाएगा. यानी टिकट जीतने वाले प्रत्याशी को ही मिलेगा.’

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राजनीति के जानकार हरीश रावत के इस बयान का गहरा अर्थ निकाल रहे हैं. इसका मतलब है कि कांग्रेस में सुमित हृदयेश को टिकट देने पर एक राय नहीं बन पाई है. रावत के इस बयान को हल्द्वानी से कांग्रेस का टिकट पाने की तैयारी कर रहे अन्य दावेदार अपनी आस के तौर पर देख रहे हैं. हालांकि इन सबके बीच इंदिरा के बेटे सुमित हृदयेश ने जनता के बीच सक्रियता और बढ़ा दी है. उनके चाहने वाले सुमित का टिकट पक्का मानकर चल रहे हैं. इंदिरा खुद घोषित कर चुकीं थीं सुमित को अपना उत्तराधिकारी.

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बता दें कि 13 जून 2021 को दिल्ली मीटिंग के लिए गईं इंदिरा हृदयेश का दिल का दौरा पड़ने से अचानक निधन हो गया था. उनके निधन के बाद से ही उनके उत्तराधिकारी को लेकर चर्चाएं तेज हैं. हालांकि इंदिरा अपने जीवित रहते हुए अपने सबसे छोटे बेटे सुमित हृदयेश को अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित कर चुकी थीं. इंदिरा ने सुमित को हल्द्वानी से मेयर का चुनाव भी लड़वाया था. यह अलग बात है कि सुमित मेयर का चुनाव हार गए थे. चुनावी तैयारियों में जुटे अन्य नेता इंदिरा हृदयेश के जीवित रहते हल्द्वानी से टिकट की मांग खुलकर नहीं कर पाता था. लेकिन इंदिरा के निधन के बाद से कई नेता दावेदारी कर रहे हैं. इन नेताओं में कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता दीपक बल्यूटिका, राज्य आंदोलनकारी और वरिष्ठ कांग्रेसी नेता हुकुम सिंह कुंवर, हरीश रावत के बेहद करीबी और पुराने कांग्रेसी खजान पांडे, पूर्व प्रदेश सचिव ललित जोशी, शशि वर्मा और शोभा बिष्ट जैसे नाम शामिल हैं.

Tags: Harish rawat, Indira hridayesh, Uttarakhand Assembly Elections 2022

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