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हल्द्वानी में महिलाओं के लिए पिछौड़ा बनाने की ट्रेनिंग, इस हुनर से बनेंगी आत्मनिर्भर

25 से 30 महिलाएं यहां पिछौड़ा बनाना सीख रही हैं. ट्रेनिंग के लिए रजिस्ट्रेशन समाप्त हो चुके हैं. इस प्रशिक्षण में महिलाओ ...अधिक पढ़ें

    पवन सिंह कुंवर/हल्द्वानी. कुमाऊंनी संस्कृति की पहचान ही निराली है. उस पर यहां की वेशभूषा का जवाब नहीं. पारंपरिकलहंगा-पिछौड़ा महिलाओं व युवतियों को खासा लुभाता आया है. उत्तराखंड के हल्द्वानी के जिला उद्योग केंद्र में महिलाओं को अब पिछौड़े तैयार करने के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है. पिछौड़े बनाने का प्रशिक्षण हासिल करने के बाद महिलाएं अब आत्मनिर्भर बन सकेंगी. जिला उद्योग केंद्र में दो माह का प्रशिक्षण शिविर शुरू हो गया है. 19 नवंबर से 18 जनवरी तक यह प्रशिक्षण चलेगा. 25 से 30 महिलाएं यहां पिछौड़ा बनाना सीख रही हैं. ट्रेनिंग के लिए रजिस्ट्रेशन समाप्त हो चुके हैं. इस प्रशिक्षण में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ उनको स्वरोजगार से भी जोड़ने की कवायद की जाएगी.

    कुमाऊंनी महिलाओं की शान यह पिछौड़ा वास्तव में बहुत ही सुंदर और आकर्षक होता है. इसमें प्रयोग होने वाले हर रंग व उन रंगों से बनने वाले हर डिजाइन का भी विशेष महत्व है. लगभग तीन मीटर लंबा व सवा मीटर तक चौड़ी इस ओढ़नी को सफेद चिकन के कपड़े में हल्दी के पीले रंग में रंगकर बनाया जाता है. सफेद रंग तो वैसे ही शांति, शुद्धता और पवित्रता का प्रतीक है जबकि पीला रंग आपके मन की खुशी व प्रसन्नता को जाहिर करता है. यह कुमाऊं में शुभ कार्यों में विवाहित महिलाओं द्वारा पहना जाता है.

    यहां मिली ट्रेनिंग
    पिछौड़े के प्रशिक्षण के लिए आईं रुचि नैनवाल ने कहा कि हम लोग जिला उद्योग केंद्र में ट्रेनिंग के लिए आए हैं. हमें यहां पर अलग-अलग डिजाइन के पिछौड़े तैयार करना सिखाया जा रहा है, जिससे बाद में हम अपना स्वरोजगार शुरू कर सकते हैं और आत्मनिर्भर बन सकते हैं. ज्योति ने कहा कि पिछौड़े बनाने की ट्रेनिंग लेकर हम और महिलाओं को भी स्वरोजगार से जोड़ सकते हैं. यह सरकार की बहुत अच्छी पहल है, जिससे हम महिलाओं को रोजगार मिलने के साथ-साथ हम अपनी आर्थिक स्थिति भी ठीक कर सकते हैं.

    महिलाओं को पिछौड़े की ट्रेनिंग देने वाले एसके अग्रवाल ने कहा कि हम महिलाओं को अलग-अलग डिजाइन के पिछौड़े तैयार करना सिखा रहे हैं, जिससे आने वाले समय में वह स्वरोजगार से जुड़ सकती हैं और अपना व्यवसाय शुरू कर सकती हैं. इसके लिए सरकार की ओर से उनको मदद दी जा रही है और यहां पर दो महीने की ट्रेनिंग चलेगी. बता दें कि पिछौडा कुमाऊंनी संस्कृति की पहचान व परंपरा से जुड़ा है. सारे शुभ कार्यों में जैसे- गणेश पूजा, विवाह, गृह प्रवेश, जनेऊ संस्कार, नामकरण संस्कार, तीज त्योहार या कोई भी पूजा-अर्चना या कोई भी शुभ अवसर हो, सभी सुहागिन महिलाएं इसे जरूर पहनती हैं.

    Tags: Haldwani news, Uttarakhand news

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