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ऑपरेशन आदमखोर: अभी और एक्सपर्ट आएंगे, बाघ को पकड़ने के लिए आखिर क्यों बदलनी पड़ी रणनीति?

ऑपरेशन आदमखोर: अभी और एक्सपर्ट आएंगे, बाघ को पकड़ने के लिए आखिर क्यों बदलनी पड़ी रणनीति?

हल्द्वानी में आदमखोर बाघ को पकड़ने की रणनीति बदली गई.

हल्द्वानी में आदमखोर बाघ को पकड़ने की रणनीति बदली गई.

Tiger Operation : हल्द्वानी के आदमखोर बाघ को मार गिराने के लिए उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) और हिमाचल से ​जो पेशेवर शिकारी (Hunters) बुलाए गए थे, उन्हें लौटाने का फैसला हो चुका है. अब वन विभाग दूसरी रणनीति से बाघ को ज़िंदा पकड़ने की तैयारी में है. बाघ पर अब 24 घंटे नजर के लिए जंगल में लोग तैनात हो रहे हैं. देखिए क्या है पूरी कवायद.

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हल्द्वानी. आदमखोर बाघ को पकड़ना फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है. इस बाघ को पकड़ने के लिए वन विभाग रोजाना नई रणनीति पर काम कर रहा है. पहले फॉरेस्ट डिपार्टमेंट ने इस आदमखोर बाघ के शिकार (Tiger Hunt) का फैसला लिया था, लेकिन गुरुवार को ऑपरेशन से जुड़ी हुई फॉरेस्ट टीम ने रणनीति बदली और गुजरात से 30 विशेषज्ञों की टीम (Gujarat Experts Team) हल्द्वानी के जंगलों में पहुंची. बताया जा रहा है कि बाघ अगर पकड़ा नहीं गया, तो एक्सपर्ट्स की और टीमें भी आ सकती हैं.

कुल मिलाकर आदमखोर घोषित हो चुके बाघ को मारने से ज्यादा ज़िंदा पकड़ने पर ज़ोर है. जामनगर रिहैबिलिटेशन सेंटर की टीम हल्द्वानी से सटे फतेहपुर के जंगल (Fatehpur Jungle) में डेरा डाले हुए है. इस टीम ने आदमखोर बाघ पर निगाह रखने के लिए जंगल में कई मचान भी बनवा लिये हैं और यहां से बाघ के मूवमेंट (Watch on Tiger) को देखा जा रहा है. रामनगर डिविज़न के डीएफओ चंद्रशेखर जोशी ने फतेहपुर रेंज के रेंजर केआर आर्या को निर्देश दिए हैं कि गुजरात की टीम को पूरा सहयोग देने के निर्देश दिए हैं.

डीएफओ ने साफ कह दिया है कि विशेषज्ञ और मचान बनाने के लिए कहते हैं, तो मुस्तैदी से काम पूरी किया जाए. अब सवाल यह है कि 6 जानें ले चुके बाघ को मारने के बजाय बेहोश करके पकड़ने की रणनीति क्यों बनाई जा रही है?

क्यों बदलनी पड़ी बाघ के लिए रणनीति?
सूत्रों के मुताबिक फॉरेस्ट टीम को रणनीति इसलिए बदलनी पड़ी क्योंकि इलाके में एक से अधिक बाघ दिखाई दे रहे हैं. ऐसे में शिकारियों को जंगल में उतारा जाएगा, तो और बाघ के मारे जाने की आशंका भी रहेगी और यह वाइल्डलाइफ के लिए बड़ा नुकसान हो सकता है. हालांकि एक दिन पहले कहा गया था कि कैमरा ट्रैप से मिली तस्वीरों के आधार पर आदमखोर बाघ की पहचान कर ली गई है, लेकिन वन विभाग कोई भी जोखिम लेने के मूड में नहीं है.

अभी और टीमें भी आएंगी!
सूत्रों के मुताबिक शनिवार को आईवीआरआई बरेली और एफआरआई देहरादून के विशेषज्ञों से जुड़ी हुई टीम भी फतेहपुर के उस जंगल का मुआयना करने के लिए पहुंच सकती है, जहां जहां बाघ ने कुल मिलाकर 6 लोगों को शिकार बनाया है और एक महिला को घायल किया है. बताया जा रहा है कि इस वक्त बाघ को पकड़ने के लिए विभिन्न विशेषज्ञों की 7 से 8 टीमें जंगल में सक्रिय हैं.

Tags: Uttarakhand Forest Department

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