रुड़की में बैंक में कोई अपराध हुआ तो आसानी से पकड़ में नहीं आ पाएंगे अपराधी... यहां जानिए क्यों

बैंक में सभी लोग मास्क पहनकर ही घुस रहे हैं. इससे यह आशंका तो बनी ही हुई है कि कोई अपराधी बिना पहचान में आए बैंक में घुस सकता है और अपराध को अंजाम दे सकता है.
बैंक में सभी लोग मास्क पहनकर ही घुस रहे हैं. इससे यह आशंका तो बनी ही हुई है कि कोई अपराधी बिना पहचान में आए बैंक में घुस सकता है और अपराध को अंजाम दे सकता है.

बैंक, एटीएम में प्रवेश करने से पहले 10 से 20 सेकेंड के लिए मास्क खोलने के निर्देशों का पालन नहीं हो रहा

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रुड़की. कोरोना काल में आपकी-हमारी जान बचाने वाला मास्क अपराधियों के वरदान साबित हो सकता है. वारदात के बाद सीसीटीवी से भी शातिर अपराधी को पहचानना आसान नहीं रह जाएगा. यह बात रुड़की में पुलिस को समझ आई लेकिन बैंक समझने को तैयार नहीं हैं. शहर और देहात क्षेत्रों के बैंकों की सुरक्षा को लेकर पुलिस मुस्तैद नज़र आ रही है लेकिन बैंक पुलिस का साथ देने को तैयार नज़र नहीं आ रहे. शायद किसी बड़ी वारदात के बाद ही बैंकों की नींद टूटे.

यह था पुलिस के निर्देश

बता दें कि कोरोना के मद्देनजर मास्क अनिवार्य होने के बाद एटीएम और बैंकों की सुरक्षा को लेकर पुलिस प्रशासन ने कुछ समय पहले बैंक अधिकारियों के साथ एक बैठक की थी. पुलिस ने निर्देश दिए थे कि बैंक में प्रवेश करने वाला प्रत्येक व्यक्ति को 10 से 20 सेकेंड तक अपना मास्क हटाकर कैमरे के सामने खड़ा रहना होगा ताकि उसका चेहरा कैमरे में कैद हो जाए. लेकिन ऐसा होता नहीं दिख रहा है.



बैंक में प्रवेश करने वाले सभी व्यक्ति मास्क पहने हुए हैं और कोई भी उसे कैमरे के आगे  उतारते नहीं दिख रहा. इससे यह आशंका तो बनी ही हुई है कि कोई अपराधी बिना पहचान में आए बैंक में घुस सकता है और अपराध को अंजाम दे सकता है. इसके बाद चूंकि उसकी शक्ल भी सीसीटीवी में कैद नहीं हुई है उसे ढूंढना असंभव का हो सकता है.
बैंकों को ही परवाह नहीं 

सीओ रुड़की चंदन सिंह बिष्ट का कहना है कि बैंको के साथ कई बार बैठक भी हो चुकी लेकिन बैंक खुद जिम्मेदारी  उठाना ही नहीं चाहते. अगर मास्क के पीछे  छुपा हुआ व्यक्ति अगर अपराधी निकल जाता है इसका नुकसान आम आदमी को ही झलेना पड़ेगा। बैंकों में बुजुर्ग व्यक्तियों से ठगी और लूट जैसी घटनाएं अधिक होने का डर रहता है.

बिष्ट कहते हैं कि पुलिस तो अपना काम कर ही रही है लेकिन ज़रूरत आम आदमी और बैंकों को भी ज़िम्मेदारी समझने की है.
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