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Uttarakhand: जंगल के नियमों का उल्लंघन करने पर 9 गुलदारों को आजीवन कारावास, जानें पूरा मामला

हरिद्वार के चिड़ियाघर में सजा काट रहे 9 गुलदार.

हरिद्वार के चिड़ियाघर में सजा काट रहे 9 गुलदार.

Haridwar News: उत्तराखंड के चीफ वाइल्ड लाइफ वॉर्डन समीर सिन्हा कहते हैं ये बेसिकली वाइल्ड लाइफ का पुर्नवास सेंटर है. यह ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

हरिद्वार के चिड़ियाघर में जेल में बंद हैं 9 गुलदार
इंसानी बस्ती में घुसने या इंसानों की हत्या का किया है अपराध

हरिद्वार. राजनीति में “जंगलराज” शब्द का उपयोग आपने बहुत देखा होगा. दरअसल, जहां कानून का पालन न हो, उस जगह को ही कहते हैं जंगलराज. क्योंकि, जंगल ही वो एरिया है, जहां जानवरों के लिए कोई कायदे-कानून नहीं होते. लेकिन उत्तराखंड में एक जगह ऐसी भी है, जहां कानून तोड़ने वाले जानवरों को भी जेल जाना पड़ता है. वो जगह है हरिद्वार नजीबाबाद हाईवे पर बना चिड़ियापुर ट्रांजिट एवं पुर्नवास सेंटर. यहां इंसानी कत्ल या फिर इंसानी बस्ती में घुसने के जुर्म में नौ गुलदारों को जेल में रखा गया है.

ये गुलदार सालों से पिंजरे में कैद हैं. कैद भी ऐसी जिसमें रिहाई की उम्मीद न के बराबर है. ये अब कभी वापस जंगल में नहीं जा पाएंगे. ये एक तरह से आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे हैं. इन सजायाफ्ता कैदियों को रूबी, रॉकी, दारा, मुन्ना, जाट, मोना, गब्बर, जोशी नाम से पुकारा जाता है. रूबी नाम की मादा गुलदार पिछले सात सालों से सजा काट रही है. इन्हें दिन के उजाले में कुछ घंटे के लिए खुले बाड़े में छोड़ा जाता है और फिर पिंजरें में कैद कर दिया जाता है. हफ्ते में एक दिन चिकन, एक दिन मटन और एक दिन मोटा मांस खाने को दिया जाता है. लेकिन, मंगलवार का एक दिन ऐसा भी होता है, जब नौ के नौ कैदियों को उपवास रखना होता है. यानि की मंगलवार को इन्हें खाने को कुछ नहीं दिया जाता है.

गुलदारों ने यह जुर्म किया है
यहां कारावास में रूबी नाम की आदमखोर गुलदार पिछले सात साल से बन्द है. उसे 2015 में इंसानी कत्ल के आरोप में तब पकड़ा गया था, जब वो मात्र छह साल की थी. तेरह साल के आदमाखोर रॉकी को 2017 में टिहरी के संतला गांव से पकड़ा गया था. दारा, उम्र 12 साल को 2017 में कोटद्वार के लाल पानी से पकड़ा गया था. चार साल का मुन्ना गुलदार मां से बिछड़ने कारण जन्म से ही यहां बंद है. 6 साल की मोना गुलदार का दोष सिर्फ इतना था कि 2020 में वह ऋषिकेश के डीपीएस स्कूल में घुस गई थी, जिसकी वजह से पूर्ण रूप से स्वस्थ मोना अब सजा काट रही है. दस साल के गब्बर को 2020 में हरिद्वार वन प्रभाग से पकड़ा गया था, बाईं आंख में चोट होने के कारण उसका नाम गब्बर रख दिया गया. 2020 में जोशीमठ से पकड़े गए आठ साल के गुलदार को जोशी नाम दिया गया है.

जंगल में इंसान घुसे तब भी सजा गुलदार को ही
अब सवाल ये उठता है कि क्या ये सच में इंसानी खून के आदि हो चुके थे, या फिर अचानक आमना-सामना होने पर घटना घट गई? बेजुबानों का पक्ष रखने और सुनने वाला कोई नहीं है. इंसान जंगल में घुसते हुए मारा गया या फिर बस्ती में आकर गुलदार ने इंसान को मारा. दोनों ही सूरत में बेजुबानों के नाम जुर्म कटा और आजीवन कारावास की सजा हो गई. उत्तराखंड के चीफ वाइल्ड लाइफ वॉर्डन समीर सिन्हा कहते हैं ये बेसिकली वाइल्ड लाइफ का पुर्नवास सेंटर है. यहां अलग-अलग घटनाओं में घायल हुए जानवरों को उपचार के लिए लाया जाता है. जहां, उपचार के बाद उनको फिर उनके नेचुरल हैवीटेट में छोड़ दिया जाता है. हालांकि, गुलदार के मामले में चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन के बयान मेल नहीं खाते. क्योंकि मैन ईटर हो चुके गुलदारों को यहां पिंजरे में कैद कर दिया जाता है और फिर उनकी रिहाई नामुमकिन हो जाती है. कई मौकों पर देखने को मिला कि पब्लिक प्रेशर में ये गुलदार पकड़ लिए जाते हैं.

गुलदारों के नरभक्षी होने के ठोस सबूत नहीं
विभाग इस बात का कोई ठोस प्रमाण नहीं दे पाया कि वास्तव में ये गुलदार नरभक्षी ही थे. लंबे समय तक ह्यूमन टच और पिंजरे में रहने के कारण ये गुलदार मानसिक तनाव में खूंखार हो गए हैं. अब इन्हें जंगल में छोड़ा जाना भी संभव नहीं है. गुलदारों के मंगलवार के उपवास पर चीफ वाइल्ड लाइफ वॉर्डन का कहना है कि जानवरों को जंगल में रोज शिकार नहीं मिलता. इसलिए एक दिन उपवास पर रखा जाता है. इससे उनके स्वास्थ्य में भी सुधार रहेगा.

Tags: Guldar, Haridwar news, Leopard attack, Uttarakhand news

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