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हरिद्वार : कुंभ मेले में दिखी गंगा-जमुनी तहजीब, मुस्लिम समुदाय के लोगों ने किया पेशवाई का स्वागत

कुंभ मेले के दौरान साधु-संतों के स्वागत के लिए हाथों में फूलों से भरी टोकरी के साथ इंतजार करते मुस्लिम समुदाय के लोग.

कुंभ मेले के दौरान साधु-संतों के स्वागत के लिए हाथों में फूलों से भरी टोकरी के साथ इंतजार करते मुस्लिम समुदाय के लोग.

मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने अखाड़े की पेशवाई में शामिल साधु-संतों पर फूलों की वर्षा की. उन्होंने रास्ते पर पानी का स्टॉल लगाकर सामाजिक सौहार्द का परिचय दिया.

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पुलकित शुक्ला

हरिद्वार. धर्मनगरी हरिद्वार (Haridwar) में इन दिनों आस्था के साथ-साथ सामाजिक सौहार्द (Social harmony) के भी नए-नए रंग देखने को मिल रहे हैं. बृहस्पतिवार और शुक्रवार को ज्वालापुर क्षेत्र से निकली जूना, अग्नि और आह्वान अखाड़ों की पेशवाई में गंगा-जमुनी तहजीब का एक खास नजारा देखने को मिला. यहां मुस्लिम समुदाय (Muslim community) के कुछ लोगों ने अखाड़े की पेशवाई में शामिल साधु-संतों पर फूलों की वर्षा कर उनका स्वागत किया. स्वागत करने वालों ने रास्ते पर पानी का स्टॉल लगाकर भी सामाजिक सौहार्द का परिचय दिया. मुस्लिम समाज के लोगों ने जिस तरह से अखाड़ा की पेशवाई के स्वागत की पहल की, लोगों ने उसकी खासी सराहना की.

मुस्लिम समुदाय ने फूल बरसाए



गौरतलब है कि इन दिनों हरिद्वार में कुंभ मेला चल रहा है. हर दिन साधु-संतों के अखाड़ों की शोभायात्रा और पेशवाइयां निकल रही हैं. बृहस्पतिवार और शुक्रवार को ज्वालापुर के पांडे वाला स्थित गुघाल मंदिर से जूना, अग्नि, आह्वान और किन्नर अखाड़े की भव्य पेशवाई निकाली गई, जो शहर के कई प्रमुख रास्तों और चौराहों से होती हुई माया देवी मंदिर तक पहुंची. उपनगरी ज्वालापुर में कई क्षेत्र मुस्लिम बहुल हैं. ऐसे में पेशवाइयां मुस्लिम बहुल क्षेत्रों से भी गुजरीं. इन क्षेत्रों के लोग भी हिंदुओं की तरह ही पेशवाइयों में साधु-संतों और नागा संन्यासियों को देखने के लिए सड़कों और अपने घरों की छतों पर जमा हो गए. इस बीच पार्षद सुहेल अख्तर, पार्षद रियाज अंसारी, डॉ मेहरबान खान, रिजवान, लईक अहमद आदि ने पेशवाई पर फूलों की वर्षा कर स्वागत किया और साधु-संतों को फूलों की मालाएं भी पहनाईं.
संस्कृति और आस्था का सम्मान

स्वागत करने वाले लोगों का कहना है कि यह भारत की संस्कृति है. भारत विविधताओं से भरा देश है. हम सभी को सभी की संस्कृतियों और धार्मिक आस्थाओं का सम्मान करना चाहिए. अखाड़ों के साधु-संतों ने भी स्वागत की सराहना की और कहा कि देश में प्रेम-सौहार्द का वातावरण बना रहना चाहिए.
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