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हरिद्वार कुंभ मेला : हिंदू धर्म से प्रभावित विदेशी भक्त रख रहे हैं भारतीय नाम

महानिर्वाणी अखाड़े की पेशवाई में विदेशी श्रद्धालु नाचते-गाते दिखे.

महानिर्वाणी अखाड़े की पेशवाई में विदेशी श्रद्धालु नाचते-गाते दिखे.

एक दूसरे विदेशी श्रद्धालु एंड्रिक का कहना है कि उन्हें हिंदू धर्म से जुड़ना अच्छा लगता है. इस धर्म की संस्कृति और इसकी प्रामाणिकता उन्हें दोबारा से यहां खींच लाई है.

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पुलकित शुक्ला

हरिद्वार. हरिद्वार कुंभ मेले (Haridwar Kumbh Mela) में आस्था और उमंग के कई नजारे देखने को मिल रहे हैं. बड़े-बड़े साधु संतों के न सिर्फ भारतीय बल्कि विदेशी अनुयायी (Followers) भी कुंभ मेले में शामिल होकर अभिभूत हो रहे हैं. आज महानिर्वाणी अखाड़े (Mahanirvani Akhada) की पेशवाई कनखल के प्रसिद्ध दक्षेश्वर महादेव मंदिर से रवाना हुई. इस पेशवाई में विदेशी श्रद्धालु बड़ी संख्या में शिरकत करते नजर आए. विदेशी श्रद्धालुओं ने न सिर्फ साधु-संतों के चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद लिया बल्कि पेशवाई में बज रहे ढोल-नगाड़े पर विदेशी जमकर थिरकते दिखे.

हिन्दू नाम अपना रहे विदेशी



यूरोपीय देशों से आए विदेशी श्रद्धालुओं का कहना है कि वे कुंभ मेले का आनंद उठा रहे हैं. उन्हें भारतीय संस्कृति और हिंदू धर्म के बारे में काफी कुछ जानने के लिए मिल रहा है, जिससे वे काफी प्रभावित हो रहे हैं. कई विदेशी श्रद्धालुओं ने हिंदू धर्म से प्रभावित होकर अपना हिंदू नाम भी रख लिया है.
हंगरी से आईं सीता

अपना नाम बदलकर सीता रख लेने वाली विदेशी महिला श्रद्धालु ने कहा कि वह तीस लोगों के दल के साथ हंगरी से यहां पहुंची हुई है. और कुंभ मेले में कई मनोरम दृश्यों का आनंद उठा रही है. उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में लोग उनके साथ हरिद्वार कुंभ में आना चाहते थे, लेकिन कोरोना के कारण कई लोग यहां नहीं आ सके.

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हिंदू धर्म की प्रामाणिकता दोबारा खींच लाई एंड्रिक

एक दूसरे विदेशी श्रद्धालु एंड्रिक का कहना है कि उन्हें हिंदू धर्म से जुड़ना अच्छा लगता है. इससे पहले भी वह हरिद्वार कुंभ मेले में आ चुके हैं. हिंदू धर्म की संस्कृति और इसकी प्रामाणिकता उन्हें दोबारा से यहां खींच लाई है. महानिर्वाणी अखाड़े के वरिष्ठ संत महंत रविंद्र पूरी ने कहा कि यह भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म की विशेषता है. इसमें इतनी शक्ति है कि न सिर्फ भारतवासी बल्कि विदेशी भी इससे अपने आपको अलग नहीं रख पाते हैं. कुंभ मेला विश्व के पटल पर हिंदू संस्कृति को स्थापित करने का वैश्विक आयोजन है.
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