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हरीश रावत ने नदियां खोदी, हमने उनकी कुर्सी खोद दी: विजय बहुगुणा
Haridwar News in Hindi

Tanuja Walia | ETV UP/Uttarakhand
Updated: April 15, 2016, 8:39 PM IST
हरीश रावत ने नदियां खोदी, हमने उनकी कुर्सी खोद दी: विजय बहुगुणा
कांग्रेस से मोहभंग होने के बाद भाजपा के पाले में बैठे पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने शुक्रवार को हरिद्वार पहुंच शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती से मुलाकात की. रावत से नाराज बहुगुणा ने उनपर तीखे प्रहार किए.

कांग्रेस से मोहभंग होने के बाद भाजपा के पाले में बैठे पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने शुक्रवार को हरिद्वार पहुंच शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती से मुलाकात की. रावत से नाराज बहुगुणा ने उनपर तीखे प्रहार किए.

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कांग्रेस से मोहभंग होने के बाद भाजपा के पाले में बैठे पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने शुक्रवार को हरिद्वार पहुंच शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती से मुलाकात की. रावत से नाराज बहुगुणा ने उनपर तीखे प्रहार किए. उन्होंने कहा कि रावत ने उत्तराखंड की नदियां खोदी और हमने उनकी जड़ें खोद दी. सूबे में राष्ट्रपति शासन के लिए रावत खुद जिम्मेदार हैं अगर वे सीएम पद छोड़ देते तो राष्ट्रपति शासन न लगता.

विजय बहुगुणा ने हरीश रावत पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि चार धाम यात्रा पर सरकार का कोई फर्क नहीं पड़ता. उन्होंने कहा कि रावत ने नदियां खोदी हमने उनकी कुर्सी खोद दी.

हालांकि ये बात मीडिया के सामने कहने की नहीं है पर गंभीर मामले हैं, लेकिन मैं जो भी कदम उठाऊंगा राज्य के हित में उठाऊंगा.



बहुगुणा ने कहा कि मैं हरिद्वार शंकराचार्य जी का आशीर्वाद लेने आया था. यहां की समस्याएं राज्यपाल जी से बात करेंगे. देश में राष्ट्रपति शासन कोई पहली बार नहीं लगा. यहां रावत की वजह से राष्ट्रपति शासन लगा. अगर बहुमत हारने के बाद ये त्यागपत्र दे देते तो यहां राष्ट्रपति शासन नहीं लगता.



उन्होंने आरोप लगाया कि सूबे में नदियां खोदी हैं जो राजस्व आज मिला वो दो साल पहले क्यों नहीं मिला. उन्होंने जल से जल्द चुनाव कराने की मांग राजपाल से की.

बहुगुणा ने एक और तीखा वार करते हुआ कहा कि उनका अगला कदम उत्तराखंड की राजनीति से प्रदूषण को दूर करना है. उन्होंने माना की वे किसी की सरकार बनाने में मदद नहीं कर सकते, क्योंकि वे स्वेच्छा से अयोग्य हैं.

उन्होंने कहा कि उनके समय की घोषणाओं पर न केवल रोक लगा दी, बल्कि उनके नाम के शिला पट्ट तक हटा दिए. सूबे में केवल नेतृत्व परवर्तन हुआ था सत्ता परिवर्तन नहीं और ऐसा और किसी राज्य में तो हो सकता है उत्तराखंड में नहीं.

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First published: April 15, 2016, 3:29 PM IST
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