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रुड़की नगर निगम में भी निर्दलियों ने मारी बाज़ी... 40 में 20 पार्षद के साथ मेयर भी निर्दलीय

News18 Uttarakhand
Updated: November 25, 2019, 2:40 PM IST
रुड़की नगर निगम में भी निर्दलियों ने मारी बाज़ी... 40 में 20 पार्षद के साथ मेयर भी निर्दलीय
बीजेपी से बागी होकर निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले गौरव गोयल रुड़की के मेयर बने हैं.

भाजपा से बागी होकर निर्दलीय (BJP rebel and independent) चुनाव लड़े गौरव गोयल (gaurav goyal) रुड़की के मेयर (roorakee mayor) बन गए हैं और भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी मयंक गुप्ता तीसरे स्थान पर पहुंच गए.

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रुड़की. प्रदेश के बाकी स्थानीय निकायों से अलग हुए रुड़की नगर निगम के चुनाव का रिज़ल्ट अलग नहीं रहा. निर्दलियों ने क्या नगर निकाय, क्या पंचायत सभी जगह दबदबा कायम किया है. पार्षदों की 40 में से 20 सीटें निर्दलीय जीत गए हैं. भाजपा से बागी होकर निर्दलीय चुनाव लड़े गौरव गोयल रुड़की के मेयर बन गए हैं. ख़ास बात यह रही कि कांग्रेस के रिशु राणा दूसरे स्थान पर रहे तो भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी मयंक गुप्ता तीसरे स्थान पर पहुंच गए. इन चुनावों में भी रुड़की ने अपने चुनावी मिथक को बरक़रार रखा.

कांग्रेस प्रत्याशी को दोहरा झटका

हमेशा की तरह रुड़की नगर निगम के मतदाताओं ने भाजपा, कांग्रेस और बसपा किसी पर भरोसा नहीं किया और निर्दलीय को चुनाव जिताया. रुड़की नगर निगम चुनावों में पार्षदों की 40 सीटों में से आधी यानी 20 पर निर्दलीयों ने कब्ज़ा कर लिया.

नगर निगम चुनाव में 17 सीटें हासिल कर भाजपा दूसरे स्थान पर रही तो तीसरे स्थान पर दो सीटों के साथ कांग्रेस रही. एक सीट जीतकर बसपा निगम में अपनी मौजूदगी बनाए रखने में कामयाब हो गई. कांग्रेस के रिशु राणा को इन चुनावों में दोहरा झटका लगा. मेयर के साथ ही वार्ड 28 से पार्षद पद का चुनाव लड़ रहे रिशु राणा को भाजपा के अनूप राणा ने करारी शिकस्त दी.

निर्दलीय ही जीते हमेशा

रुड़की नगर निगम की ख़ास बात यह भी है कि राज्य गठन के बाद से आज तक मेयर पद पर की भी दलीय प्रत्याशी नहीं जीता है. यह अलग बात है कि जीतने के बाद मेयर और पहले नगरपालिका अध्यक्षों ने कांग्रेस का दामन लिया था.

2000 में उत्तराखंड राज्य गठन के बाद नगरपालिका का पहला चुनाव 2003 में हुआ था. उस चुनाव में निर्दलीय दिनेश कौशिक ने भाजपा के प्रमोद गोयल को शिकस्त दी थी. बाद में दिनेश कौशिक कांग्रेस में शामिल हो गए थे.
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जीते फिर बने कांग्रेसी

2008 में भी नगर पालिका चुनाव में भाजपा प्रत्याशी अश्वनी कौशिक और निर्दलीय प्रदीप बत्रा के बीच जबरदस्त टक्कर हुई. इस चुनाव में भी निर्दलीय प्रदीप बत्रा, भाजपा के प्रत्याशी को शिकस्त देने में कामयाब रहे. बाद में प्रदीप बत्रा ने भी कांग्रेस का दामन थाम लिया.

नगर निगम का दर्जा मिलने के बाद 2013 में हुए चुनाव में निर्दलीय यशपाल राणा और बीजेपी प्रत्याशी महेंद्र काला में टक्कर हुई और राणा जीतकर नगर निगम के पहले मेयर बने.

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First published: November 25, 2019, 12:53 PM IST
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