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उत्तराखंड से अपहृत किशोर बिजनौर में बरामद, 15 लाख की फिरौती के लिए हुआ था अपहरण

पुलिस अधिकारी ने बताया कि अपहरण के आरोपी भोला ने बताया कि वह बिहार के पूर्वी चंपारण जिले का रहने वाला है और ऋषिकेश मे टाइल्स लगाने का काम करता है. (सांकेतिक फोटो)

पुलिस अधिकारी ने बताया कि अपहरण के आरोपी भोला ने बताया कि वह बिहार के पूर्वी चंपारण जिले का रहने वाला है और ऋषिकेश मे टाइल्स लगाने का काम करता है. (सांकेतिक फोटो)

पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह (Dharamveer Singh) ने बताया कि शनिवार को लगभग 11 बजे उत्तराखंड के ऋषिकेश के निवासी गोपालकृष्ण का आठवी कक्षा में पढ़ने वाला बेटा भुवनेश कुमार घर से गायब हो गया. इसके बाद पुलिस ने जब मामले की जांच की तो अपहरण कहानी सामने आयी.

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बिजनौर. उत्तराखंड के ऋषिकेश (Rishikesh) से 15 लाख रुपये की फिरौती के लिए शनिवार को अपह्रत किए गये 13 वर्षीय किशोर भुवनेश को उत्तर प्रदेश के बिजनौर (Bijnor) में पुलिस ने बरामद कर लिया है. साथ ही पुलिस ने अपहरणकर्ता को गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस ने इसकी जानकारी दी. पुलिस ने बताया कि अपहरणकर्ता की पहचान राजन (Rajan) ऊर्फ भोला के रूप में की गयी है और वह ऋषिकेश में टाइल्स लगाने का काम करता है. पुलिस ने बताया कि भोला से पूछताछ की जा रही है.

पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह ने बताया कि शनिवार को लगभग 11 बजे उत्तराखंड के ऋषिकेश के भट्टोवाला निवासी गोपालकृष्ण का आठवी कक्षा मे पढ़ने वाला बेटा भुवनेश कुमार घर से गायब हो गया. उन्होंने बताया कि गोपालकृष्ण के पास 15 लाख रुपये की फिरौती देने की कॉल आयी थी. सिंह ने बताया कि गोपाल ने थाना ऋषिकेश में भोला नामक युवक के खिलाफ अपहरण की रिपोर्ट दर्ज करायी और इसके बाद पुलिस ने कॉल किये गये नंबर से मोबाइल लोकेशन लेकर उत्तर प्रदेश के बिजनौर पुलिस से सहायता मांगी. उन्होंने बताया कि अपहर्ता का मोबाइल लोकेशन बिजनौर के धामपुर में फायर स्टेशन के पास मिली. उन्होंने बताया कि इसके बाद धामपुर की पुलिस टीम ने मुरादाबाद जा रही रोडवेज बस रुकवा कर उसकी जांच की तो उसमें अपहरणकर्ता के साथ भुवनेश सकुशल बरामद हो गया.

ऋषिकेश पुलिस को भुवनेश के बरामदगी की सूचना दे दी गयी है
पुलिस अधिकारी ने बताया कि अपहरण के आरोपी भोला ने बताया कि वह बिहार के पूर्वी चंपारण जिले का रहने वाला है और ऋषिकेश मे टाइल्स लगाने का काम करता है. उसने बताया कि भुवनेश को वह बहला फुसला कर ले जा रहा था, उसके साथियों ने गोपालकृष्ण से 15 लाख रुपये की फिरौती मांगी है. गोपालकृष्ण एम्स ऋषिकेश में सुपरवाइजर हैं. पुलिस अधीक्षक ने बताया कि भोला से पूछताछ की जा रही है और ऋषिकेश पुलिस को भुवनेश के बरामदगी की सूचना दे दी गयी है.

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अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष का होगा चुनाव, 13 अखाड़ों में हलचल, 5 अक्टूबर के बाद बैठक

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष पद पर चुनाव को लेकर साधु संतों में हलचल शुरू हो गई.

Akhara Parishad: साधु-संतों की सर्वोच्च संस्था अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी की मौत के बाद अध्यक्ष के चुनावों को लेकर सभी तेरह अखाड़ों के साधु-संतों में हलचल है. ऐसे में बैरागी संप्रदाय के संत अपने संप्रदाय को प्रतिनिधित्व दिए जाने की मांग भी उठा सकते हैं.

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पुलकित शुक्ला

हरिद्वार. साधु-संतों की सर्वोच्च संस्था अखाड़ा परिषद (Akhara Parishad) के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी (Mahant Narendra Giri) की मौत के बाद परिषद के अध्यक्ष के चुनावों को लेकर सभी 13 अखाड़ों के साधु-संतों के बीच हलचल शुरू हो गई है. ऐसे में कुछ बैरागी संप्रदाय के संत अपने संप्रदाय को प्रतिनिधित्व दिए जाने की मांग भी उठा सकते हैं. यहां परिषद की बैठक में बैरागी साधु संन्यासी अध्यक्ष पद पर अपने प्रतिनिधि को काबिज़ करने की मांग कर सकते हैं.

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद साधु संतों की सर्वोच्च संस्था है. अखाड़ा परिषद का मुख्य उद्देश्य कुंभ मेलों के दौरान सरकार और साधु-संतों के बीच समन्वय बनाना है. कुंभ मेलों के लिए सरकार संतों को कई सुविधाएं देती हैं. इन सुविधाओं का लाभ दूसरे संतों तक पहुंचाना और संतों की समस्याओं से सरकार को रूबरू कराने का काम अखाड़ा परिषद करती है. इसलिए अखाड़ा परिषद का अध्यक्ष साधु संतों के बीच में एक महत्वपूर्ण पद होता है.

परिषद के उपाध्यक्ष का कहना है कि 5 अक्टूबर के बाद अखाड़ा परिषद की बैठक बुलाई जाएगी. अखाड़ा परिषद के उपाध्यक्ष देवेंद्र शास्त्री का कहना है कि दिवंगत नरेंद्र गिरी के षोडषी संस्कार के बाद अखाड़ा परिषद की बैठक बुलाई जाएगी. हालांकि फिलहाल कोई कुंभ मेला नहीं है इसलिए बैठक बुलाए जाने की कोई जल्दी नहीं है.

एक पद संन्यासियों और दूसरा बैरागियों को मिलता है

साधु संतों के 13 प्रमुख अखाड़े हैं. ये अखाड़े चार संप्रदाय में बंटे हैं. 13 अखाड़ों में 7 संन्यासी और 3 बैरागी संप्रदाय के अखाड़े हैं. हरिद्वार कुंभ मेले के दौरान नरेंद्र गिरी को परिषद का अध्यक्ष और महंत हरी गिरी को दोबारा महामंत्री बनाया गया था, जिसको लेकर बैरागी संप्रदाय के संतों में नाराजगी थी और वे परिषद को भंग करने की मांग कर रहे थे. बैरागी संप्रदाय के संत बाबा हठयोगी का कहना है कि नियम के अनुसार अध्यक्ष और महामंत्री में एक पद संन्यासी अखाड़ा और दूसरा पद बैरागी अखाड़ों को मिलना चाहिए. अगर ऐसा नहीं होता है तो अखाड़ा परिषद को भंग कर देना चाहिए.

हरिद्वार : नारायणी शिला मंदिर में तर्पण से पितरों को मिलता है मोक्ष!

प्राचीन नारायणी शिला मंदिर हरिद्वार में स्थित है.

पितृ पक्ष के दौरान यहां देश के कोने-कोने से हर रोज हजारों लोग अपने पितरों की शांति के लिए श्राद्ध और तर्पण करने पहुंचते हैं.

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हरिद्वार से करीब 4 से 5 किलोमीटर की दूरी पर नारायणी शिला स्थित है. पितृ पक्ष के दौरान यहां देश के कोने-कोने से हर रोज हजारों लोग अपने पितरों की शांति के लिए श्राद्ध और तर्पण करने पहुंचते हैं. पौराणिक मान्यता है कि हरिद्वार स्थित नारायणी शिला मंदिर पर तर्पण करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है.

पितृ पक्ष में की जाने वाली पूजा के लिए बिहार के गया मंदिर के बाद हरिद्वार के नारायणी शिला मंदिर का विशेष स्थान है. पितृ दोष से पीड़ित लोग यहां पहुंचकर अपने पितरों के लिए दान और जप करते हैं.

मान्यता है कि जिनकी अकाल मृत्यु हो जाती है और वह प्रेत-आत्मा बनकर अगर बार-बार किसी को परेशान करते हैं तो उनके वंशज उनके नाम से यहां पर नारायण बलि करते हैं. साथ ही कई लोग अपने पितरों के आत्मा की शांति के लिए यहां पर एक जगह लेकर उनका छोटा सा टीला बनाकर आवास स्थापित भी करते हैं, जिससे उनको प्रेत योनि से मुक्ति मिल जाती है. यहां मंदिर के आसपास के हजारों छोटे-बड़े टीले हैं.

नारायण शिला मंंदिर के महंत पंडित मनोज कुमार त्रिपाठी बताते हैं कि स्कंद पुराण के अनुसार, नारद की प्रेरणा पाकर एक बार गयासुर नारायण से मिलने बद्रीधाम पहुंचे लेकिन धाम का द्वार बंद मिला. इस पर गयासुर वहां रखे भगवान नारायण के कमलासन रूपी श्री विग्रह को उठाकर ले जाने लगा. इसी दौरान गयासुर ने श्रीनारायण को युद्ध के लिए ललकारा.

श्रीनारायण ने गदा से प्रहार किया तो गयासुर ने कमलासन आगे कर दिया. इससे कमलासन का एक भाग टूटकर वहीं गिरा, जिसे आज बद्रीधाम में ब्रह्म कपाल के नाम से जाना जाता है. इसका मध्य भाग टूटकर हरिद्वार व तीसरा भाग गया में गिरा. इससे यह तीनों स्थल पवित्र माने गए हैं. श्रीनारायण ने कहा था कि जो भी जीव मुक्ति इच्छा के लिए इन तीनों स्थानों पर तर्पण करेगा, उसे मुक्ति मिल जाएगी.

Haridwar: कोरोना शिकार समेत 9 हजार लावारिस लाशों की अस्थियां गंगा में विसर्जित

हरिद्वार के सती घाट पर 9 हज़ार से ज्यादा अस्थियों का विसर्जन किया.

Haridwar News: हरिद्वार में मोक्षदायिनी मां गंगा में 9 हज़ार लावारिस अस्थियों का विसर्जन विधि विधान से किया गया.दिल्ली की संस्था देव उत्थान सेवा समिति से जुड़े लोगों ने हरिद्वार के सतीघाट पहुंचकर अस्थि विसर्जन किया. मृतकों के मोक्ष की कामना की.

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पुलकित शुक्ला

हरिद्वार. हरिद्वार (Haridwar) में मोक्षदायिनी मां गंगा में 9 हज़ार लावारिस अस्थियों का विसर्जन विधि विधान से किया गया. हर साल की तरह दिल्ली की संस्था देव उत्थान सेवा समिति से जुड़े लोगों ने हरिद्वार के सतीघाट पहुंचकर अस्थि विसर्जन किया और अनाम मृतकों के मोक्ष की कामना की. हिंदू धर्म में मान्यता है कि किसी भी व्यक्ति के मरने के बाद जब तक उसकी अस्थियां गंगा में विसर्जित नहीं की जाती तब तक उसे मोक्ष की प्राप्ति नहीं होती, लेकिन हजारों लावारिस मौतें ऐसी होती हैं जिनकी अस्थियां मोक्षदायिनी गंगा तक नहीं पहुंच पातीं.

डेढ़ लाख से ज्यादा अस्थियां गंगा में विसर्जित

दिल्ली की देव उत्थान सेवा समिति पिछले 19 सालों से अनाम मृतकों को मोक्ष दिलाने के लिए उनकी अस्थियां गंगा में विसर्जित करने का काम कर रही है. इस बार सेवा समिति ने हरिद्वार के सती घाट पर 9 हज़ार से ज्यादा अस्थियों का विसर्जन किया. इन मृतकों में लावारिस मौतों के अलावा बड़ी संख्या में कोरोना से मरने वाले लोग भी शामिल हैं. कोरोना काल में जहां अपनों ने ही मृतकों की अस्थियों को विसर्जित करना जरूरी नहीं समझा, वहीं देवोत्थान सेवा समिति मृतकों की अस्थि गंगा में विसर्जित कर उनके लिए मोक्ष का द्वार खोल रही है. सेवा समिति के संयोजक विजय शर्मा का कहना है कि पिछले 19 सालों से समिति यह काम कर रही है. डेढ़ लाख से ज्यादा अस्थियां गंगा में विसर्जित की जा चुकी हैं.

युवा भी बढ़-चढ़कर बन रहे भागीदार

देवोत्थान सेवा समिति के इस मानवीय अभियान में लोग लगातार उसके साथ जुड़ रहे हैं. हरिद्वार अस्थि विसर्जन के लिए पहुंचे 100 लोगों के दल में ज्यादातर स्कूल कॉलेज के छात्र छात्राएं नजर आए. दिल्ली से आए वॉलिंटियर नमन शर्मा और किरनजीत कौर का कहना है कि सब अपने-अपने ढंग से समाज और मानव सेवा में जुटे हैं. ऐसे में उन्हें लोगों को मोक्ष दिलाने का माध्यम बनने में खुशी मिलती है.

महंत नरेंद्र गिरि मौत मामले में अहम मोड़, अब CBI के रडार पर हरिद्वार के प्रॉपर्टी डीलर

अखाड़ा परिषद के प्रमुख थे महंत नरेंद्र गिरि.

Mahant Narendra Giri Death : प्रयागराज में हुई नरेंद्र गिरि की संदिग्ध मौत की जांच में सीबीआई प्रॉपर्टी के एंगल से भी जांच में जुटी हुई है. उत्तराखंड तक पहुंच गई इस जांच के साथ ही ये भी जानिए कि कैसे हरिद्वार में प्रॉपर्टी की जंग पहले भी संतों की जान तक पहुंची है.

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पु​लकित शुक्ला
हरिद्वार. अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की संदिग्ध मौत की गुत्थी उलझती जा रही है. गिरि के शिष्य आनंद गिरि को हरिद्वार से गिरफ्तार किए जाने के बाद उन्होंने अखाड़ों की ज़मीन और प्रॉपर्टी के विवाद के संबंध में बातचीत कही थी और अब जांच एजेंसी को नरेंद्र गिरि के कॉल रिकॉर्ड से हरिद्वार के कुछ रियल एस्टेट कारोबारियों से कई बार बात होने का पता चला है. पूरे मामले में जांच एजेंसी अब प्रॉपर्टी के एंगल से भी जांच कर रही है. यही कारण है कि जांच एजेंसी की रडार पर अब हरिद्वार के कुछ रियल एस्टेट कारोबारी भी आ गए हैं.

अखाड़ों के पास हैं बेशुमार संपत्तियां
हरिद्वार में कई अखाड़ों के मुख्यालय हैं. यहां अखाड़ों, आश्रमों और मठों के पास अकूत सम्पदाएं हैं. कुछ अखाड़ों के पास तो शहर के लगभग हर हिस्से में ज़मीनें हैं. हरिद्वार में अखाड़ों के महंतों और रियल स्टेट कारोबारियों के बीच में सांठगांठ काफी पुरानी रही है. यही कारण है कि धर्म, परमार्थ और जनहित के उद्देश्य से अर्जित की गई संपत्तियां अब अपार्टमेंट्स, शॉपिंग कॉंप्लेक्स और मॉल में तब्दील हो रही हैं.

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हरिद्वार स्थित कई अखाड़ों की संपत्तियों को लेकर विवादों की चर्चा आम है.

साल दर साल यहां ऐसे अपार्टमेंट और सोसाइटी की संख्या बढ़ रही है, जो अवैध ढंग से अखाड़ों की ज़मीनों पर खड़े हैं. दूसरी तरफ, ये भी दबे शब्दों में कहा जा रहा है कि राजस्व चोरी और नियमों को दरकिनार कर इमारतें खड़े करने का यह खेल शासन प्रशासन की नाक के नीचे हो रहा है.

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कई संतों की हो चुकी हैं हत्याएं
धर्म नगरी में धार्मिक संपत्तियों की खरीद-फरोख्त न सिर्फ विवादित बल्कि रक्त रंजित रही है. राज्य गठन के बाद से अब तक हरिद्वार के दर्जनों संतो की हत्या और संदिग्ध मौत हो चुकी है. ऐसी मौतों के पीछे संपत्तियों की खरीद-फरोख्त का विवाद बताया जाता है. अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता बाबा हठयोगी बताते हैं ‘अखाड़ा की ज़मीनों की खरीद-फरोख्त से कई बार अखाड़ों के पदाधिकारियों में भी आपसी तनातनी बढ़ जाती है इसलिए अब तक दर्जनों संतो की मौत संदिग्ध रही है.’

उत्तराखंडः फूलन देवी की बहन ने शेर सिंह राणा की पार्टी जॉइन की, वजह नहीं बताई

शेर सिंह राणा और मुन्नी देवी.

फूलन देवी हत्या मामले में सज़ा काट चुके शेर सिंह राणा के बारे में कहा जाता है कि वह राजनीति में पैर जमाने की कोशिश में है. इधर, फूलन देवी की बहन ने पार्टी में शामिल होने के कारण पर कुछ कहने से गुरेज़ किया.

  • News18Hindi
  • LAST UPDATED : September 23, 2021, 17:41 IST
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हरिद्वार. पांच महीने बाद होने वाले उत्तराखंड विधानसभा चुनाव के पहले सियासी हलचल जारी हैं. बुधवार को फूलन देवी की बहन मुन्नी देवी ने शेर सिंह राणा की राजनीतिक पार्टी अहम पदाधिकारी के तौर पर जॉइन की. साल 2001 में जब फूलन देवी की हत्या की गई थी, तब मुन्नी ने बयान दिया था कि राणा ने ही गोलियां चलाई थीं. फिर सबको चौंकाते हुए ट्रायल के दौरान 2007 में ही मुन्नी ने बयान बदला और कहा कि राणा को इस हत्याकांड में फंसाया गया और वास्तव में हत्या सांसद के पति उमेद सिंह ने करवाई थी. इस बयान के बदले जाने के बावजूद 2014 में दिल्ली की अदालत ने राणा को उम्रकैद सुनाई थी, लेकिन 2016 में उसे ज़मानत पर छोड़ दिया गया.

हरिद्वार में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बुधवार को यह घोषणा की गई कि मुन्नी देवी राष्ट्रवादी जनलोक पार्टी की उपाध्यक्ष होंगी. खबरों की मानें तो राणा द्वारा बनाई गई इस पार्टी में उत्तराखंड के लिए सह प्रभारी का दायित्व भी मुन्नी को मिला. हालांकि इस प्रेस वार्ता में मुन्नी खुद मौजूद नहीं थीं, लेकिन उनके नाम से जारी एक धन्यवाद पत्र ज़रूर दिया गया. इस पत्र में मुन्नी ने राणा को धन्यवाद देते हुए लिखा कि जल्द ही उत्तराखंड में बेरोज़गारी के खिलाफ राज्य स्तरीय आंदोलन शुरू किया जाएगा.

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मुन्नी देवी ने अपनी बहन फूलन देवी के कथित हत्यारे शेर​ सिंह राणा की सियासी पार्टी जॉइन की.

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आखिर क्या है ये पूरा माजरा?
अब सवाल यह है कि फूलन देवी की हत्या के मामले में सज़ायाफ्ता रहे राणा की पार्टी मुन्नी ने क्यों जॉइन की? बहरहाल : रुड़की के रहने वाले राणा की पार्टी ने पिछले दिनों हरिद्वार में एक बड़ी रैली की थी. राणा ऐलान कर चुके हैं कि उनकी पार्टी उत्तराखंड में चुनाव लड़ेगी. इधर, इस घटनाक्रम के बाद फूलन की बहन ने टीओआई से बातचीत में कहा, ‘मैंने पार्टी अपनी इच्छा से जॉइन की है. मुझे और कुछ नहीं कहना क्योंकि अपनी बहन की हत्या के पीछे के सच के बारे में पहले ही मैं काफी कुछ कह चुकी हूं.’

Haridwar News: आनंद गिरि का आश्रम दूसरी बार हुआ सील, दर्ज हो सकती है FIR

अवैध निर्माण के चलते आनंद गिरि के हरिद्वार स्थित आश्रम को सील कर दिया गया है.

Uttarakhand News: अवैध निर्माण के चलते पहले भी रुड़की विकास प्राधिकरण ने मई में किया था सील, लेकिन नहीं रोका गया निर्माण कार्य, अब फिर कार्रवाई करते हुए कर दिया गया सील.

  • News18Hindi
  • LAST UPDATED : September 22, 2021, 20:01 IST
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हरिद्वार. महंत नरेंद्र गिरि आत्महत्या मामले में मुख्य आरोपी आनंद गिरि की मुश्किलें कम नहीं होती दिख रही हैं. गिरफ्तारी के बाद आनंद गिरी पर एक और परेशानी आ गई है. आनंद गिरि का हरिद्वार स्थित आश्रम को सील कर दिया गया है. ये आश्रम श्यामपुर में स्थित है और इसको सील करने की ये दूसरी बार हुई कार्रवाई है. बताया जा रहा है कि ये कार्रवाई रुड़की प्राधिकरण ने की है. बताया जा रहा है कि इस आश्रम में अवैध निर्माण हो रहा था जिसकी शिकायत मिलने पर प्राधिकरण ने मई में इसे सील किया था. लेकिन बताया जा रहा है कि इसके बाद भी आश्रम में अवैध निर्माण को नहीं रोका गया और अंदर लगातार कंस्ट्रक्‍शन होता रहा.
इस बात की जानकारी मिलने पर रुड़की विकास प्राधिकरण ने इसे बुधवार को एक बार फिर सील कर दिया. वहीं अब बताया जा रहा है ‌कि आश्रम संचालक और अन्य पदाधिकारियों के खिलाफ अब प्राधिकरण एफआईआर भी दर्ज करवा सकता है.

संगठन से भी बाहर हुआ आनंद
वहीं नरेंद्र गिरी को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपी आनंद गिरी को अब युवा साधु संतों के संगठन युवा भारत साधु समाज ने भी अपने संगठन से निकाल दिया है. हरिद्वार स्थित गरीब दास आश्रम में बुधवार को बैठक का आयोजन किया गया. इस बैठक के दौरान संगठन ने कार्रवाई करते हुए आनंद गिरी को संगठने से निष्कासित कर दिया. आनंद गिरि संगठन के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष के पद पर था, उसे इस पद से अब हटा दिया गया है.

14 दिन की न्यायिक हिरासत
वहीं महंत नरेंद्र गिरि आत्महत्या मामले में आरोपी आनंद गिरी को 14 दिन के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. उत्तर प्रदेश पुलिस ने आनंद गिरि को कोर्ट में पेश किया था जिसके बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेजा गया. गौरतलब है कि नरेंद्र गिरि ने अपने सुसाइड नोट में आनंद गिरि, आद्या तिवारी और संदीप तिवारी को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था. जिसके बाद पुलिस ने आनंद गिरि को हरिद्वार से गिरफ्तार किया था.

सबसे पढ़े-लिखे साधुओं का अखाड़ा है निरंजनी, जिसके सचिव थे नरेंद्र गिरि

कैसा है निरंजनी अखाड़ा, कैसे काम करता है (फोटो - न्यूज 18)

महंत नरेंद्र गिरि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष तो थे ही साथ ही निरंजनी अखाड़े के सचिव थे. ये अखाड़ा कई मायनों में दूसरे अखाड़ों से अलग और खास है. सबसे ज्यादा धनी होने के साथ इसके साथ सबसे ज्यादा पढ़े लिखे साधू जुड़े हैं. जानते हैं इस अखाड़े के बारे में

  • News18Hindi
  • LAST UPDATED : September 22, 2021, 12:59 IST
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महंत नरेंद्र गिरि का अंतिम संस्कार प्रयाग में हो रहा है. उन्हें उनके गुरु के बगल में भू-समाधि दी जाएगी. वह अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के तो अध्यक्ष थे ही साथ में निरंजनी अखाड़े के सचिव और प्रमुख की हैसियत रखने वाले भी. इस अखाड़े को सबसे धनी अखाड़ों में माना ही जाता है. साथ ही इसकी खासियत ये भी है कि इसमें खासे पढ़े लिखे साधु भी हैं. कुछ तो आईआईटी में पढ़े हुए हैं.

निरंजनी अखाड़े को हमेशा भारतीय धार्मिक क्षेत्र में परिपाटी स्थापित करने वाला माना गया. जब हरिद्वार कुंभ के दौरान कोविड का सबसे ज्यादा असर था. तब इस अखाड़े ने सबसे पहले इससे नाम वापस लेने की घोषणा करके राज्य सरकार को एक तरह से राहत दी. इसके बाद दूसरे अखाड़ों ने भी कुंभ से हटना शुरू किया।

इस अखाड़े का पूरा नाम श्री पंचायती तपोनिधि निरंजन अखाड़ा है. इसका मुख्य आश्रम मायापुर, हरिद्वार में स्थित है.अगर साधुओं की संख्या की बात की जाए तो निरंजनी अखाड़ा देश के सबसे बड़े और प्रमुख अखाड़ों में है. जूना अखाड़े के बाद उसे सबसे ताकतवर माना जाता है. वो देश के 13 प्रमुख अखाड़ों में एक है.

सबसे पढ़े लिखे साधू
इस अखाड़े में सबसे ज्यादा पढ़े-लिखे साधू हैं, जिसमें डॉक्टर, प्रोफेसर और प्रोफेशनल शामिल हैं. एक रिपोर्ट की मानें तो शैव परंपरा के निरंजनी अखाड़े के करीब 70 फीसदी साधु-संतों ने उच्च शिक्षा प्राप्त की है. इसमें संस्कृत के विद्वान और आचार्य भी हैं. निरंजनी अखाड़े की हमेशा एक अलग छवि रही है. जानते हैं निरंजनी अखाड़े के बारे में. जिसके बारे में कहा जाता है कि ये हजारों साल पुराना है.

हजारों साल पुराना इतिहास
निरंजनी अखाड़ा की स्थापना सन् 904 में विक्रम संवत 960 कार्तिक कृष्णपक्ष दिन सोमवार को गुजरात की मांडवी नाम की जगह पर हुई थी. महंत अजि गिरि, मौनी सरजूनाथ गिरि, पुरुषोत्तम गिरि, हरिशंकर गिरि, रणछोर भारती, जगजीवन भारती, अर्जुन भारती, जगन्नाथ पुरी, स्वभाव पुरी, कैलाश पुरी, खड्ग नारायण पुरी, स्वभाव पुरी ने मिलकर अखाड़ा की नींव रखी. अखाड़ा का मुख्यालय तीर्थराज प्रयाग में है. उज्जैन, हरिद्वार, त्रयंबकेश्वर व उदयपुर में अखाड़े के आश्रम हैं.

निरंजनी अखाड़े के पास कितनी संपत्ति
प्रयागराज और आसपास के इलाकों में निरंजनी अखाड़े के मठ, मंदिर और जमीन की कीमत 300 करोड़ से ज्यादा की है, जबकि हरिद्वार और दूसरे राज्यों में संपत्ति की कीमत जोड़े तो वो हजार करोड़ के पार है. महंत नरेंद्र गिरि इसी अखाड़े के प्रमुख थे. निरंजनी के अखाड़े के पास प्रयागराज, हरिद्वार, नासिक, उज्जैन, मिर्जापुर, माउंटआबू, जयपुर, वाराणसी, नोएडा, वड़ोदरा में मठ और आश्रम हैं.

10,000 से ज्यादा नागा संन्यासी
फिलहाल इस अखाड़े में दस हजार से अधिक नागा संन्यासी हैं. जबकि महामंडलेश्वरों की संख्या 33 है. जबकि महंत व श्रीमहंत की संख्या एक हजार से अधिक है. वैसे निरंजनी अखाड़े ने भव्य पेशवाई के साथ कुंभ में अपनी शुरुआत की थी. इसमें कई रथ, हाथी और ऊंट शामिल हुए थे. करीब 50 रथों पर चांदी के सिंहासन पर आचार्य महामंडलेश्वर और महामंडलेश्वर विराजमान थे. बड़ी संख्या में नागा साधुओं ने भगवान शिव का तांडव किया था.

कौन बन सकता है महामंडलेश्वर
अखाड़े का महामंडलेश्वर बनने के लिए कोई निश्चित शैक्षणिक योग्यता की जरूरत नहीं होती है. इन अखाड़ों में महामंडलेश्वर बनने के लिए व्यक्ति में वैराग्य और संन्यास का होना सबसे जरूरी माना जाता है. महामंडलेश्वर का घर-परिवार और पारिवारिक संबंध नहीं होने चाहिए.
हालांकि इसके लिए आयु का कोई बंधन नहीं है लेकिन यह जरूरी होता है कि जिस व्यक्ति को यह पद मिले उसे संस्कृत, वेद-पुराणों का ज्ञान हो और वह कथा-प्रवचन दे सकता हो. कोई व्यक्ति या तो बचपन में अथवा जीवन के चौथे चरण यानी वानप्रस्थाश्रम में महामंडलेश्वर बन सकता है. लेकिन इसके लिए अखाड़ों में परीक्षा ली जाती है

विवादों में भी घिर चुका है अखाड़ा
कुछ सालों पहले डिस्कोथेक और बार संचालक रियल इस्टेट कारोबारी सचिन दत्ता को इस अखाड़े का महामंडलेश्वर सच्चिदानंद गिरि बनाया गया था. जिसके बाद निरंजनी अखाड़ा विवादों में घिर गया था.

गंगा मैया से मेरी प्रार्थना है, उत्तराखंड में भी कोई दलित बने मुख्यमंत्री : हरीश रावत

उत्तराखंड में कांग्रेस के चुनाव प्रभारी हरीश रावत.

Uttarakhand Election 2022 : पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह को ​हटाकर चन्नी को सीएम बनाए जाने के फैसले को ऐतिहासिक बताकर उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने रैली में यह साफ कर दिया कि कांग्रेस उत्तराखंड में भी जाति की राजनीति करने जा रही है.

  • News18Hindi
  • LAST UPDATED : September 21, 2021, 10:19 IST
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हरिद्वार. कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने कहा कि वह उत्तराखंड में किसी दलित नेता को मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं. कांग्रेस के महासचिव और पंजाब में प्रभारी रहे रावत ने यह बयान सोमवार को तब दिया, जबकि पंजाब में कांग्रेस पार्टी ने एक दलित नेता चरणजीत सिंह चन्नी को नया मुख्यमंत्री घोषित किया. उत्तराखंड में कांग्रेस के चुनाव प्रभारी रावत ने कहा कि उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पद पर कोई दलित नेता पहुंच सके, इस मकसद के लिए कांग्रेस पार्टी पूरी शिद्दत से काम करेगी. पंजाब में पहला दलित सीएम बनने के बाद हरिद्वार ज़िले के लाकसर में एक आम सभा को संबोधित करते हुए रावत ने यह बात कही.

पंजाब में चन्नी को मुख्यमंत्री बनाए जाने के कांग्रेस के फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए रावत ने कहा कि पंजाब में ऐसा पहली बार हुआ जब कोई दलित सीएम बनाया गया. ‘कांग्रेस ने सिर्फ पंजाब ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तर भारत में इतिहास रच दिया, जब पार्टी ने उस बेटे को सीएम बनाया, जिसकी मां ज़िंदगी भर गोबर के कंडे बनाती रही. इस बेटे ने जब शपथ लेने के बाद अपने संघर्ष के बारे में बताया तो सबकी आंखें नम थीं.’

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रावत ने इस तरह जताई अपनी हसरत
उत्तराखंड में 2022 की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं, जिसके लिए राज्य में भाजपा और आम आदमी पार्टी के साथ ही कांग्रेस ​चुनावी बिगुल फूंक चुकी है. पीटीआई की खबर की मानें तो  एक चुनावी सभा में हरीश रावत ने पंजाब में सीएम बनने की घटना पर कुछ इस तरह अपनी बात कही, ‘मैं ईश्वर से और गंगा मैया से प्रार्थना करता हूं कि अपने जीवन में उत्तराखंड में किसी दलित को राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में देख सकूं. हम इस लक्ष्य के लिए प्रतिबद्ध रहेंगे.’

Mahant Narendra Giri Suicide: ‌आद्या तिवारी भी हिरासत में, कभी भी गिरफ्तार हो सकता है आनंद गिरी

आनंद गिरी की गिरफ्तारी के लिए यूपी पुलिस उत्तराखंड पहुंच गई है.

Death of Mehant Narendra Giri: उत्तर प्रदेश पुलिस पहुंची आनंद गिरी के आश्रम, कमरे में खुद को बंद कर बैठा है आनंद गिरी, वहीं लेटे हनुमान मंदिर के पुजारी आद्या तिवारी को पुलिस ने हिरासत में लिया.

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प्रयागराज. अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरी के लिखे सुसाइड नोट में आत्महत्या के लिए जिम्मेदार ठहराए गए आरोपियों में से एक आद्या तिवारी को भी पुलिस ने हिरासत में ले लिया है. उत्तर प्रदेश पुलिस ने आद्या तिवारी को प्रयागराज से ही गिरफ्तार किया है. आद्या तिवारी बड़े हनुमान मंदिर के पुजारी हैं. वहीं यूपी पुलिस की एक टीम हरिद्वार स्थित आनंद गिरी के आश्रम पहुंच गई है और बताया जा रहा है कि आनंद की कभी भी गिरफ्तारी की जा सकती है. बताया जा रहा है कि आनंद तिवारी ने आश्रम में खुद को एक कमरे में बंद कर लिया है और वे लगातार किसी से संपर्क में है.
वहीं तीसरे आरोपी और पुजारी आद्या तिवारी के बेटे संदीप तिवारी को अभी हिरासत में नहीं लिया गया है. गौरतलब है कि महंत नरेंद्र गिरी ने सोमवार को आत्महत्या कर ली थी और उनके पास से मिले सुसाइड नोट में उन्होंने आनंद गिरी, आद्या तिवारी और संदीप तिवारी पर मानसिक तौर से प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था.

वहीं आनंद गिरी का दावा है कि गुरुजी आत्महत्या कर ही नहीं सकते. वहीं रही बात सुसाइड नोट की तो उन्होंने कहा कि महंत नरेंद्र गिरी को लिखना पढ़ना ही नहीं आता था ऐसे में वे 8 पन्नों का सुसाइड नोट कैसे लिख सकते हैं. उन्होंने कहा कि इस मामले की पूरी जांच की जानी चाहिए.
आनंद गिरी ने कहा कि वो इस मामले में किसी भी तरह की जांच के लिए तैयार हैं और उन्हें फंसाने की कोशिश की जा रही है. आनंद गिरी ने कहा कि लोग हमें रास्‍ते से हटाना चाहते थे और कुछ लोग लगातार गुरुजी को परेशान भी कर रहे थे. गौरतलब है कि आनंद गिरी का सुसाइड नोट में नाम आने के बाद उत्तराखंड पुलिस ने हरिद्वार से हिरासत में ले लिया है और उनसे पूछताछ की जा रही है.

Mahant Narendra Giri Suicide: ‌आनंद गिरी का दावा- लिखना-पढ़ना नहीं जानते थे गुरुजी, तो कैसे लिखा सुसाइड नोट

नरेंद्र गिरी के शिष्य आनंद गिरी ने कहा है कि वे हर तरह की जांच में सहयोग करेंगे. (फाइल फोटो)

Death of Mehant Narendra Giri: महंत नरेंद्र गिरी की मौत के बाद मिले सुसाइड नोट को लेकर शिष्य आनंद गिरी ने कहा कि जब नरेंद्र गिरी को लिखना पढ़ना नहीं आता था तो वे कैसे इतना लंबा सुसाइड नोट लिख सकते हैं.

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हरिद्वार. अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरी की मौत के बाद सवालों के घेरे में आए उनके शिष्य आनंद गिरी ने अब बड़ा दावा किया है. महंत नरेंद्र गिरी की मौत के बाद मिले सुसाइड नोट और उसमें आनंद गिरी की ओर से मानसिक तौर पर प्रताड़ित की जाने की बात का खुलासा होने के बाद आनंद गिरी ने कहा कि गुरुजी आत्महत्या कर ही नहीं सकते. वहीं रही बात सुसाइड नोट की तो उन्होंने कहा कि महंत नरेंद्र गिरी को लिखना पढ़ना ही नहीं आता था ऐसे में वे 8 पन्नों का सुसाइड नोट कैसे लिख सकते हैं. उन्होंने कहा कि इस मामले की पूरी जांच की जानी चाहिए.
आनंद गिरी ने कहा कि वो इस मामले में किसी भी तरह की जांच के लिए तैयार हैं और उन्हें फंसाने की कोशिश की जा रही है. आनंद गिरी ने कहा कि लोग हमें रास्‍ते से हटाना चाहते थे और कुछ लोग लगातार गुरुजी को परेशान भी कर रहे थे. गौरतलब है कि आनंद गिरी का सुसाइड नोट में नाम आने के बाद उत्तराखंड पुलिस ने हरिद्वार से हिरासत में ले लिया है और उनसे पूछताछ की जा रही है.

आनंद गिरी ने कहा है कि गुरुजी कभी आत्महत्या नहीं कर सकते, उनकी हत्या हुई है. उन्होंने कुछ अधिकारियों पर ही गंभीर आरोप लगाकर साजिश करने की बात कही है. आनंद गिरी ने कहा कि आईजी स्वयं इसमें संदिग्ध हैं. आईजी लगातार नरेन्द्र गिरी के संपर्क में रहते थे.

आनंद गिरी का आरोप है कि मठ और मंदिर का पैसा हड़पने वालों ने महंत जी की हत्या की. इस साजिश में मठ के कई बड़े नाम शामिल हो सकते हैं. करोड़ों का खेल हैं. इसमें एक सिपाही अजय सिंह भी है. यही लोग उनकी हत्या कर सकते हैं. आनंद गिरी का आरोप है कि इस घटना में पुलिस के अधिकारी भी शामिल हो सकते हैं.

आनंद गिरी का आरोप है कि महंत नरेंद्र गिरी को मारकर मुझे फंसाने की साजिश है. इसमें पुलिस के बड़े अधिकारी ही शामिल हैं. मैं जांच की मांग करता हूं. उनके खिलाफ बहुत बड़ी साजिश की गई है. उन्होंने आरोप लगाया कि मनीष शुक्ला जिनकी उन्होंने शादी महंत नरेंद्र गिरी ने कराई थी. उसे पांच करोड़ का मकान दिया. इसके आलावा अभिषेक मिश्र भी इस मामले में शामिल हो सकते हैं, जिनकी जांच होनी चाहिए.

Mahant Narendra Giri Death: महंत नरेंद्र गिरी के शिष्य आनंद गिरी को हरिद्वार में हिरासत में लिया

आनंद गिरी को हरिद्वार पुलिस ने हिरासत में ले लिया है और उनसे पूछताछ की जा रही है. (फाइल फोटो)

Death of Mehant Narendra Giri: महंत नरेंद्र गिरी ने अपने सुसाइड नोट में आनंद गिरी पर लगाया था मानसिक तौर पर प्रताड़ित करने का आरोप, अब हरिद्वार पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया है और पूछताछ की जा रही है.

  • News18Hindi
  • LAST UPDATED : September 20, 2021, 20:56 IST
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प्रयागराज. अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी के आत्महत्या के मामले में नया मोड़ आ गया है. उत्तराखंड पुलिस ने महंत नरेंद्र गिरी के शिष्य आनंद गिरी को हिरासत में ले लिया है और उनसे पूछताछ की जा रही है. उल्लेखनीय है कि नरेंद्र गिरी ने अपने सुसाइड नोट में आनंद गिरी की ओर से मानसिक तौर पर प्रताड़ित करने का अरोप लगाया था. आनंद गिरी को हिरासत में लेने की जानकारी एडीजी लॉ एंड ऑर्डर उत्तर प्रदेश प्रशांत कुमार ने दी है.
गौरतलब है कि उन्होंने अपने सुसाइड नोट में लिखा कि मैं अपने पुराने रिश्तों से परेशान हूं. साथ ही उन्होंने लिखा कि उनको मानसिक तौर से आनंद गिरी परेशान कर रहा था. साथ ही उन्होंने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि मैं अपने रिश्तों से परेशान हो गया हूं. इसके अलावा उन्होंने लिखा कि मैं अपनी जिंदगी शान से जिया और अब शान से मरना भी चाहता हूं.

इससे पहले आनंद गिरी ने बताया था कि अभी मैं हरिद्वार में हूं, कल प्रयागराज पहुंचकर देखूंगा क्या सच है. आनंद गिरी बोले, ‘हमें अलग इसलिए किया गया ताकि एक का काम तमाम हो सके. नरेंद्र गिरी से विवादों पर आनंद गिरी ने कहा, ‘मेरा उनसे नहीं मठ की जमीन को लेकर विवाद था.’ आनंद गिरी ने कहा, ‘शक के दायरे में कई लोग हैं, उन्होंने ही नरेंद्र गिरी को मेरे खिलाफ किया.’

आनंद गिरी ने कहा- ‘अभी मैं हरिद्वार में हूं, कल प्रयागराज पहुंचकर देखूंगा क्या सच है.’ आनंद गिरी ने कहा ‘हमें अलग इसलिए किया गया ताकि एक का काम तमाम हो सके. नरेंद्र गिरी से विवादों पर आनंद गिरी ने कहा कि ‘मेरा उनसे नहीं मठ की जमीन को लेकर विवाद था.’ आनंद गिरी ने कहा- ‘शक के दायरे में कई लोग हैं, उन्होंने ही नरेंद्र गिरी को मेरे खिलाफ किया.’ इसके साथ ही आनंद ​गिरी ने उनकी मौत पर कुछ बड़े लोगों और एक पुलिस के अधिकारी की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं.

संत आनंद गिरी पर दो अलग-अलग मौकों पर दो महिलाओं के साथ मारपीट का आरोप लगा था. आरोप के मुताबिक उन्हें दो अवसरों पर हिंदू प्रार्थना के लिए अपने घरों में आमंत्रित किया गया था. जहां 2016 में उन्होंने अपने घर के बेडरूम में एक 29 वर्षीय महिला के साथ कथित तौर पर मारपीट की. इसके बाद 2018 में, गिरि ने लाउंज रूम में 34 वर्षीय एक महिला के साथ कथित तौर पर मारपीट की.

प्रधानमंत्री के 'जबरा' फैन, मुफ्त मेहंदी लगाकर मनाते हैं PM नरेंद्र मोदी का जन्मदिन

अंकुर 2015 से PM मोदी के जन्मदिन पर मुफ्त मेहंदी लगा रहे हैं.

ऋषिकेश के अंकुर प्रजापति साल 2015 से PM नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर मुफ्त मेहंदी लगाते आ रहे हैं.

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आपने फिल्मी सितारों के कई प्रशंसक देखे होंगे लेकिन भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi Birthday) की फैन फॉलोइंग भी कुछ कम नहीं है. 17 सितंबर को पीएम मोदी का जन्मदिन देशभर में मनाया जाता है. इस दिन पूरे देश में बीजेपी कार्यकर्ता अपने-अपने तरीके से उनका जन्मदिन मनाते हैं लेकिन ऋषिकेश में एक शख्स ऐसा भी है, जो बीजेपी का कार्यकर्ता नहीं, बल्कि नरेंद्र मोदी का प्रशंसक है और वह इस दिन मुफ्त में मेहंदी लगाकर PM का जन्मदिन मनाता है.

ऋषिकेश में अंकुर मेहंदी वाला के नाम से मशहूर अंकुर प्रजापति साल 2015 से प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन पर युवतियों और महिलाओं की फ्री मेहंदी लगाते आ रहे हैं. वह कहते हैं कि उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का व्यक्तित्व और उनके काम इतने पसंद आए कि उन्होंने उनके जन्मदिन पर फ्री में मेहंदी लगाने की शुरुआत की.

अपने पेज और सोशल मीडिया के माध्यम से अंकुर इस दिन लोगों को फ्री मेहंदी की जानकारी देते हैं. यही वजह है कि कोई तीज त्योहार न होने के बावजूद भी बड़ी संख्या में महिलाएं यहां मेहंदी लगाने पहुंचती हैं.

अंकुर ने कहा कि नरेंद्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री रहें या न रहें लेकिन वह उनके जन्मदिन पर मुफ्त में मेहंदी लगाना हमेशा जारी रखेंगे.

यहां सतयुग से रह रहे भगवान विष्णु, जानिए कैसे पड़ा इस शहर का नाम ऋषिकेश?

श्री भरत मंदिर में हृषिकेश नारायण की मूर्ति.

श्री भरत मंदिर में रैभ्य ऋषि और सोम ऋषि ने भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए तपस्या की थी.

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उत्तराखंड की तीर्थ और योगनगरी ऋषिकेश सतयुग से ही ऋषि-मुनियों की तपोस्थली रही है. यहां स्थित प्राचीन श्री भरत मंदिर (Shri Bharat Temple Rishikesh) में रैभ्य ऋषि और सोम ऋषि ने भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए तपस्या की थी. भगवान नारायण ने उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें दर्शन दिए थे.

विष्णु भगवान का एक नाम हृषिकेश भी है, जिसकी वजह से इस स्थान को हृषिकेश के नाम से जाना जाने लगा, हालांकि अपभ्रंश के चलते हृषिकेश की जगह ऋषिकेश कहा जाने लगा.

आठवीं सदी में शंकराचार्य ने शालिग्राम से बने भगवान नारायण की मूर्ति को मंदिर में पुनर्स्थापित किया था. साथ ही एक श्री यंत्र भी लगाया था. श्री भरत मंदिर के गर्भ गृह में भगवान नारायण की प्रतिमा के ठीक ऊपर गुंबद पर आपको यह श्री यंत्र दिख जाएगा.

श्री भरत मंदिर के परिक्रमा मार्ग में एक शिवलिंग भी स्थापित है, इसे पातालेश्वर महादेव नाम से जाना जाता है. ऋषिकेश के पांच महत्वपूर्ण शिव मंदिरों में इस मंदिर को भी गिना जाता है.

भरत मंदिर के पीछे वाले भाग में मां भगवती का मंदिर है, जो माहेश्वरी के नाम से विख्यात है. कहा जाता है कि दशरथ पुत्र भरत जब यहां नारायण की पूजा के लिए आए थे तो उन्होंने राम द्वारा रावण पर विजय से पहले भगवती माहेश्वरी के मंदिर की स्थापना की थी.

स्कंद पुराण के केदारखंड के अनुसार, इस मंदिर को सतयुग में वराह, त्रेता में परशुराम, द्वापर में वामन और कलयुग में भरत नाम से जाना गया.

काली मां का चमत्कारी मंदिर, जहां से गुजरते हुए ट्रेन भी देती है 'सलामी'

काली मां का मंदिर पहाड़ी पर स्थित है.

एक ओर श्रद्धालु मंदिर में माता के दर्शन कर रहे होते हैं, वहीं दूसरी ओर मंदिर के नीचे से ट्रेनें निकलती रहती हैं.

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हरिद्वार में मां काली का एक प्राचीन मंदिर है. यह मंदिर हर की पौड़ी के पास स्थित है. जानकारों का मानना है कि यह मंदिर महाभारत काल से यहां मौजूद है. मंदिर एक ऊंचे पहाड़ की गुफा में स्थित है और इसके नीचे से हरिद्वार और देहरादून की रेलवे लाइन गुजरती है. जहां एक ओर श्रद्धालु माता के दर्शन कर रहे होते हैं, वहीं दूसरी ओर मंदिर के नीचे से ट्रेनें निकलती रहती हैं.

लोगों का मानना है कि इस मंदिर में जो भी सच्चे मन से अपनी मुराद लेकर आता है, माता उसकी सभी मुरादें पूरी करती हैं. जानकारों के अनुसार, यह रेलवे लाइन ब्रिटिश काल में बनी थी. जिसके कुछ साल बाद ट्रेनों का संचालन शुरू हुआ.

हरिद्वार से ऋषिकेश जाने वाली ट्रेन या फिर ऋषिकेश और देहरादून से हरिद्वार जाने वाली ट्रेन यहां आकर रुक जाती थीं. माता के मंदिर के आगे ट्रेन नहीं बढ़ पाती थीं. एक दिन काली मां ने रेलवे विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी को सपने में दर्शन देकर बताया कि वहां पर उनका स्थान है.

काली मां ने आगे कहा कि यहां पर उनके भक्तों के आने-जाने के लिए मार्ग का निर्माण किया जाए, जिससे उनके भक्त मंदिर तक पहुंच सकें. जिसके बाद रेल लाइन के ऊपर से पुल का निर्माण किया गया. पुल बनने के बाद अचानक सब ठीक हो गया और ट्रेन आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान तक मंदिर से होकर जाने लगीं.

आज भी यहां से जब ट्रेन निकलती हैं, तो लोको पायलट एक बार हॉर्न बजाकर माता के दरबार में हाजिरी जरूर लगाते हैं.

सैलानियों की पहली पसंद बना नीरगढ़ वॉटरफॉल, जानिए कैसे पहुंचे ऋषिकेश के सबसे बड़े झरने तक?

नीर वॉटरफॉल ऋषिकेश का सबसे बड़ा झरना है.

नीर वॉटरफॉल ऋषिकेश का सबसे बड़ा झरना है. इसे नीरगढ़ वॉटरफॉल भी कहा जाता है.

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उत्तराखंड में कोविड कर्फ्यू में ढील के बाद से तमाम पर्यटन स्थल फिर से पर्यटकों से गुलजार होने लगे हैं. बीती एक जुलाई से ऋषिकेश का नीर वॉटरफॉल भी पर्यटकों की आवाजाही के खोल दिया गया था. नीर वॉटरफॉल ऋषिकेश का सबसे बड़ा झरना है. इसे नीरगढ़ वॉटरफॉल भी कहा जाता है. यहां हर रोज बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और पर्यटक प्राकृतिक सुंदरता का लुत्फ उठाने आ रहे हैं.

बद्रीनाथ हाईवे से दो किलोमीटर ऊपर यह नीर झरना स्थित है. यहां जाने के लिए मोटर मार्ग बना हुआ है. यह झरना ऋषिकेश के सबसे बड़े झरने के रूप में जाना जाता है. यहां पहुंचते ही आपको आनंद की अनुभूति होती है. यह झरना तीन से चार सतहों से होकर आता है.

हर सतह पर पर्यटक झरने के नीचे नहाकर लुत्फ ले सकते हैं. रोज सैकड़ों की संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं. इसके साथ ही यहां पर पर्यटकों की सुविधा के लिए 15 से 20 दुकानें भी मौजूद हैं.

जंगलों के बीच स्थित यह झरना जहां प्राकृतिक सौंदर्य के लिहाज से पर्यटकों को आकर्षित करता है, वहीं इस झरने का ठंडा पानी और नहाने के लिए पर्याप्त स्थान होने के कारण यह नीर वॉटरफॉल कई लोगों के लिए पहली पसंद बना हुआ है. प्री-वेडिंग शूट के लिए भी यहां दूर-दूर से कपल पहुंच रहे हैं.

भरत मंदिर में ऋषिकेश का इकलौता संग्रहालय, यहां मौजूद हैं तीसरी सदी की हैरतअंगेज निशानियां

भरत मंदिर संग्रहालय में रखीं मूर्तियां और अवशेष.

ऋषिकेश के प्राचीन श्री भरत मंदिर में शहर का एकमात्र संग्रहालय बनाया गया है.

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खुदाई के दौरान निकले अवशेषों या मूर्तियों को एकत्रित कर संग्रहालय में रखा जाता है. साथ ही यह कितना पुराना है, इसकी भी जांच पुरातत्व विभाग करता है. ऐसे अवशेष हमारी प्राचीन संस्कृति और सभ्यता का परिचय हमसे करवाते हैं. ऋषिकेश के प्राचीन श्री भरत मंदिर में शहर का एकमात्र संग्रहालय बनाया गया है.

इस संग्रहालय में रखीं हुईं कई मूर्तियां, ईंट व अन्य वस्तुएं खुदाई के दौरान पाई गई थीं, जिन्हें उत्तर प्रदेश पुरातत्व विभाग द्वारा जांच कर पंजीकृत किया गया है. इस संग्रहालय में तीसरी सदी तक के अवशेष देखने को मिलते हैं.

यहां पर भगवान विष्णु और भोलेनाथ की प्रतिमा, मानवों की मूर्ति, प्राचीन काल की तमाम वस्तुएं आदि देखने को मिल जाती हैं.

भरत मंदिर संस्कृत महाविद्यालय के प्रधानाचार्य सुरेंद्र दत्त भट्ट बताते हैं कि ऐसी जानकारी मिलती है कि बौद्धों द्वारा इस मंदिर पर आक्रमण किया गया था, जिसमें यह मूर्तियां दब गई थीं, जो अब समय-समय पर खुदाई में मिलती रहती हैं.

UKPSC Recruitment 2021: असिस्टेंट प्रॉसीक्यूशन ऑफिसर के पदों पर आवेदन का कल है आखिरी मौका, ऐसे करें अप्लाई

UKPSC Recruitment 2021: असिस्टेंट प्रॉसीक्यूशन ऑफिसर के पदों पर आवेदन 17 सितंबर तक किए जा सकते हैं,

UKPSC APO Recruitment 2021: असिस्टेंट प्रॉसीक्यूशन ऑफिसर के पदों पर आवेदन प्रक्रिया 3 अगस्त 2021 को शुरू हुई थी. कुल 63 पदों पर भर्तियां के लिए 31 सीटें जनरल कैटेगरी के लिए, 6 सीटें ईडब्ल्यूएस कैटेगरी के लिए, 12 सीटें ओबीसी कैटेगरी के लिए, 13 सीटें एससी कैटेगरी के लिए और 1 सीट एसटी कैटेगरी के लिए आरक्षित है.

  • News18Hindi
  • LAST UPDATED : September 16, 2021, 16:25 IST
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नई दिल्ली. UKPSC APO Recruitment 2021: एलएलबी की डिग्री हासिल कर चुके और नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के पास उत्तराखंड में असिस्टेंट प्रॉसीक्यूशन ऑफिसर (APO) बनने का सुनहरा मौका है. बता दें कि उत्तराखंड पब्लिक सर्विस कमीशन की ओर से जारी असिस्टेंट प्रॉसीक्यूशन ऑफिसर के पद पर कुल 63 भर्तियां की जानी है. इसके लिए इच्छुक और योग्य अभ्यर्थी कल यानी 17 सितंबर तक आवेदन कर सकते हैं. ऐसे में जिन अभ्यर्थियों ने अभी तक आवेदन नहीं किया है वो यूकेपीएससी की आधिकारिक वेबसाइट ukpsc.gov.in पर विजिट करके ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं.

बता दें कि असिस्टेंट प्रॉसीक्यूशन ऑफिसर के पदों पर आवेदन प्रक्रिया 3 अगस्त 2021 को शुरू हुई थी. कुल 63 पदों पर भर्तियां के लिए 31 सीटें जनरल कैटेगरी के लिए, 6 सीटें ईडब्ल्यूएस कैटेगरी के लिए, 12 सीटें ओबीसी कैटेगरी के लिए, 13 सीटें एससी कैटेगरी के लिए और 1 सीट एसटी कैटेगरी के लिए आरक्षित है. अधिक जानकारी के लिए अभ्यर्थी ऑफिशियल नोटिफिकेशन भी देख सकते हैं.

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UKPSC Recruitment 2021: ऐसे करें ऑनलाइन अप्लाई

  • सबसे पहले यूकेपीएससी की ऑफिशियल वेबसाइट ukpsc.gov.in पर विजिट करें.
  • वेबसाइट के होम पेज पर दिए Recruitment पर क्लिक करें.
  • अब यहां UKPSC Assistant Prosecution Officer APO 2021 के लिंक पर क्लिक करें.
  • एक नया पेज खुलेगा यहां रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया की डिटेल्ट भरें.
  • रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया के बाद एप्लीकेशन फॉर्म भरें.
  • सबसे लास्ट में प्रिंटआउट जरूर ले लें.

UKPSC Recruitment 2021: योग्यता और आयु सीमा
इन पदों पर आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों के पास एलएलबी पास की डिग्री अनिवार्य रूप से होनी चाहिए. इसके अलावा आवेदन के लिए अभ्यर्थी की उम्र 21 साल से 42 साल के बीच होनी चाहिए. बता दें कि इन पदों के लिए परीक्षा का आयोजन और एडमिट कार्ड जारी होने की तारीख अभी घोषित नहीं हुई है. ऐसे में अभ्यर्थी नियमित अपडेट के लिए आयोग की वेबसाइट पर नजर बना कर रखें.

ऋषिकेश : साल में सिर्फ 1 दिन होते हैं राधा रानी के चरणों के दर्शन

मधुबन आश्रम में राधा अष्टमी धूमधाम से मनाई गई.

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के ठीक 15 दिन बाद राधा अष्टमी मनाई जाती है.

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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के ठीक 15 दिन बाद राधा अष्टमी मनाई जाती है. ऋषिकेश के मधुबन आश्रम स्थित मंदिर में इस दिन पूरे साल में एक बार राधा रानी के चरणों के दर्शन भक्तों को करवाए जाते हैं. साथ ही इस दिन बड़ी संख्या में भक्त मंदिर में इकट्ठा होकर भजन-कीर्तन करते हैं.

राधा अष्टमी को राधा के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है. मुनि की रेती स्थित मधुबन आश्रम में राधा रानी का जन्मदिन बड़े धूमधाम से मनाया गया.

इस मौके पर भगवान कृष्ण और राधा रानी का दूध, दही और जल से अभिषेक हुआ. इसके अलावा भक्तों को साल में एक दिन होने वाले राधाचरणों के दर्शन भी करवाए गए. वहीं कृष्ण भक्तों ने हरे राम, हरे कृष्ण का जप करते हुए भजन-कीर्तन कर समां बांध दिया.

कोरोना की तीसरी लहर की ये कैसी तैयारी? सरकारी अस्पताल में 'शोपीस' बने 21 वेंटिलेटर

ऋषिकेश के सरकारी अस्पताल को 21 वेंटिलेटर दिए गए हैं.

वेंटिलेटर के संचालन के लिए एनेस्थेटिक, टेक्नीशियन और नर्सिंग स्टाफ की जरूरत होती है.

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कोरोना महामारी की तीसरी लहर से निपटने के लिए कई राज्य तैयारियों में जुटे हुए हैं. अस्पतालों में वेंटिलेटर की व्यवस्था की जा रही है. ऋषिकेश के सरकारी अस्पताल में भी कोविड के गंभीर मरीजों के इलाज के लिए 21 वेंटिलेटर लगाए गए हैं लेकिन अभी तक वेंटिलेटर के संचालन के लिए अस्पताल को प्रशिक्षित स्टाफ नहीं दिया गया है, जिसके चलते सभी वेंटिलेटर शोपीस बने हुए हैं.

वेंटिलेटर के संचालन के लिए एनेस्थेटिक, टेक्नीशियन और नर्सिंग स्टाफ की जरूरत होती है लेकिन अस्पताल के पास एक भी एनेस्थेटिक और टेक्नीशियन नहीं है. ऐसे में तीसरी लहर के आने पर जहां कोविड के गंभीर मरीजों को दर-दर भटकना पड़ेगा, वहीं स्वास्थ्य विभाग द्वारा मिले यह वेंटिलेटर भी बेकार साबित होंगे.

अस्पताल के सीएमएस डॉक्टर विजयेश भारद्वाज ने बताया कि वह कई बार शासन से पत्र लिखकर स्टाफ की मांग कर चुके हैं. उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही स्टाफ की नियुक्तियां कर दी जाएंगी.

दिव्यांगों की मदद कर रहीं अंतरराष्ट्रीय पैरा खिलाड़ी नीरजा गोयल, बोलीं- बेहतर संसाधन मिलें तो...

अपने मेडल्स के साथ अंतरराष्ट्रीय पैरा खिलाड़ी नीरजा गोयल.

नीरजा गोयल बैडमिंटन में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पैरा खेलों की कई प्रतियोगिताओं में भाग ले चुकी हैं.

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पैरा ओलंपिक में इस बार भारतीय दिव्यांग खिलाड़ियों ने देश का लोहा मनवाया. खिलाड़ियों ने पैरालंपिक में 19 पदक अपने नाम किए, जिससे साफ जाहिर होता है कि अगर दिव्यांग खिलाड़ियों को संसाधन उपलब्ध कराए जाएं तो वह भी बाकी खेलों की तरह पैरा खेलों में देश का नाम रोशन कर सकते हैं. ऋषिकेश की दिव्यांग पैरा खिलाड़ी नीरजा गोयल ने अन्य दिव्यांगों की मदद का बीड़ा उठाया है.

नीरजा गोयल बैडमिंटन में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पैरा खेलों की कई प्रतियोगिताओं में भाग ले चुकी हैं. साथ ही कई पुरस्कार और पदक भी अपने नाम कर चुकी हैं. उन्होंने कहा कि वह पिछले कई साल से ऋषिकेश में पैरा खिलाड़ियों के लिए एक जगह की मांग की जा रही है, जहां दिव्यांग खिलाड़ी खेलों की तैयारी कर सकें.

जिसके बाद खिलाड़ी पैरा ओलंपिक के लिए भी तैयार हो सकें. उन्होंने आगे कहा कि इसके लिए वह मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, खेल मंत्रालय और नगर निगम से भी गुहार लगा चुकी हैं लेकिन अब तक किसी ने भी दिव्यांग खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए कोई मदद नहीं की है.

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