Haridwar Kumbh: मिलिए 18 इंच हाइट वाले दुनिया के सबसे छोटे नागा साधु से! वजन सिर्फ 18 किलो

नारायण नंद गिरी का जीवन कठिनाइयों से भरा है.

नारायण नंद गिरी का जीवन कठिनाइयों से भरा है.

नारायणनंद जूना अखाड़े के नागा संन्यासी हैं. इनकी हाइट महज़ 18 इंच है. वजन भी सिर्फ 18 किलो है. भगवान शिव की आराधना में लीन रहते हैं. हरिद्वार के श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा के पास बिरला घाट पुल के किनारे नारायण नंद ने अपना डेरा जमाया हुआ है.

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पुलकित शुक्ला.

हरिद्वार. महाकुंभ मेले के दौरान बड़ी संख्या में साधु-संत आस्था के इस संगम में हरिद्वार में डेरा जमाए हुए हैं. कोई अपनी अनूठी साधना तो कोई अनोखी कद काठी के कारण लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहा है. ऐसे ही एक खास नागा बाबा है नारायण नंद स्वामी. नारायण नंद जूना अखाड़े के नागा सन्यासी हैं. इस नागा सन्यासी की हाइट महज़ 18 इंच है और वजन भी सिर्फ 18 किलो ही है. बाबा नारायण नंद ठीक से सुन भी नहीं पाते हैं बावजूद इसके वह भगवान शिव की आराधना में लीन रहते हैं. हरिद्वार के श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा के पास बिरला घाट पुल के किनारे नारायण नंद ने अपना डेरा जमाया हुआ है. जो कोई भी इस राह से गुजरता है, वह नारायण नंद गिरी महाराज के दर्शन करने के लिए जरूर रुकता है.

55 वर्षीय नारायण नंद गिरी बताते हैं कि वह मध्य प्रदेश के झांसी के रहने वाले हैं. 2010 के हरिद्वार महाकुंभ में वे जूना अखाड़े में शामिल हुए और नागा सन्यासी की दीक्षा भी ली. उससे पहले उनका नाम सत्यनारायण पाठक था लेकिन सन्यास की दीक्षा लेने के बाद इनका नाम नारायण नंद गिरी महाराज हो गया.

कठनाईयों से भरा जीवन
नारायण नंद गिरी का जीवन कठिनाइयों से भरा है. वह बताते हैं कि जब तक उनके माता-पिता जीवित थे, तब तक वह किसी के आश्रित नहीं थे. माता-पिता के होते हुए वे घर से बाहर तक नहीं निकले. उनके खाने-पीने, उठाने-बैठाने से लेकर सभी काम उनके माता-पिता ही करते थे लेकिन मां-बाप के गुजर जाने के बाद उनकी परेशानी बढ़ गई. फिर उन्होंने संन्यास की तरफ कदम बढ़ाया और जूना अखाड़े के संन्यासी बन गए.

साथ रहता है एक शिष्य

बाबा नारायण नंद के साथ हमेशा उनका एक शिष्य उमेश रहता है. एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने से लेकर उठाने बैठाने तक सभी काम शिष्य उमेश कुमार ही करता हैं. उमेश कुमार का कहना है कि नारायण नंद गिरी महाराज 2010 के कुंभ में भी हरिद्वार आए थे. इससे पहले वह प्रयागराज के कुम्भ में भी भाग ले चुके हैं. जहां कहीं भी वो जाते हैं, लोगों के आकर्षण का केंद्र बन जाते हैं. नारायण नंद गिरी महाराज हर समय ईश्वर की भक्ति में लीन लेते हैं. पूजा-पाठ करते हैं.
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