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  • महंत नरेंद्र गिरि मौत मामले में अहम मोड़, अब CBI के रडार पर हरिद्वार के प्रॉपर्टी डीलर

महंत नरेंद्र गिरि मौत मामले में अहम मोड़, अब CBI के रडार पर हरिद्वार के प्रॉपर्टी डीलर

अखाड़ा परिषद के प्रमुख थे महंत नरेंद्र गिरि.

अखाड़ा परिषद के प्रमुख थे महंत नरेंद्र गिरि.

Mahant Narendra Giri Death : प्रयागराज में हुई नरेंद्र गिरि की संदिग्ध मौत की जांच में सीबीआई प्रॉपर्टी के एंगल से भी जांच में जुटी हुई है. उत्तराखंड तक पहुंच गई इस जांच के साथ ही ये भी जानिए कि कैसे हरिद्वार में प्रॉपर्टी की जंग पहले भी संतों की जान तक पहुंची है.

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    पु​लकित शुक्ला
    हरिद्वार. अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की संदिग्ध मौत की गुत्थी उलझती जा रही है. गिरि के शिष्य आनंद गिरि को हरिद्वार से गिरफ्तार किए जाने के बाद उन्होंने अखाड़ों की ज़मीन और प्रॉपर्टी के विवाद के संबंध में बातचीत कही थी और अब जांच एजेंसी को नरेंद्र गिरि के कॉल रिकॉर्ड से हरिद्वार के कुछ रियल एस्टेट कारोबारियों से कई बार बात होने का पता चला है. पूरे मामले में जांच एजेंसी अब प्रॉपर्टी के एंगल से भी जांच कर रही है. यही कारण है कि जांच एजेंसी की रडार पर अब हरिद्वार के कुछ रियल एस्टेट कारोबारी भी आ गए हैं.

    अखाड़ों के पास हैं बेशुमार संपत्तियां
    हरिद्वार में कई अखाड़ों के मुख्यालय हैं. यहां अखाड़ों, आश्रमों और मठों के पास अकूत सम्पदाएं हैं. कुछ अखाड़ों के पास तो शहर के लगभग हर हिस्से में ज़मीनें हैं. हरिद्वार में अखाड़ों के महंतों और रियल स्टेट कारोबारियों के बीच में सांठगांठ काफी पुरानी रही है. यही कारण है कि धर्म, परमार्थ और जनहित के उद्देश्य से अर्जित की गई संपत्तियां अब अपार्टमेंट्स, शॉपिंग कॉंप्लेक्स और मॉल में तब्दील हो रही हैं.

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    हरिद्वार स्थित कई अखाड़ों की संपत्तियों को लेकर विवादों की चर्चा आम है.

    साल दर साल यहां ऐसे अपार्टमेंट और सोसाइटी की संख्या बढ़ रही है, जो अवैध ढंग से अखाड़ों की ज़मीनों पर खड़े हैं. दूसरी तरफ, ये भी दबे शब्दों में कहा जा रहा है कि राजस्व चोरी और नियमों को दरकिनार कर इमारतें खड़े करने का यह खेल शासन प्रशासन की नाक के नीचे हो रहा है.

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    कई संतों की हो चुकी हैं हत्याएं
    धर्म नगरी में धार्मिक संपत्तियों की खरीद-फरोख्त न सिर्फ विवादित बल्कि रक्त रंजित रही है. राज्य गठन के बाद से अब तक हरिद्वार के दर्जनों संतो की हत्या और संदिग्ध मौत हो चुकी है. ऐसी मौतों के पीछे संपत्तियों की खरीद-फरोख्त का विवाद बताया जाता है. अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता बाबा हठयोगी बताते हैं ‘अखाड़ा की ज़मीनों की खरीद-फरोख्त से कई बार अखाड़ों के पदाधिकारियों में भी आपसी तनातनी बढ़ जाती है इसलिए अब तक दर्जनों संतो की मौत संदिग्ध रही है.’

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