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हरिद्वार रेलवे स्टेशन पर सख्ती, जीआरपी ने 400 कावड़ियों को बैरंग लौटाया

ट्रेनों से हरिद्वार आ रहे कांवड़ियों को बसों से पुलिस वापस भेज रही है.

ट्रेनों से हरिद्वार आ रहे कांवड़ियों को बसों से पुलिस वापस भेज रही है.

Kanwar Yatra 2021 : हरिद्वार और उससे सटे रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की जांच हो रही है. इसी तरह ज़िले के सभी बॉर्डरों पर पुलिस बल तैनात है और कां​वड़ियों के प्रवेश को रोकने की कवायद जारी है. जानिए कैसे रखी जा रही है नज़र.

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पुलकित शुक्ला
हरिद्वार. कावड़ यात्रा रद्द किए जाने का व्यापक प्रचार प्रसार किए जाने के बावजूद कुछ श्रद्धालु कावड़ लेने हरिद्वार पहुंच रहे हैं. ट्रेनों से हरिद्वार पहुंचने वाले कावड़ियों पर प्रशासन पैनी नज़र बनाए हुए है. हरिद्वार रेलवे स्टेशन पर अब तक 400 से अधिक कांवड़ियों को वापस लौटाया जा चुका है. हरिद्वार और उससे लगे हुए रेलवे स्टेशनों पर ट्रेन से उतरने वाले सभी यात्रियों की जांच की जा रही है और यात्रियों के भेस में आ रहे कांवड़ियों को पहचानकर उन्हें लौटाया जा रहा है.

युवकों के ग्रुपों पर खास नज़र
स्थानीय लोगों और अस्थि विसर्जन आदि के लिए आए लोगों को स्टेशन परिसर से बाहर जाने की अनुमति है, लेकिन कावड़ियों को नहीं. जीआरपी रेलवे स्टेशनों पर लगातार कार्रवाई में जुटी है. युवकों के ग्रुप पर जीआरपी खास नज़र बनाए है. जीआरपी के एसपी मनोज कात्याल का कहना है कि कावड़िए हरिद्वार की सीमा में दाखिल न हों, इसके लिए ज़िले के सभी बॉर्डर पर पुलिस बल भी तैनात है. लेकिन जो यात्री कावड़ लेने के उद्देश्य से ट्रेन से हरिद्वार पहुंच रहे हैं उन्हें शटल बसों के द्वारा वापस भेजा जा रहा है. हरिद्वार सहित ज्वालापुर, रुड़की, ऋषिकेश, मोतीचूर जैसे रेलवे स्टेशनों पर जीआरपी नज़र बनाए हुए है.

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हरिद्वार ज़िला प्रशासन अब तक टैंकरों से गंगाजल यूपी और हरियाणा भिजवा चुका है.


टैंकर से भेजा जा रहा गंगाजल
हरिद्वार ज़िला प्रशासन की ओर से दूसरे राज्यों के ज़िलों को गंगाजल भेजा जा रहा है. अब तक हरिद्वार से दिल्ली और हरियाणा के लिए गंगाजल के चार टैंकर रवाना हो चुके हैं. ज़िलाधिकारी सी रविशंकर ने मेला नियंत्रण भवन से यमुनानगर ज़िले के लिए रवाना किए गए गंगाजल के टैंकर को हरी झंडी दिखाई. ज़िलाधिकारी ने कहा कि कावड़ियों का हरिद्वार आना प्रतिबंधित है लेकिन लोगों की धार्मिक भावनाओं को ध्यान में रखते हुए मांग के अनुसार गंगाजल भेजा जा रहा है. कुछ धार्मिक और सामाजिक संगठन भी गंगाजल भेजने में सहयोग कर रहे हैं.

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प्रधानमंत्री के 'जबरा' फैन, मुफ्त मेहंदी लगाकर मनाते हैं PM नरेंद्र मोदी का जन्मदिन

अंकुर 2015 से PM मोदी के जन्मदिन पर मुफ्त मेहंदी लगा रहे हैं.

ऋषिकेश के अंकुर प्रजापति साल 2015 से PM नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर मुफ्त मेहंदी लगाते आ रहे हैं.

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आपने फिल्मी सितारों के कई प्रशंसक देखे होंगे लेकिन भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi Birthday) की फैन फॉलोइंग भी कुछ कम नहीं है. 17 सितंबर को पीएम मोदी का जन्मदिन देशभर में मनाया जाता है. इस दिन पूरे देश में बीजेपी कार्यकर्ता अपने-अपने तरीके से उनका जन्मदिन मनाते हैं लेकिन ऋषिकेश में एक शख्स ऐसा भी है, जो बीजेपी का कार्यकर्ता नहीं, बल्कि नरेंद्र मोदी का प्रशंसक है और वह इस दिन मुफ्त में मेहंदी लगाकर PM का जन्मदिन मनाता है.

ऋषिकेश में अंकुर मेहंदी वाला के नाम से मशहूर अंकुर प्रजापति साल 2015 से प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन पर युवतियों और महिलाओं की फ्री मेहंदी लगाते आ रहे हैं. वह कहते हैं कि उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का व्यक्तित्व और उनके काम इतने पसंद आए कि उन्होंने उनके जन्मदिन पर फ्री में मेहंदी लगाने की शुरुआत की.

अपने पेज और सोशल मीडिया के माध्यम से अंकुर इस दिन लोगों को फ्री मेहंदी की जानकारी देते हैं. यही वजह है कि कोई तीज त्योहार न होने के बावजूद भी बड़ी संख्या में महिलाएं यहां मेहंदी लगाने पहुंचती हैं.

अंकुर ने कहा कि नरेंद्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री रहें या न रहें लेकिन वह उनके जन्मदिन पर मुफ्त में मेहंदी लगाना हमेशा जारी रखेंगे.

यहां सतयुग से रह रहे भगवान विष्णु, जानिए कैसे पड़ा इस शहर का नाम ऋषिकेश?

श्री भरत मंदिर में हृषिकेश नारायण की मूर्ति.

श्री भरत मंदिर में रैभ्य ऋषि और सोम ऋषि ने भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए तपस्या की थी.

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उत्तराखंड की तीर्थ और योगनगरी ऋषिकेश सतयुग से ही ऋषि-मुनियों की तपोस्थली रही है. यहां स्थित प्राचीन श्री भरत मंदिर (Shri Bharat Temple Rishikesh) में रैभ्य ऋषि और सोम ऋषि ने भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए तपस्या की थी. भगवान नारायण ने उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें दर्शन दिए थे.

विष्णु भगवान का एक नाम हृषिकेश भी है, जिसकी वजह से इस स्थान को हृषिकेश के नाम से जाना जाने लगा, हालांकि अपभ्रंश के चलते हृषिकेश की जगह ऋषिकेश कहा जाने लगा.

आठवीं सदी में शंकराचार्य ने शालिग्राम से बने भगवान नारायण की मूर्ति को मंदिर में पुनर्स्थापित किया था. साथ ही एक श्री यंत्र भी लगाया था. श्री भरत मंदिर के गर्भ गृह में भगवान नारायण की प्रतिमा के ठीक ऊपर गुंबद पर आपको यह श्री यंत्र दिख जाएगा.

श्री भरत मंदिर के परिक्रमा मार्ग में एक शिवलिंग भी स्थापित है, इसे पातालेश्वर महादेव नाम से जाना जाता है. ऋषिकेश के पांच महत्वपूर्ण शिव मंदिरों में इस मंदिर को भी गिना जाता है.

भरत मंदिर के पीछे वाले भाग में मां भगवती का मंदिर है, जो माहेश्वरी के नाम से विख्यात है. कहा जाता है कि दशरथ पुत्र भरत जब यहां नारायण की पूजा के लिए आए थे तो उन्होंने राम द्वारा रावण पर विजय से पहले भगवती माहेश्वरी के मंदिर की स्थापना की थी.

स्कंद पुराण के केदारखंड के अनुसार, इस मंदिर को सतयुग में वराह, त्रेता में परशुराम, द्वापर में वामन और कलयुग में भरत नाम से जाना गया.

काली मां का चमत्कारी मंदिर, जहां से गुजरते हुए ट्रेन भी देती है 'सलामी'

काली मां का मंदिर पहाड़ी पर स्थित है.

एक ओर श्रद्धालु मंदिर में माता के दर्शन कर रहे होते हैं, वहीं दूसरी ओर मंदिर के नीचे से ट्रेनें निकलती रहती हैं.

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हरिद्वार में मां काली का एक प्राचीन मंदिर है. यह मंदिर हर की पौड़ी के पास स्थित है. जानकारों का मानना है कि यह मंदिर महाभारत काल से यहां मौजूद है. मंदिर एक ऊंचे पहाड़ की गुफा में स्थित है और इसके नीचे से हरिद्वार और देहरादून की रेलवे लाइन गुजरती है. जहां एक ओर श्रद्धालु माता के दर्शन कर रहे होते हैं, वहीं दूसरी ओर मंदिर के नीचे से ट्रेनें निकलती रहती हैं.

लोगों का मानना है कि इस मंदिर में जो भी सच्चे मन से अपनी मुराद लेकर आता है, माता उसकी सभी मुरादें पूरी करती हैं. जानकारों के अनुसार, यह रेलवे लाइन ब्रिटिश काल में बनी थी. जिसके कुछ साल बाद ट्रेनों का संचालन शुरू हुआ.

हरिद्वार से ऋषिकेश जाने वाली ट्रेन या फिर ऋषिकेश और देहरादून से हरिद्वार जाने वाली ट्रेन यहां आकर रुक जाती थीं. माता के मंदिर के आगे ट्रेन नहीं बढ़ पाती थीं. एक दिन काली मां ने रेलवे विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी को सपने में दर्शन देकर बताया कि वहां पर उनका स्थान है.

काली मां ने आगे कहा कि यहां पर उनके भक्तों के आने-जाने के लिए मार्ग का निर्माण किया जाए, जिससे उनके भक्त मंदिर तक पहुंच सकें. जिसके बाद रेल लाइन के ऊपर से पुल का निर्माण किया गया. पुल बनने के बाद अचानक सब ठीक हो गया और ट्रेन आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान तक मंदिर से होकर जाने लगीं.

आज भी यहां से जब ट्रेन निकलती हैं, तो लोको पायलट एक बार हॉर्न बजाकर माता के दरबार में हाजिरी जरूर लगाते हैं.

सैलानियों की पहली पसंद बना नीरगढ़ वॉटरफॉल, जानिए कैसे पहुंचे ऋषिकेश के सबसे बड़े झरने तक?

नीर वॉटरफॉल ऋषिकेश का सबसे बड़ा झरना है.

नीर वॉटरफॉल ऋषिकेश का सबसे बड़ा झरना है. इसे नीरगढ़ वॉटरफॉल भी कहा जाता है.

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उत्तराखंड में कोविड कर्फ्यू में ढील के बाद से तमाम पर्यटन स्थल फिर से पर्यटकों से गुलजार होने लगे हैं. बीती एक जुलाई से ऋषिकेश का नीर वॉटरफॉल भी पर्यटकों की आवाजाही के खोल दिया गया था. नीर वॉटरफॉल ऋषिकेश का सबसे बड़ा झरना है. इसे नीरगढ़ वॉटरफॉल भी कहा जाता है. यहां हर रोज बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और पर्यटक प्राकृतिक सुंदरता का लुत्फ उठाने आ रहे हैं.

बद्रीनाथ हाईवे से दो किलोमीटर ऊपर यह नीर झरना स्थित है. यहां जाने के लिए मोटर मार्ग बना हुआ है. यह झरना ऋषिकेश के सबसे बड़े झरने के रूप में जाना जाता है. यहां पहुंचते ही आपको आनंद की अनुभूति होती है. यह झरना तीन से चार सतहों से होकर आता है.

हर सतह पर पर्यटक झरने के नीचे नहाकर लुत्फ ले सकते हैं. रोज सैकड़ों की संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं. इसके साथ ही यहां पर पर्यटकों की सुविधा के लिए 15 से 20 दुकानें भी मौजूद हैं.

जंगलों के बीच स्थित यह झरना जहां प्राकृतिक सौंदर्य के लिहाज से पर्यटकों को आकर्षित करता है, वहीं इस झरने का ठंडा पानी और नहाने के लिए पर्याप्त स्थान होने के कारण यह नीर वॉटरफॉल कई लोगों के लिए पहली पसंद बना हुआ है. प्री-वेडिंग शूट के लिए भी यहां दूर-दूर से कपल पहुंच रहे हैं.

भरत मंदिर में ऋषिकेश का इकलौता संग्रहालय, यहां मौजूद हैं तीसरी सदी की हैरतअंगेज निशानियां

भरत मंदिर संग्रहालय में रखीं मूर्तियां और अवशेष.

ऋषिकेश के प्राचीन श्री भरत मंदिर में शहर का एकमात्र संग्रहालय बनाया गया है.

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खुदाई के दौरान निकले अवशेषों या मूर्तियों को एकत्रित कर संग्रहालय में रखा जाता है. साथ ही यह कितना पुराना है, इसकी भी जांच पुरातत्व विभाग करता है. ऐसे अवशेष हमारी प्राचीन संस्कृति और सभ्यता का परिचय हमसे करवाते हैं. ऋषिकेश के प्राचीन श्री भरत मंदिर में शहर का एकमात्र संग्रहालय बनाया गया है.

इस संग्रहालय में रखीं हुईं कई मूर्तियां, ईंट व अन्य वस्तुएं खुदाई के दौरान पाई गई थीं, जिन्हें उत्तर प्रदेश पुरातत्व विभाग द्वारा जांच कर पंजीकृत किया गया है. इस संग्रहालय में तीसरी सदी तक के अवशेष देखने को मिलते हैं.

यहां पर भगवान विष्णु और भोलेनाथ की प्रतिमा, मानवों की मूर्ति, प्राचीन काल की तमाम वस्तुएं आदि देखने को मिल जाती हैं.

भरत मंदिर संस्कृत महाविद्यालय के प्रधानाचार्य सुरेंद्र दत्त भट्ट बताते हैं कि ऐसी जानकारी मिलती है कि बौद्धों द्वारा इस मंदिर पर आक्रमण किया गया था, जिसमें यह मूर्तियां दब गई थीं, जो अब समय-समय पर खुदाई में मिलती रहती हैं.

UKPSC Recruitment 2021: असिस्टेंट प्रॉसीक्यूशन ऑफिसर के पदों पर आवेदन का कल है आखिरी मौका, ऐसे करें अप्लाई

UKPSC Recruitment 2021: असिस्टेंट प्रॉसीक्यूशन ऑफिसर के पदों पर आवेदन 17 सितंबर तक किए जा सकते हैं,

UKPSC APO Recruitment 2021: असिस्टेंट प्रॉसीक्यूशन ऑफिसर के पदों पर आवेदन प्रक्रिया 3 अगस्त 2021 को शुरू हुई थी. कुल 63 पदों पर भर्तियां के लिए 31 सीटें जनरल कैटेगरी के लिए, 6 सीटें ईडब्ल्यूएस कैटेगरी के लिए, 12 सीटें ओबीसी कैटेगरी के लिए, 13 सीटें एससी कैटेगरी के लिए और 1 सीट एसटी कैटेगरी के लिए आरक्षित है.

  • News18Hindi
  • LAST UPDATED : September 16, 2021, 16:25 IST
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नई दिल्ली. UKPSC APO Recruitment 2021: एलएलबी की डिग्री हासिल कर चुके और नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के पास उत्तराखंड में असिस्टेंट प्रॉसीक्यूशन ऑफिसर (APO) बनने का सुनहरा मौका है. बता दें कि उत्तराखंड पब्लिक सर्विस कमीशन की ओर से जारी असिस्टेंट प्रॉसीक्यूशन ऑफिसर के पद पर कुल 63 भर्तियां की जानी है. इसके लिए इच्छुक और योग्य अभ्यर्थी कल यानी 17 सितंबर तक आवेदन कर सकते हैं. ऐसे में जिन अभ्यर्थियों ने अभी तक आवेदन नहीं किया है वो यूकेपीएससी की आधिकारिक वेबसाइट ukpsc.gov.in पर विजिट करके ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं.

बता दें कि असिस्टेंट प्रॉसीक्यूशन ऑफिसर के पदों पर आवेदन प्रक्रिया 3 अगस्त 2021 को शुरू हुई थी. कुल 63 पदों पर भर्तियां के लिए 31 सीटें जनरल कैटेगरी के लिए, 6 सीटें ईडब्ल्यूएस कैटेगरी के लिए, 12 सीटें ओबीसी कैटेगरी के लिए, 13 सीटें एससी कैटेगरी के लिए और 1 सीट एसटी कैटेगरी के लिए आरक्षित है. अधिक जानकारी के लिए अभ्यर्थी ऑफिशियल नोटिफिकेशन भी देख सकते हैं.

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UKPSC Recruitment 2021: ऐसे करें ऑनलाइन अप्लाई

  • सबसे पहले यूकेपीएससी की ऑफिशियल वेबसाइट ukpsc.gov.in पर विजिट करें.
  • वेबसाइट के होम पेज पर दिए Recruitment पर क्लिक करें.
  • अब यहां UKPSC Assistant Prosecution Officer APO 2021 के लिंक पर क्लिक करें.
  • एक नया पेज खुलेगा यहां रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया की डिटेल्ट भरें.
  • रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया के बाद एप्लीकेशन फॉर्म भरें.
  • सबसे लास्ट में प्रिंटआउट जरूर ले लें.

UKPSC Recruitment 2021: योग्यता और आयु सीमा
इन पदों पर आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों के पास एलएलबी पास की डिग्री अनिवार्य रूप से होनी चाहिए. इसके अलावा आवेदन के लिए अभ्यर्थी की उम्र 21 साल से 42 साल के बीच होनी चाहिए. बता दें कि इन पदों के लिए परीक्षा का आयोजन और एडमिट कार्ड जारी होने की तारीख अभी घोषित नहीं हुई है. ऐसे में अभ्यर्थी नियमित अपडेट के लिए आयोग की वेबसाइट पर नजर बना कर रखें.

ऋषिकेश : साल में सिर्फ 1 दिन होते हैं राधा रानी के चरणों के दर्शन

मधुबन आश्रम में राधा अष्टमी धूमधाम से मनाई गई.

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के ठीक 15 दिन बाद राधा अष्टमी मनाई जाती है.

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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के ठीक 15 दिन बाद राधा अष्टमी मनाई जाती है. ऋषिकेश के मधुबन आश्रम स्थित मंदिर में इस दिन पूरे साल में एक बार राधा रानी के चरणों के दर्शन भक्तों को करवाए जाते हैं. साथ ही इस दिन बड़ी संख्या में भक्त मंदिर में इकट्ठा होकर भजन-कीर्तन करते हैं.

राधा अष्टमी को राधा के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है. मुनि की रेती स्थित मधुबन आश्रम में राधा रानी का जन्मदिन बड़े धूमधाम से मनाया गया.

इस मौके पर भगवान कृष्ण और राधा रानी का दूध, दही और जल से अभिषेक हुआ. इसके अलावा भक्तों को साल में एक दिन होने वाले राधाचरणों के दर्शन भी करवाए गए. वहीं कृष्ण भक्तों ने हरे राम, हरे कृष्ण का जप करते हुए भजन-कीर्तन कर समां बांध दिया.

कोरोना की तीसरी लहर की ये कैसी तैयारी? सरकारी अस्पताल में 'शोपीस' बने 21 वेंटिलेटर

ऋषिकेश के सरकारी अस्पताल को 21 वेंटिलेटर दिए गए हैं.

वेंटिलेटर के संचालन के लिए एनेस्थेटिक, टेक्नीशियन और नर्सिंग स्टाफ की जरूरत होती है.

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कोरोना महामारी की तीसरी लहर से निपटने के लिए कई राज्य तैयारियों में जुटे हुए हैं. अस्पतालों में वेंटिलेटर की व्यवस्था की जा रही है. ऋषिकेश के सरकारी अस्पताल में भी कोविड के गंभीर मरीजों के इलाज के लिए 21 वेंटिलेटर लगाए गए हैं लेकिन अभी तक वेंटिलेटर के संचालन के लिए अस्पताल को प्रशिक्षित स्टाफ नहीं दिया गया है, जिसके चलते सभी वेंटिलेटर शोपीस बने हुए हैं.

वेंटिलेटर के संचालन के लिए एनेस्थेटिक, टेक्नीशियन और नर्सिंग स्टाफ की जरूरत होती है लेकिन अस्पताल के पास एक भी एनेस्थेटिक और टेक्नीशियन नहीं है. ऐसे में तीसरी लहर के आने पर जहां कोविड के गंभीर मरीजों को दर-दर भटकना पड़ेगा, वहीं स्वास्थ्य विभाग द्वारा मिले यह वेंटिलेटर भी बेकार साबित होंगे.

अस्पताल के सीएमएस डॉक्टर विजयेश भारद्वाज ने बताया कि वह कई बार शासन से पत्र लिखकर स्टाफ की मांग कर चुके हैं. उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही स्टाफ की नियुक्तियां कर दी जाएंगी.

दिव्यांगों की मदद कर रहीं अंतरराष्ट्रीय पैरा खिलाड़ी नीरजा गोयल, बोलीं- बेहतर संसाधन मिलें तो...

अपने मेडल्स के साथ अंतरराष्ट्रीय पैरा खिलाड़ी नीरजा गोयल.

नीरजा गोयल बैडमिंटन में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पैरा खेलों की कई प्रतियोगिताओं में भाग ले चुकी हैं.

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पैरा ओलंपिक में इस बार भारतीय दिव्यांग खिलाड़ियों ने देश का लोहा मनवाया. खिलाड़ियों ने पैरालंपिक में 19 पदक अपने नाम किए, जिससे साफ जाहिर होता है कि अगर दिव्यांग खिलाड़ियों को संसाधन उपलब्ध कराए जाएं तो वह भी बाकी खेलों की तरह पैरा खेलों में देश का नाम रोशन कर सकते हैं. ऋषिकेश की दिव्यांग पैरा खिलाड़ी नीरजा गोयल ने अन्य दिव्यांगों की मदद का बीड़ा उठाया है.

नीरजा गोयल बैडमिंटन में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पैरा खेलों की कई प्रतियोगिताओं में भाग ले चुकी हैं. साथ ही कई पुरस्कार और पदक भी अपने नाम कर चुकी हैं. उन्होंने कहा कि वह पिछले कई साल से ऋषिकेश में पैरा खिलाड़ियों के लिए एक जगह की मांग की जा रही है, जहां दिव्यांग खिलाड़ी खेलों की तैयारी कर सकें.

जिसके बाद खिलाड़ी पैरा ओलंपिक के लिए भी तैयार हो सकें. उन्होंने आगे कहा कि इसके लिए वह मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, खेल मंत्रालय और नगर निगम से भी गुहार लगा चुकी हैं लेकिन अब तक किसी ने भी दिव्यांग खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए कोई मदद नहीं की है.

घायल बेजुबानों का सहारा बनीं ऋषिकेश की देवकी, घर खर्च के पैसों से करती हैं जानवरों का इलाज

देवकी सुबेदी अब तक दर्जनों पशुओं का इलाज कर चुकी हैं.

ऋषिकेश की देवकी सुबेदी अब तक 100 से ज्यादा मवेशियों का इलाज कर चुकी हैं.

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सड़कों पर बढ़ती गोवंश की समस्या से न सिर्फ राहगीर परेशान होते हैं, बल्कि मवेशियों को भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. कई बार सड़क में घूम रहे मवेशी वाहनों से चोटिल हो जाते हैं, वहीं कई मवेशियों की बीमारी के चलते इलाज न मिलने से मौत हो जाती है. ऐसे में जरूरतमंद गोवंश के लिए आशियाना बनाकर रायवाला की देवकी सुबेदी ने उनके इलाज का बीड़ा उठाया है.

देवकी अब तक 100 से ज्यादा मवेशियों का इलाज कर चुकी हैं. सबसे बड़ी बात है कि देवकी इन सभी का खर्च वह अपनी जेब से उठाती हैं. फिलहाल उनकी गौशाला में 12 पशु हैं, जिनका इलाज चल रहा है.

वहीं अगर इलाज के दौरान किसी मवेशी की मौत हो जाती है, तो उसका भी हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार अंतिम संस्कार किया जाता है. वह कहती हैं कि उन्होंने अब अपना जीवन घायल पशुओं के इलाज के लिए ही समर्पित कर दिया है.

स्थानीय युवक और पुरोहित पंडित योगेश बलोदी भी गोवंशों की सेवा के लिए देवकी की मदद को आगे आए हैं. अलग-अलग जगहों से घायल मवेशियों को लाने और छोड़ने का काम भी योगेश ही करते हैं.

इस गौशाला में जहां घायल पशुओं को नया जीवन मिल रहा है, वहीं शहर के अन्य लोगों को भी ऐसा करने की प्रेरणा मिल रही है.

हरिद्वार के करण सिंह के पास है 'राम दरबार' वाला ये सिक्का, दावा- 1 करोड़ तक लगी बोली

हरिद्वार में पुराने सिक्कों का व्यापार होता है.

हरिद्वार के करण सिंह के पास चांदी, तांबे, पीतल समेत कई तरह की धातु में बने सिक्के उपलब्ध हैं.

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किसी भी देश के सिक्के उसके इतिहास का दर्पण होते हैं. कई लोग पुराने सिक्कों को जमा करने का शौक रखते हैं. यही वजह है इन सिक्कों के बंद हो जाने के बाद भी बाजार में यह सिक्के महंगे दामों में खरीदे और बेचे जा रहे हैं. हरिद्वार के करण सिंह के पास राम दरबार वाला सिक्का है. उनका दावा है कि इस सिक्के की एक करोड़ रुपये बोली लग चुकी है.

करण सिंह पिछले 20 साल से पीढ़ी दर पीढ़ी पुराने सिक्कों का व्यवसाय कर रहे हैं. वह बताते हैं कि उनके पास चांदी, तांबे, पीतल समेत कई तरह की धातु में बने सिक्के मौजूद हैं, जो मुगल काल से लेकर ब्रिटिश शासन तक की झलक दिखाते हैं.

इसके साथ ही राम दरबार नाम से एक सिक्का काफी मशहूर है, जिसकी कीमत पुराने सिक्कों के बाजार में लाखों और करोड़ों रुपये बताई जाती है. करण सिंह का दावा है कि उनके पास भी इस सिक्के के लिए 50 लाख और एक करोड़ रुपये तक के ऑफर आए थे, लेकिन उस समय किसी कारणवश उन्होंने इसे नहीं बेचा.

वहीं दूसरी ओर पुराने सिक्कों के बाजार में मांग ज्यादा और सप्लाई कम होने की वजह से नकली सिक्कों का भी चलन बढ़ने लगा है, जिसके चलते यह जरूरी है कि अगर आप कोई महंगा सिक्का खरीद रहे हैं, तो पहले उसकी असलियत की भी जांच अच्छी तरीके से कर लें.

हरिद्वार : मूर्ति रूप में विराजमान हैं 'भारत माता', देश के नायकों को समर्पित है मंदिर

मंदिर में कई संतों की भी प्रतिमाएं हैं.

हरिद्वार का 'भारत माता मंदिर' एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है, जो भारत मां को समर्पित है.

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हरिद्वार का \’भारत माता मंदिर\’ एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है, जो भारत मां को समर्पित है. यह मंदिर देश-विदेश से आने वाले सैलानियों के लिए आकर्षण का केंद्र रहता है. इसका निर्माण प्रसिद्ध धार्मिक गुरु स्वामी सत्यमित्रानंद गिरी ने करवाया था. तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने साल 1983 में इस मंदिर का उद्घाटन किया था.

मंदिर में 8 मंजिलें हैं और यह 180 फुट की ऊंचाई पर स्थित है. मंदिर की अलग-अलग मंजिलों पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों, मातृ शक्तियों, साधु-संतों और कई देवी-देवताओं की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं.

मंदिर में सबसे प्रमुख पहली मंजिल पर स्थित भारत माता की मूर्ति है, जो भारत देश की अखंडता का प्रतीक है. भारत माता की मूर्ति को स्थापित करके एकता का संदेश दिया गया है.

दूसरी मंजिल पर \’शूर मंदिर\’ है, जो भारत के शूरवीरों को समर्पित है, इसमें भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, रानी लक्ष्मी बाई, सुभाष चंद्र बोस, सरदार पटेेेल और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जैसेे नायकों की प्रतिमाओं को स्थान दिया गया है.

महिलाओं ने नाचते-गाते मनाई 'हरतालिका तीज', जानिए इस त्योहार का इतिहास

'हरतालिका तीज' के अवसर पर पारंपरिक पोशाक में महिलाएं.

भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर 'हरतालिका तीज' का त्योहार मनाया जाता है.

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गोरखालियों का प्रमुख त्योहार \’हरतालिका तीज\’ हर साल बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है. ऋषिकेश के रायवाला में स्थित घुश्यारी मंदिर में इस त्योहार के कार्यक्रम कई पीढ़ियों से होते आ रहे हैं. महिलाएं इस दिन व्रत रखती हैं और अपने पारंपरिक परिधानों के साथ नाच-गाना कर इस त्योहार को पूरे हर्षोल्लास से मनाती हैं. इस दौरान महिलाओं के झूला झूलने का भी विशेष रिवाज है.

हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर \’हरतालिका तीज\’ का त्योहार मनाया जाता है. तीज का त्योहार सुहागन महिलाओं के लिए बहुत खास होता है. इस दिन महिलाएं व्रत रखती हैं. मां पार्वती और भगवान शिव की पूजा करके वे अपने पति की लंबी उम्र और सौभाग्य की प्रार्थना करती हैं.

मान्यताओं के अनुसार, तीज का व्रत सबसे पहले माता पार्वती ने रखा था. इससे खुुश होकर भगवान शिव नेे पार्वती सेेेेेे विवाह करना स्वीकार किया था. यही वजह है कि \’हरियाली तीज\’ पर कुंवारी लड़कियां भी व्रत रखती हैं और अच्छे वर की प्राप्ति के लिए माता पार्वती से प्रार्थना करती हैं.

हरिद्वार का सप्तऋषि घाट, यहां इस वजह से 7 हिस्सों में बंट गई थी गंगा नदी

सप्तऋषि घाट हरिद्वार में स्थित है.

मां गंगा ने भय से ऋषियों की तपस्या भंग नहीं की और वह स्वयं ही 7 हिस्सों में बंट गईं.

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हरिद्वार के हर की पौड़ी से 5 किलोमीटर दूरी पर स्थित यह जगह सप्तऋषि घाट के नाम से जानी जाती है. यहां पर सप्त ऋषियों ने तपस्या की थी. ऐसा माना जाता है कि जब मां गंगा नदी के रूप में गोमुख से आगे बढ़ रही थीं, तो इसी जगह पर सप्तऋषि पूरे भक्ति भाव से तपस्या में लीन थे.

मां गंगा ने भय से ऋषियों की तपस्या भंग नहीं की और वह स्वयं ही 7 हिस्सों में बंट गईं यानी नदी ने अपना रास्ता बदल लिया. यही वजह है कि इसे \’सप्त धारा\’ भी कहा जाता है.

मान्यता है कि पांडव भी स्वर्ग जातेेे समय इसी स्थान से होकर गुजरे थे. एक हिंदू लोककथा के अनुसार, सप्त ऋषियों का यह आश्रम उनका आराधना स्थल था.

हरिद्वार में स्वाद की 100 साल पुरानी दुकान, आज भी वही जायका दे रहे 'मोहन जी पूरी वाले'

यह छोले-पूरी की 100 साल पुरानी दुकान है.

इस दुकान की शुरुआत परत मोदी द्वारा की गई थी, जिसे अब उनके पर पोते शैलेश मोदी चला रहे हैं.

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हरिद्वार के \’मोहन जी पूरी वाले\’ आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं. यह दुकान अपने ग्राहकों को पिछले 100 साल से छोले-पूरी का वही लाजवाब स्वाद परोस रही है. हरिद्वार आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक गंगा स्नान के बाद मोहन जी की दुकान पर आकर छोले और पूरी खाना नहीं भूलते हैं.

इस दुकान की शुरुआत परत मोदी द्वारा की गई थी, जिसे अब उनके पर पोते शैलेश मोदी चला रहे हैं. मोदी परिवार की चौथी पीढ़ी आज इस व्यवसाय को आगे बढ़ा रही है.

परत मोदी ने अपने बेटे मोहन के नाम पर इस दुकान को यह नाम दिया था. अगर हम कहें कि हरिद्वार आकर पूरी खाने के शौकीनों का पता आज भी \’मोहन जी पूरी वाले\’ ही है, तो यह हरगिज गलत नहीं होगा.

ऋषिकेश : योग की दुनिया में गुरु-शिष्य का बजा डंका, दोनों ने बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड

अंकित खत्री ने एकपाद शीर्षासन में वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया.

शिवम गोस्वामी ने एडवांस विश्वामित्र योगासन में विश्व रिकॉर्ड अपने नाम किया.

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योगनगरी ऋषिकेश योग को लेकर विश्व पटल पर अपनी एक अलग पहचान रखती है. यही वजह है कि शहर में हजारों अभ्यर्थी योग की शिक्षा लेकर इस क्षेत्र में नाम कमा रहे हैं. ऋषिकेश में ही योग कर रहे गुरु-शिष्य की जोड़ी ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर आयोजित गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया है.

दिव्य भारत निर्माण ट्रस्ट और दिव्य योगपीठ अयोध्या की ओर से 21 जून, 2021 को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर ऑनलाइन गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड प्रतियोगिता करवाई गई थी. इसमें मुजफ्फरनगर के रहने वाले शिवम गोस्वामी ने एडवांस विश्वामित्र योगासन में विश्व रिकॉर्ड अपने नाम किया.

शिवम पिछले पांच साल से ऋषिकेश में रहकर योगाभ्यास कर रहे हैं. इसके साथ ही वह फिलहाल 40 लोगों को भी योग सिखा रहे हैं. वह कई योग प्रतियोगिताओं में भी अपना लोहा मनवा चुके हैं.

वहीं राजस्थान के अंकित खत्री ने एकपाद शीर्षासन में वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया. अंकित करीब एक साल से योग का अभ्यास कर रहे हैं. वह योग के क्षेत्र में ही आगे बढ़ना चाहते हैं.

ऋषिकेश का त्र्यंबकेश्वर मंदिर, इस 13 मंजिल इमारत में विराजमान हैं सभी भगवान

त्र्यंबकेश्वर मंदिर गंगा तट पर स्थित है.

गंगा नदी के किनारे बसे इस मंदिर को करीब तीन दशक पहले स्वामी कैलाशानंद महाराज ने बनवाया था.

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मशहूर लक्ष्मण झूला के पास बना त्र्यंबकेश्वर मंदिर पर्यटकों के साथ-साथ स्थानीय लोगों के लिए भी आकर्षण और आस्था का केंद्र है. इस मंदिर में 13 मंजिलें हैं और हर मंजिल में अलग-अलग देवताओं की मूर्तियां विराजमान हैं. गंगा नदी के किनारे बसे इस मंदिर को करीब तीन दशक पहले स्वामी कैलाशानंद महाराज ने बनवाया था.

इस मंदिर में देवी-देवताओं के साथ-साथ छोटी-छोटी दुकानें भी मौजूद हैं, जिनमें रुद्राक्ष-तुलसी की मालाएं और विभिन्न धातुओं की अंगूठियां आदि उपलब्ध होती हैं.

यह मंदिर देखने में इतना भव्य दिखता है कि हरिद्वार-ऋषिकेश आने वाले अधिकतर सैलानी एक बार जरूर इस मंदिर में आकर भगवानों के दर्शन करते हैं. फिलहाल कोरोना के बाद से इस मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में काफी कमी आई है.

शिक्षक दिवस : अमेरिकी महिला बनी देसी बच्चों की टीचर, अपनी जमापूंजी से निखार रही मासूमों की प्रतिभा

तारा मां मूल रूप से अमेरिका की नागरिक हैं.

तारा मां के साथ तीन और महिला टीचर भी हैं, जो उनकी इस पहल में सहयोग कर रही हैं.

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गुरु को धरती पर भगवान का दर्जा दिया जाता है. कहा जाता है कि वह शिक्षक ही होता है, जो बच्चों का भविष्य उज्जवल बनाता है. ऐसी ही एक विदेशी मूल की शिक्षिका तारा मां ऋषिकेश में गरीब तबके से आने वालीं बच्चियों को शिक्षा दे रही हैं. यहां बच्चे पढ़ाई के साथ-साथ डांस, योग और पेंटिंग आदि सीखते हैं.

बच्चों के बीच तारा मां के नाम से पहचान बनाने वालीं तरणी साउथ अमेरिका से हैं और पिछले डेढ़ साल से बच्चों की प्रतिभा को निखारने का यह काम कर रही हैं. तारा मां के साथ तीन और महिला टीचर भी हैं, जो उनकी इस पहल में सहयोग कर रही हैं. ये सभी अपने खर्च से बच्चों को शिक्षित करने का कार्य कर रही हैं.

यहां पढ़ने वाले बच्चे तारा मां को अपने परिवार का हिस्सा मानते हैं. वे कहते हैं कि इतना अच्छा उन्हें अपने स्कूल और घर में नहीं लगता, जितना यहां आकर लगता है.

यहां किराए के दो कमरों में बच्चों को शिक्षा दी जाती है. 15 बच्चों से शुरू हुई इस मुहिम से आज 70 बच्चे जुड़ चुके हैं. यहां बच्चों के कपड़ों और जरूरत की सभी चीजों का खर्च तारा मां और उनसे जुड़ी शिक्षिकाएं उठाती हैं.

ऋषिकेश के इस कुंड में त्रेता युग से आ रहा यमुना नदी का पानी, सर्दियों में गर्म और गर्मियों में ठंडा हो जाता है जल

कुंज ऋषि ने त्रेता युग में यहां कठोर साधना की थी। जिसके बाद यमुना नदी के आशीर्वाद से यह कुंड नदी के जल से भर गया था।

कुंज ऋषि ने त्रेता युग में यहां कठोर साधना की थी। जिसके बाद यमुना नदी के आशीर्वाद से यह कुंड नदी के जल से भर गया था।

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तीर्थ नगरी ऋषिकेश ऋषियों की भूमि रही है, यही वजह है कि यहां पग-पग पर अनेक पौराणिक स्थलों के दर्शन होते हैं। इन्हीं में से एक स्थान ऋषि कुंड भी इसमें शामिल है, जो त्रिवेणी घाट में गंगा नदी के ही समीप स्थित है। यमुना नदी का पानी त्रेता युग से यहां पर विराजमान है।

मान्यता है कि कुंज ऋषि ने त्रेता युग में यहां कठोर साधना की थी। जिसके बाद यमुना नदी के आशीर्वाद से यह कुंड नदी के जल से भर गया था।

इस ऋषि कुंड का जल न तो कभी बढ़ता है और न ही कभी कम होता है। कहा जाता है कि सर्दियों में इस कुंड का जल गरम रहता है और गर्मियों में इस कुंड का जल ठंडा हो जाता है। यमुना का जल ऋषि कुंड से ही त्रिवेणी घाट में गंगा से जाकर मिलता है। इस कुंड का पानी हमेशा एक रंग का रहता है। किसी भी मौसम में इसका पानी कभी मटमैला नहीं होता।

इस कुंड के जल के भीतर मछलियां और कछुए रहते हैं, जिन्हें खाना खिलाना या पकड़ना प्रतिबंधित है। गंगा दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह कुंड खासा आकर्षण का केंद्र रहता है।

साथ ही कुंड के पास रघुनाथ जी का मंदिर भी स्थापित है। मान्यता है कि रावण के वध के बाद ब्रह्म हत्या के पाप के प्रायश्चित के लिए भगवान राम ने कुछ समय तक इस कुंड के पास तप किया था। इसके बाद वह तपस्या करने देवप्रयाग चले गए थे। यहां भी राम भक्त दूर-दूर से आकर रघुनाथ जी के दर्शन करते हैं।

ऋषिकेश के ग्रामीण क्षेत्र में कोरोना टीकाकरण का महाअभियान, सैकड़ों लोगों ने लगवाई वैक्सीन

काफी संख्या में लोग वैक्सीन लगवाने पहुंचे. 

कोरोना टीकाकरण महाअभियान के तहत ऋषिकेश वे श्यामपुर के एक फॉर्म में मुफ्त वैक्सीनेशन कैंप लगाया गया.

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कोरोना टीकाकरण महाअभियान के तहत ऋषिकेश वे श्यामपुर के एक फॉर्म में मुफ्त वैक्सीनेशन कैंप लगाया गया. इस कैंप में हरिपुर कला से लेकर ऋषिकेश तक के लोग वैक्सीन लगवाने पहुंचे. इस दौरान करीब 350 लोगों को टीका लगाया गया.

वैक्सीनेशन के बीच ग्रामीण क्षेत्रों में यह समस्या आ रही थी कि कई लोग किसी ना किसी कारणवश वैक्सीन नहीं लगा पा रहे थे. इसका समाधान करने के लिए हरिद्वार लोकसभा से सांसद रमेश पोखरियाल निशंक की पहल पर ऋषिकेश के ग्रामीण क्षेत्र में कोरोना टीकाकरण का महाअभियान चलाया गया.

वैक्सीनेशन से पहले लोगों को कई माध्यमों से इस टीकाकरण की जानकारी दी गई. यही वजह रही कि सुबह 8 बजे से ही लोग कैंप में पहुंचने शुरू हो गए थे. जिसके बाद ऋषिकेश राजकीय चिकित्सालय से मेडिकल टीम ने करीब 11 बजे से टीकाकरण अभियान शुरू किया, जो शाम करीब चार बजे तक चला. इस दौरान अलग-अलग उम्र के करीब 350 लोगों ने वैक्सीनेशन करवाया. कैंप में कोविशील्ड की पहली और दूसरी दोनों डोज लगाई गईं.

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