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रुड़की के किसानों की गेहूं की फसल तैयार, लॉकडाउन के कारण हो रही ये परेशानी

इस बार बेमौसम बारिश ने किसानों की खड़ी फसलों को काफी नुकसान पहुंचाया है. (फाइल फोटो)

इस बार बेमौसम बारिश ने किसानों की खड़ी फसलों को काफी नुकसान पहुंचाया है. (फाइल फोटो)

रुड़की (Roorkee) के ग्रामीण क्षेत्रों (Rural Areas) के किसानों की परेशानी लॉकडाउन (Lockdown) ने बढ़ा दी है. इस कारण उन्हें दोहरी मार झेलनी पड़ रही है.

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रुड़की (उत्तराखंड). रुड़की (Roorkee) के ग्रामीण क्षेत्रों (Rural Areas) के किसानों की परेशानी लॉकडाउन (Lockdown) ने बढ़ा दी है. इस कारण उन्हें दोहरी मार झेलनी पड़ रही है. दरअसल, कई किसानों ने अपने गेंहू की फसल काट दी है. लेकिन अब सबसे बड़ी समस्या किसानों को अपनी गेहूं खरीद केंद्र तक पहुंचाने में आ रही है. लॉकडाउन के चलते गेहूं खरीद केंद्रों पर मात्र एक दिन में 8 से 10 किसानो के गेंहू की तोले जा रहे है. इस कारण उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ता है. फिलहाल गेंहू का क्रय मूल्य 1845 रुपए है. इसमें किसानों के सब्सिडी भी शामिल है. वैसे भी इस बार बेमौसम बारिश ने किसानों की खड़ी फसलों को काफी नुकसान पहुंचाया है.

गेहूं बेचने के लिए किया जा रहा प्रेरित
बेलड़ी गेंहू खरीद केंद्र के प्रभारी विवेक कुमार शर्मा ने बताया कि गांवो में जाकर किसानों को गेहूं बेचने के प्रेरित किया जा रहा है. साथ ही उनका रजिस्ट्रेशन भी किया जा रहा है ताकि किसानों को कोई दिक्कत ना हो. वहीं किसानों का कहना कि छोटे केंद्रों पर उन्हें सुविधा भी मिल रही है. बड़े क्रय केंद्रों पर उन्हें गेंहू तोलने का समय नहीं दिया जाता है.

बेमौसम बारिश से हुआ नुकसान, किसान मांग रहे मुआवजा
प्रदेश के रुड़की इलाके के किसान भी पिछले महीने हुए बारिश से परेशान रहे. माना जा रहा है कि इससे गेहूं, सरसो और गन्ने की फसल का नुकसान हुआ है. यह नुकसान 70 प्रतिशत तक माना जा रहा है. इस कारण किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है. प्रकृति की मार से परेशान किसानों ने प्रशासन से इसका आकलन करने और उचित मुआवजे की मांग की थी. जिससे इस नुकसान की भरपाई की जा सके. उत्तराखंड के अन्य जिलों में भी किसानों को मौसम की मार झेलनी पड़ी थी.

सरकार ने राहत देने का किया था ऐलान
सरकार ने किसानों को राहत देते हुए ऐलान किया है. इस दौरान किसानों और बागवान की फसलों को अगर 33 प्रतिशत भी नुकसान पहुंचा है तो वो किसान भी इसका हक़दार होगा. इससे पहले 33 प्रतिशत तक नुकसान होने आपदा के कारण होने से इसे नुकसान की श्रेणी में नहीं रखा जाता था. इस कारण किसानों को मुआवजा नहीं मिल पाता था.



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