Haridwar Kumbh: आज होगा तीसरा शाही स्नान, 13 अखाड़ाें और लाखों श्रद्धालुओं के लिए तैयारियां पूरी

शाही स्नान को लेकर प्रशासन ने अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं और हर अखाड़े के स्नान करने का समय भी तय कर दिया गया है.

शाही स्नान को लेकर प्रशासन ने अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं और हर अखाड़े के स्नान करने का समय भी तय कर दिया गया है.

कुंभ के अंतर्गत बुधवार को बैसाखी मेष संक्रांति के दौरान तीसरा शाही स्नान होगा. इस दौरान 13 अखाड़ाें के साधु-संतों का वैभव देखते ही बनेगा. प्रशासन ने इसको लेकर तैयारियां पूरी कर ली हैं.

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हरिद्वार. हरिद्वार में चल रहे कुंभ के अंतर्गत बुधवार को बैसाखी मेष संक्रांति के मौके पर तीसरा शाही स्नान होगा. इस दौरान 13 अखाड़ाें के साधु संत इसमें स्नान में हिस्सा लेंगे. जानकारी के अनुसार ये स्नान सुबह 10.15 से शुरू होकर शाम 5.30 बजे तक चलेगा. खास बात ये रहेगी कि इस स्नान के लिए साधु संत मेला प्रशासन ने 20 बिंदुओं की गाइडलाइंस जारी की हैं और उसकी पालना करना अनिवार्य होगा. आयोजन के चलते बुधवार को देहरादून-हरिद्वार हाईवे पर ट्रैफिक व्यवस्‍था भी प्रभावित रहेगी.

जानकारी के अनुसार शंकराचार्य चौक से चंडी घाट चौराहा और हरकी पैड़ी घाट पर आम गाड़ियों की आवाजाही पूरी तरह से बंद रहेगी. वहीं साधु संतों के शाही स्नान करने तक हरकी पैड़ी पर बना ब्रह्मकुंड आम लोगों के लिए बंद रहेगा. इस दौरान आम श्रद्धालु आस पास के घाटों पर स्नान कर सकते हैं.

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दिखेगा संतों का शाही अंदाज
शाही स्नान के लिए आने वाले साधु संतों का भी इस दौरान शाही अंदाज दिखेगा. रथों, घोड़ाें और पालकियों पर सवार संत जिस सड़क से भी गुजरेंगे उसकी पहले सफाई की जाएगी. इस दौरान संतों पर हेलिकॉप्टर से फूलों की वर्षा भी की जाएगी. इस दौरान अद्भुत नजारा होगा.

पूरी तरह से तैयार है प्रशासन

तीसरे शाही स्नान को लेकर प्रशासन पूरी तरह से तैयार है. शाही स्नान के लिए सबसे पहले सुबह 8.30 बजे पंचायती श्री निरंजनी अखाड़ा स्नान के लिए निकलेगा. शंकराचार्य चौक से चंडीघाट होते हुए साधु-संत हरकी पैड़ी के ब्रह्मकुंड पहुंचेंगे. जहां सबसे पहले मां गंगा की आरती होगी और इसके बाद स्नान का सिलसिला शुरू होगा. हर अखाड़े को स्नान के लिए तकरीबन 20 से 30 मिनट का समय दिया गया है.



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ऐसा रहेगा स्नान का सिलसिला

शाही स्ननान में सबसे पहला स्नान निरंजनी अखाड़ा करेगा. इसी अखाड़े के साथ आनंद अखाड़े से जुड़े संत भी स्नान करेंगे. दोनों अखाड़े 30 मिनट कर ब्रह्मकुंड में स्नान करेंगे. सुबह 10:50 से 11:20 बजे तकनिरंजनी अखाड़े के बाद जूना अखाड़ा स्नान करेगा. इसी अखाड़े के साथ अग्नि, आह्वाहन और किन्रर अखाड़े से जुड़े संत भी स्नान करेंगे. इसके बाद 11:50 से 12:20 बजे तक परंपरा है कि एक अखाड़े के स्नान के बाद ब्रह्मकुंड के घाट की धुलाई कर सफाई कराई जाती है. तभी दूसरा अखाड़ा स्नान के लिए आता है. निरंजनी और जूना दो बड़े अखाड़ों के स्नान के बाद बारी होगी महानिर्वाणी अखाड़े की. जिसके संत 11.50 से 12.20 बजे तक स्नान करेंगे. दोपहर 12:40 से 1:30 बजे तक तीन बड़े अखाड़ों के स्नान के बाद मेला प्रशासन फिर से ब्रह्मकुंड के आस-पास की धुलाई कर सफाई करेगा. इसके बाद निर्मोही, दिगंबर और निर्वाणी अणि अखाड़े के संत 50 मिनट तक ब्रह्मकुंड में स्नान करेंगे. दोपहर 2:50 से शाम 4:55  बजे तक अणि अखाड़ों के स्नान के बाद बारी होगी पंचायती बड़ा उदासीन और पंचायती नया उदासीन अखाड़ा की. दोनों अखाड़े तकरीबन आधे-आधे के गैप में एक घंटे तक ब्रह्मकुंड में आस्था की डुबकी लगाएंगे. शाम 5 से 5:30 बजे तक ​​महाकुंभ पर पड़ने वाली बैसाखी मेष सक्रांति के मौके पर अंत में शाही स्नान की बारी होगी सिख संतों और गुरुग्रंथ साहिब को मानने वाले श्री निर्मल अखाड़े की है. जो साढ़े पांच बजे ब्रह्मकुंड में स्नान कर अपनी छावनी के लिए प्रस्थान करेगा.
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