इस बार फुल प्रूफ़ होगा कुंभ का प्लान... आसमान से ज़मीन का चप्पा-चप्पा नापेगा यूसैक
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इस बार फुल प्रूफ़ होगा कुंभ का प्लान... आसमान से ज़मीन का चप्पा-चप्पा नापेगा यूसैक
शिवरात्रि पर गंगाजल के स्टाल लगाएगा डाक विभाग (फ़ाइल फ़ोटो)

करोड़ों लोगों के लिए4 महीने के लिए बसने वाले शहर का नक्शा बनाना बड़ी चुनौती है.

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हरिद्वार में 2021 में होने वाले महाकुंभ के लिए अब एक साल से भी कम काम समय बचा है. इस बार मेले में पिछली बार के मुकाबले दोगुने यानी 15 करोड़ लोगों के पहुंचने की संभावना है. इसे देखते हुए मेला क्षेत्र का भी विस्तार कर इसे दोगुना कर दिया गया है. इतनी बड़ी संख्या में आने वाले लोगों की सुरक्षित आवाजाही, गंगा में स्नान, उनके रहने की व्यवस्था की जानी है और 4 महीने के लिए बसने वाले इस शहर का नक्शा बनाना बड़ी चुनौती है. इस बार उत्तराखंड इस काम में सैटेलाइट की मदद लेने जा रहा है.

यूसैक की मदद

12 साल बाद पड़ने वाला महाकुंभ संभवतः देश का सबसे बड़ा मेला या आयोजन होता है. यह आयोजन किसी के लिए भी बड़ी चुनौती होता है और उत्तराखंड जैसे छोटे राज्य के लिए तो यह और भी बड़ी चुनौती है. दरअसल अपनी आबादी के 12-13 गुना आबादी को चार महीने के एक निश्चित समय के लिए छोटे से इलाके में संजो कर रखने के लिए विस्तृत योजना और इसके सटीक क्रियान्वयन की ज़रूरत है. इसलिए उत्तराखंड सरकार ने इसमें उत्तराखंड अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र की मदद लेने का फ़ैसला किया है.



शासन स्तर से हरिद्वार महाकुंभ 2021 की तैयारियों में शामिल होने के लिए हरी झंडी मिलने के बाद यूसैक ने इसकी योजना बनानी शुरु कर दी है. यूसैक के निदेशक प्रोफ़ेसर एमपीएस बिष्ट बताते हैं कि यूसैक ने कुंभ मेले का नक्शा बनाने की तैयारी शुरु कर दी है. यूसैक की वैज्ञानिक डॉक्टर सुषमा गैरोला और प्रोग्रामर हेमंत बिष्ट इस काम में जुट गए हैं.



चप्पा-चप्पा नपेगा

प्रोफ़ेसर बिष्ट बताते हैं कि इस बार महाकुंभ के लिए बसने वाले शहर का नक्शा पिन-पॉएंटेड बनेगा. इसके लिए सैटेलाइट की मदद तो ली ही जाएगी, ज़मीन पर ग्राउंड कंट्रोल पॉएंट्स (GCP) और ड्रोन की मदद से चप्पा-चप्पा नापा जाएगा. जीसीपी और ड्रोन्स की मदद से जो कुंभ मेला क्षेत्र का थ्रीडी मैप तैयार किया जा सकता है. इसमें कुंभ मेला प्रशासन की आवश्यकतानुसार सभी चीज़ों का प्रावधान किया जाएगा.

प्रोफ़ेसर बिष्ट बताते हैं कि भारत अंतरिक्ष विज्ञान के एलीट क्लब में शामिल है. भारत उन चंद देशों में शामिल है जो सैटेलाइट की मदद से ज़मीन पर 0.50 मीटर तक की तस्वीर ले सकता है. उत्तराखंड के दुरूह भौगोलिक इलाकों के लिए यह विज्ञान का वरदान है. यूसैक सैटेलाइट इमेजिंग समेत ग्राउंड वर्क का इस्तेमाल इस बार के कुंभ को सुरक्षित, सुविधाजनक और शानदार बनाने के लिए करने जा रहा है.

 

हर आदमी पर नज़र 

सैटेलाइट इमेजिंग और ज़मीन पर एकदम सही जगह पर लगे सीसीटीवी, जीसीपी और ड्रोन के नेटवर्क की मदद से इस बार महाकुंभ में आने वाले यात्रियों की सही संख्या का पता लगाया जा सकेगा. सैटेलाइट की मदद से यूसैक कुंभ क्षेत्र में आने वालों लोगों के फ़्लो पर भी नज़र रख सकेगा और इससे क्राउड कंट्रोल में बहुत मदद मिलेगी. यह जानकारी कुंभ में अक्सर पैदा हो जाने वाली भगदड़ जैसी स्थिति से भी बचाएगी.

सैटेलाइट की मदद से इंसान ही नहीं नदी में पानी के फ़्लो पर भी नज़र रखी जाएगी और इससे गंगा में पवित्र स्नान करने वालों की संख्या में कमी-बढ़ोत्तरी की जा सकती है. अगर किसी प्राकृतिक घटना की वजह से पानी का फ़्लो अचानक बढ़ जाता है तो समय पर चेतावनी कई जानें बचा सकती है.

ये भी हो सकते हैं फ़ायदे

प्रोफ़ेसर बिष्ट कहते हैं कि अगर सरकार और कुंभ प्रशासन चाहे तो यूसैक कुंभ के लिए हो रहे निर्माण कार्यों पर भी नज़र रख सकता है. सैटेलाइट की मदद से यह पता चल सकता है कोई काम किस समय शुरु हुआ और कितने समय में ख़त्म हुआ यानी कि रोज़ की प्रगति पर नज़र रखी जा सकती है. इससे हज़ारों करोड़ रुपये के निर्माण कार्यों में पारदर्शिता आएगी और भ्रष्टाचार की आशंका ख़त्म हो जाएगी.

यूसैक जब कुंभ क्षेत्र का नक्शा बनाने के लिए थ्रीडी मैप बनाएगा तो उससे ज़मीन पर हुए निर्माण और काग़ज़ों में दिख रहे हिसाब-किताब में फ़र्क भी दर्ज हो जाएगा. अब यह स्थानीय प्रशासन पर है कि वह इस जानकारी का इस्तेमाल कैसे करता है.

प्रोफ़ेसर बिष्ट कहते हैं कि अंतरिक्ष विज्ञान एक बेहद शक्तिशाली टूल है. अब यह आप पर निर्भर करता है कि आप इसका इस्तेमाल क्या हासिल करने के लिए करना चाहते हैं.

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