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हरिद्वार में है चमत्कारी तिलभाण्डेश्वर महादेव मंदिर, तिल-तिल घटता और बढ़ता है स्वयंभू शिवलिंग

Tilbhandeshwar mahadev mandir: मंदिर के पुजारी विनोद चंद शर्मा ने बताया कि तिलभाण्डेश्वर महादेव शिवलिंग हर महीने में 15 ...अधिक पढ़ें

    रिपोर्ट: ओम प्रयास

    हरिद्वार. उत्तराखंड के हरिद्वार में कई ऐसे मंदिर हैं, जो आज भी अपने भीतर तमाम रहस्य समेटे हुए हैं. आज हम आपको धर्मनगरी के जिस मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, उसमें स्वयंभू शिवलिंग है, जो हर महीने 15 दिन बढ़ता है और अगले 15 दिन घटता है. हरिद्वार की उपनगरी दक्ष नगरी कनखल में स्थित तिलभाण्डेश्वर महादेव मंदिर (Tilbhandeshwar Temple in Haridwar) भगवान शंकर को समर्पित है. कनखल में सती घाट पर गंगा किनारे बने तिलभाण्डेश्वर मंदिर की काफी मान्यता है. यहां दूर-दूर से श्रद्धालु मनोकामना लेकर आते हैं और उनका विश्वास है कि भोलेनाथ ने आज तक किसी को खाली हाथ नहीं भेजा है.

    मंदिर के पुजारी विनोद चंद शर्मा ने बताया कि तिलभाण्डेश्वर महादेव शिवलिंग हर महीने में 15 दिन तिल-तिल कर बढ़ता है और फिर 15 ही दिन तिल-तिल कर घटता है. तिलभाण्डेश्वर मंदिर के बारे में कहा जाता है कि जब माता सती ने हवन यज्ञ में कूदकर अपने शरीर का त्याग किया था, तो भगवान शंकर राजा दक्ष पर क्रोधित होकर कनखल आए थे. जब महादेव कनखल आए थे, तो उनका विशाल महाकाल रूप था, जिसे महादेव ने सती घाट पर गंगा किनारे छोटा किया था.

    40 दिन लगातार मंदिर में जल चढ़ाने से पूरी होती है मनोकामना
    तिलभाण्डेश्वरमहादेव मंदिर में स्थित शिवलिंग स्वयंभू शिवलिंग है. पुजारी विनोद शर्मा यह शिवलिंग हर महीने की शुक्ल पक्ष से 15 दिन तक तिल भर बढ़ता है और कृष्ण पक्ष से 15 दिन तक तिल भर घटता है. पुजारी बताते हैं कि जो भी श्रद्धालु अपनी परेशानियों को लेकर इस मंदिर में आता है, भगवान के समक्ष सच्चे मन से प्रार्थना करता है, उसके दुख तिल-तिल भर घटने शुरू हो जाते हैं. पुजारी बताते हैं कि 40 दिन लगातार मंदिर में जल चढ़ाने और पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. मंदिर के कपाट सुबह 5 बजे खुलते हैं और सायं 7 बजे आरती के साथ बंद होते हैं.

    भगवान शंकर की आरती

    जय शिव ओंकारा ॐ जय शिव ओंकारा ।
    ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा ॥ ॐ जय शिव…॥
    एकानन चतुरानन पंचानन राजे ।हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे ॥ ॐ जय शिव…॥
    दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे।त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे ॥ ॐ जय शिव…॥
    अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी ।चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी ॥ ॐ जय शिव…॥
    श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे ।सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे ॥ ॐ जय शिव…॥
    कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता ।जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता ॥ ॐ जय शिव…॥
    ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका ।प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका ॥ ॐ जय शिव…॥
    काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी ।नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी ॥ ॐ जय शिव…॥
    त्रिगुण शिवजीकी आरती जो कोई नर गावे ।कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे ॥ ॐ जय शिव…॥
    जय शिव ओंकारा हर ॐ शिव ओंकारा|
    ब्रह्मा विष्णु सदाशिव अद्धांगी धारा॥ ॐ जय शिव ओंकारा…॥

    (NOTE: इस खबर में दी गई सभी जानकारियां और तथ्य मान्यताओं के आधार पर हैं. NEWS18 LOCAL किसी भी तथ्य की पुष्टि नहीं करता है.)

    Tags: Haridwar news, Uttarakhand news

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