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मंदिर-मस्जिद के लाउडस्पीकर की तेज आवाज के खिलाफ उत्तराखंड HC पहुंचे तालिब और अमित, जानें फिर क्‍या हुआ?

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने 8 अप्रैल को हरिद्वार प्रशासन को लाउडस्‍पीकर से संबंधित फैसला लेने का आदेश दिया था.

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने 8 अप्रैल को हरिद्वार प्रशासन को लाउडस्‍पीकर से संबंधित फैसला लेने का आदेश दिया था.

Uttarakhand High Court: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने हरिद्वार जिले के धनपुरा गांव की तीन मस्जिदों और दो मंदिरों के लाउडस्पीकरों से हो रहे ध्वनि प्रदूषण को रोकने का आदेश जिला प्रशासन को दिया है. वहीं, ध्वनि प्रदूषण को रोकने के लिए गांव के ही 72 साल के तालिब हसन और 34 साल के अमित कुमार ने हाईकोर्ट में याचिका दी थी.

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पुलकित शुक्ला
हरिद्वार. देशभर में इन दिनों मंदिर, मस्जिद और लाउडस्पीकर को लेकर बहस छिड़ी हुई है. इस बीच दोनों ही पक्षों की ओर से ईश्वर की इबादत में मंदिरों और मस्जिदों में लाउडस्पीकर बजाने या ना बजाने को लेकर तर्क दिए जा रहे हैं. ऐसे में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने हरिद्वार जिले के धनपुरा गांव की तीन मस्जिदों और दो मंदिरों के लाउडस्पीकरों से हो रहे ध्वनि प्रदूषण को रोकने का आदेश हरिद्वार जिला प्रशासन को दिया है.

दरअसल हरिद्वार जिले के धनपुरा गांव में रहने वाले 72 साल के तालिब हसन और 34 साल के अमित कुमार यूं तो अलग-अलग समुदाय के हैं, लेकिन बुजुर्गों के स्वास्थ्य और बच्चों की शिक्षा को लेकर दोनों एक जैसी राय रखते हैं. तालिब हसन और अमित कुमार का कहना है कि उनके गांव में मस्जिद और मंदिरों के लाउडस्पीकर से पैदा होता ध्वनि प्रदूषण बुजुर्गों के स्वास्थ्य और बच्चों के पढ़ाई लिखाई के लिए ठीक नहीं है. इस वजह से दोनों ने उत्तराखंड हाईकोर्ट में इसके लिए जनहित याचिका दायर की थी.

तालिब हसन और अमित कुमार ने दिए ये तर्क
तालिब हसन ने कहा कि दो साल पहले तक गांव में सबकुछ ठीक था, लेकिन अब मस्जिद और मंदिर के लाउडस्‍पीकर बुजुर्गों और बच्‍चों को काफी नुकसान पहुंचा रहे हैं. हैरानी की बात है कि दोनों जगह लाउडस्‍पीकर कभी तेज आवाज के साथ चल जाते हैं. वहीं, अमित कुमार ने कहा कि मैंने मस्जिद और मंदिर के संचालकों से कहा कि बीमार चल रहे बुजुर्गों के साथ बच्‍चों की पढ़ाई लिखाई पर तेज आवाज का असर पड़ रहा है. इस बीच उन्‍होंने आवाज कम करने बजाए उसे बढ़ा दिया और मेरे घर की तरफ लाउडस्‍पीकर का मुंह मोड़ दिया. इसके बाद हमने हाईकोर्ट जाने का फैसला किया था.

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने 8 अप्रैल को फैसला सुनाया
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए लिखा है कि किसी भी धार्मिक स्थल पर 5 डेसिबल से ज्यादा ध्वनि प्रदूषण नहीं होना चाहिए. अगर धार्मिक स्थलों में इससे ज्यादा ध्वनि प्रदूषण होता है तो उसे रोकना प्रशासन और सरकार की जिम्मेदारी होगी. वहीं, हरिद्वार के डीएम विनय शंकर पांडे जल्द से जल्द कोर्ट के आदेश का पालन कराने की बात कह रहे हैं

बहरहाल, देशभर में चल रही मंदिर, मस्जिद और लाउडस्पीकर की बहस के बीच उत्तराखंड हाईकोर्ट का हरिद्वार जिले के धनपुरा गांव के मंदिर और मस्जिद दोनों से लाउडस्पीकर हटाने या आवाज नियंत्रित कराने का फैसला काफी अहम माना जा रहा है. अब देखने वाली बात होगी कि प्रशासन लोगों के विरोध के बिना धार्मिक स्थलों से ध्वनि प्रदूषण कम करवा पाता है या नहीं.

Tags: Haridwar news, Haridwar Police, Uttarakhand high court

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