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एएनएम के कॉन्‍ट्रेक्‍ट खत्‍म होने से प्रदेश में स्‍वास्‍थ्‍य सेवाएं बदहाल

एएनएम के कॉन्‍ट्रेक्‍ट खत्‍म होने से प्रदेश में स्‍वास्‍थ्‍य सेवाएं बदहाल

संविदा पर तैनात 12 डॉक्टरों और 14 एएनएम का कॉन्‍ट्रेक्ट एक साथ खत्म होने से देहरादून जिले में पहाड़ से लेकर मैदान तक स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई हैं. जौनसार बावर के सात अस्पतालों में ताला लगा गया है. एएनएम नहीं होने से 14 मातृ शिशु केन्द्रों से भी महिलाओं और बच्चों को निराश लौटना पड़ रहा है.

संविदा पर तैनात 12 डॉक्टरों और 14 एएनएम का कॉन्‍ट्रेक्ट एक साथ खत्म होने से देहरादून जिले में पहाड़ से लेकर मैदान तक स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई हैं. जौनसार बावर के सात अस्पतालों में ताला लगा गया है. एएनएम नहीं होने से 14 मातृ शिशु केन्द्रों से भी महिलाओं और बच्चों को निराश लौटना पड़ रहा है.

संविदा पर तैनात 12 डॉक्टरों और 14 एएनएम का कॉन्‍ट्रेक्ट एक साथ खत्म होने से देहरादून जिले में पहाड़ से लेकर मैदान तक स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई हैं. जौनसार बावर के सात अस्पतालों में ताला लगा गया है. एएनएम नहीं होने से 14 मातृ शिशु केन्द्रों से भी महिलाओं और बच्चों को निराश लौटना पड़ रहा है.

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    संविदा पर तैनात 12 डॉक्टरों और 14 एएनएम का कॉन्‍ट्रेक्ट एक साथ खत्म होने से देहरादून जिले में पहाड़ से लेकर मैदान तक स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई हैं. जौनसार बावर के सात अस्पतालों में ताला लगा गया है. एएनएम नहीं होने से 14 मातृ शिशु केन्द्रों से भी महिलाओं और बच्चों को निराश लौटना पड़ रहा है.

    बची कसर चार फार्मासिस्टों के चारधाम ड्यूटी पर जाने से पूरी हो गई है. 10 हजार से भी अधिक की आबादी वाले पहाड़ी क्षेत्र में ना तो लोगों को इलाज मिल पा रहा है और ना ही टीकाकरण ही हो पा रहा है. छोटी-मोटी बीमारी के इलाज के लिए भी लोगों को 30 से 40 किलोमीटर तक की दौड़ लगानी पड़ रही है.

    संविदा पर तैनात डॉक्टरों और एएनएम के कॉन्‍ट्रेक्‍ट 30 अप्रैल को खत्म हो गया था, लेकिन प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग ने अब तक कुछ नहीं किया. वहीं, सीएचसी सहसपुर का भी हाल बुरा है. यहां पर तैनात चार डॉक्टरों का भी कॉन्‍ट्रेक्ट खत्म हो चुका है, जिसके चलते मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.

    वहीं जौनसार बावर और सहसपुर में स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल होने से अधिकांश मरीज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र विकासनगर की ओर रुख कर रहे हैं. डॉक्‍टर नरेन्द्र चौहान ने बताया कि मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है. हमारा प्रयास है कि मरीजों को ठीक प्रकार से इलाज मिल सके. स्टाफ की कमी के चलते कुछ मरीजों को देहरादून भी रेफर करना पड़ रहा है.

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