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मार्च में 33 साल बाद हुई भारी बारिश, तबाह हुई फसलें

मार्च में 33 साल बाद हुई भारी बारिश, तबाह हुई फसलें

मार्च के महीने में 33 साल के बाद इस तरह से बारिश हुई है. दो मार्च से लेकर रुक-रुक कर हो रही बारिश का सिलसिला जारी है,जिससे किसानों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है.

मार्च के महीने में 33 साल के बाद इस तरह से बारिश हुई है. दो मार्च से लेकर रुक-रुक कर हो रही बारिश का सिलसिला जारी है,जिससे किसानों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है.

मार्च के महीने में 33 साल के बाद इस तरह से बारिश हुई है. दो मार्च से लेकर रुक-रुक कर हो रही बारिश का सिलसिला जारी है,जिससे किसानों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है.

मार्च के महीने में 33 साल के बाद इस तरह से बारिश हुई है. दो मार्च से लेकर रुक-रुक कर हो रही बारिश का सिलसिला जारी है,जिससे किसानों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है.

बारिश की वजह से फसलों को भारी नुकसान हुआ है. 2 मार्च को पूरे प्रदेश में भारी बारिश हुई थी, जिससे गेहूं, जौ, मटर, दलहन की फसलों को काफी नुकसान हुआ था. इस बारिश की वजह से फसलों को हो रहे नुकसान पर सरकार ने एक सर्वे किया. इस सर्वे में 25 फीसदी फसलों को नुकसान होने की बात सामने आई थी, लेकिन पूर मार्च महीने में रुक-रुक बारिश का सिलसिला जारी रहा.

मार्च महीने के आखिरी दिनों में एक बार फिर जोरदार बारिश हुई, जिससे गेहूं की फसलों को काफी नुकसान हुआ है. गेहूं की फसल पकने वाली है, ऐसे में बारिश होने से फसलों को काफी नुकसान पहुंच रहा है. बताया जा रहा है कि प्रदेश में 50 फीसदी से 100 फीसदी फसलों को नुकसान हुआ है.

इतना ही नहीं आम, सेब, आडू, लीची, खुबानी जैसे फलों को भारी बारिश से नुकसान हुआ है. उत्तरकाशी, चमोली जैसे जिलों में सेब के फलों का उत्पादन होता है. ऐसे में फलों के उत्पादकों की मुश्किलें बढ गई हैं. वही मौसम विभाग का कहना है कि 2 अप्रैल से एक बार फिर मौसम करवट बदलेगा और कई स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है.

कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि जिस तरह से बार-बार बारिश हो रही है. इससे समय से फसलों के पकने में और वक्त लग सकता है. साथ ही फसलों में कीड़े भी लग सकते हैं. मुख्यमंत्री हरीश का कहना है कि सरकार ने किसानों को मुआवजा देने के लिए 10 करोड़ रुपए के फंड का प्रावधान किया है.

साथ ही मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से इस बारिश से हुए नुकसान की भरपाई के लिए अतिरिक्त धनराशि देने की मांग की है. उनका कहना है कि इस बारिश से हुए नुकसान को दैवीय आपदाप राहत की तर्ज पर भरपाई होनी चाहिए.

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