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भूकंपरोधी तकनीक से भवन निर्माण हो तो रहेंगे सुरक्षित

भूकंपरोधी तकनीक से भवन निर्माण हो तो रहेंगे सुरक्षित

नेपाल में आए भयावह भूकंप से हुई त्रासदी ने एक बार फिर ये सवाल खड़ा कर दिया है कि भूकंप के मद्देनजर हमारे शहर कितने सुरक्षित हैं. उत्तराखंड राज्य भूंकप के दृष्टिकोण से काफी संवेदनशील है. राज्य के मैदानी इलाके जिनमें राजधानी देहरादून भी शामिल है, जोन चार में आता है. जबकि पर्वतीय इलाके जोन पांच में आते हैं.

नेपाल में आए भयावह भूकंप से हुई त्रासदी ने एक बार फिर ये सवाल खड़ा कर दिया है कि भूकंप के मद्देनजर हमारे शहर कितने सुरक्षित हैं. उत्तराखंड राज्य भूंकप के दृष्टिकोण से काफी संवेदनशील है. राज्य के मैदानी इलाके जिनमें राजधानी देहरादून भी शामिल है, जोन चार में आता है. जबकि पर्वतीय इलाके जोन पांच में आते हैं.

नेपाल में आए भयावह भूकंप से हुई त्रासदी ने एक बार फिर ये सवाल खड़ा कर दिया है कि भूकंप के मद्देनजर हमारे शहर कितने सुरक्षित हैं. उत्तराखंड राज्य भूंकप के दृष्टिकोण से काफी संवेदनशील है. राज्य के मैदानी इलाके जिनमें राजधानी देहरादून भी शामिल है, जोन चार में आता है. जबकि पर्वतीय इलाके जोन पांच में आते हैं.

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    नेपाल में आए भयावह भूकंप से हुई त्रासदी ने एक बार फिर ये सवाल खड़ा कर दिया है कि भूकंप के मद्देनजर हमारे शहर कितने सुरक्षित हैं. उत्तराखंड राज्य भूंकप के दृष्टिकोण से काफी संवेदनशील है. राज्य के मैदानी इलाके जिनमें राजधानी देहरादून भी शामिल है, जोन चार में आता है. जबकि पर्वतीय इलाके जोन पांच में आते हैं.

    ऐसे में ये बेहद जरुरी हो जाता है कि राज्य में भवन निर्माण भूकंप को ध्यान में रखते हुए किया जाए. इसके लिए बाकायदा नियम भी बने हुए हैं. छोटे भवनों के लिए विकास प्राधिकरणों में तैनात इंजीनियर भवनों के स्ट्रक्चर की जांच करते हैं. ग्रुप हाउसिंग या मल्टीस्टोरी बिल्डिंग के लिए नेशनल बिल्डिंग कोड ऑफ इंडिया के भाग चार के प्रावधानों का पालन करना होता है.

    इसके अनुसार भवन निर्माण से पहले भारत सरकार द्वारा इंपैनल्ड स्ट्रक्चरल इंजीनियर से भवन के भूकंपरोधी होने का प्रमाणपत्र हासिल करना जरुरी होता है. मसूरी दून विकास प्राधिकरण के सचिव के अनुसार इन मानकों के अनुसार निर्माण कराकर भवन को भूकंपरोधी बनाया जा सकता है. वहीं आर्किटेक्ट्स का कहना है कि भूकंपरोधी तकनीक के अनुसार अगर भवन बनाए जाएं तो कितनी भी तीव्रता का भूकंप हो, भवन सुरक्षित रहेंगे.

    आर्किटेक्ट डीएस राणा के अनुसार भूकंपरोधी तकनीक में पहले मिट्टी के नमूने की जांच की जाती है कि मिट्टी में भार सहने की कितनी क्षमता है. मिट्टी की क्षमता के अनुसार ही स्ट्रक्चर डिजाइन किया जाता है, जो भवन को भूकंप से पूरी तरह सुरक्षित बना सकता है.

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