अनशन कर रहे प्रोफेसर जीडी अग्रवाल की मौत के बाद सरकार बोली- लगभग सारी मांगें मानी

स्वामी सानंद ने अपना शरीर एम्स ऋषिकेश के चिकित्सा शिक्षा के छात्रों के उपयोग के लिए दान कर दिया था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वामी सानंद के निधन पर दुख व्यक्त किया.

News18Hindi
Updated: October 12, 2018, 9:21 AM IST
अनशन कर रहे प्रोफेसर जीडी अग्रवाल की मौत के बाद सरकार बोली- लगभग सारी मांगें मानी
स्वामी सानंद के बुधवार को जल त्यागने के बाद प्रशासन ने उनको जबरन ऋषिकेश एम्स में भर्ती कराया था.
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Updated: October 12, 2018, 9:21 AM IST
गंगा नदी के संरक्षण को लेकर पिछले 111 दिनों से अनशन कर रहे मशहूर पर्यावरणविद प्रोफेसर जीडी अग्रवाल उर्फ स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद का गुरुवार दोपहर दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया. वह 86 साल के थे.

हरिद्वार स्थित मातृ सदन में पिछले 22 जून से अनशन कर रहे स्वामी सानंद के बुधवार को जल त्यागने के बाद प्रशासन ने उन्हें ऋषिकेश एम्स में भर्ती कराया था. हरिद्वार जिला प्रशासन ने उनके आश्रम परिसर के चारों ओर धारा 144 लगाकर उन्हें बुधवार को जबरन उठा कर एम्स में भर्ती करा दिया था.

सानंद ने अपने हाथों से लिखे अंतिम प्रेस रिलीज में बताया था कि उनके खून में पोटेशियम की मात्रा खतरनाक रूप से कम हो चुकी है. इसीलिए उन्होंने डॉक्टरों की सलाह पर 500 एमएल तरल मुंह एयर ड्रिप के जरिये लेने पर अपनी सहमति दे दी थी.

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ऋषिकेश स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निदेशक डॉ रविकांत ने बताया कि स्वामी सानंद ने दोपहर यहां संस्थान में अंतिम सांस ली. उन्होंने बताया कि गुरुवार दोपहर स्वामी सानंद को दिल का दौरा पड़ा और काफी कोशिश के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका.

डॉ. रविकांत ने बताया कि स्वामी सानंद को हाई ब्लड प्रेशर, हर्निया के साथ-साथ कोरोनरी आर्टरी रोग भी था तथा अनशन के कारण उनकी सेहत और बिगड़ गयी थी. उनके शरीर में जरूरी पोटेशियम की मात्रा 3.5 से घटकर 1.7 ही रह गई थी. उन्होंने बताया कि स्वामी सानंद ने अपना शरीर एम्स ऋषिकेश के चिकित्सा शिक्षा के छात्रों के उपयोग के लिए दान कर दिया था.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वामी सानंद के निधन पर दुख व्यक्त करते हुए ट्वीट किया कि शिक्षा, पर्यावरण और खास गंगा के संरक्षण को लेकर उनका जज्बा हमेशा याद किया जाएगा.
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गौरतलब है कि इससे पहले केंद्र सरकार की ओर से आश्वासन लेकर पहुंचे हरिद्वार सांसद रमेश पोखरियाल निशंक के अनशन तोड़ने के अनुरोध को उन्होंने ठुकरा दिया था. वहीं सानंद के निधन पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्र ने कहा कि आग्रवाल की लगभग सारी मांगें मान ली गई थी. केंद्रीय जल संसाधन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा, 'हमने (गंगा की सफाई को लेकर) उनकी लगभग सारी मांगें मान ली थी. उनकी एक मांग पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित करने को लेकर था और हमने इस पर नोटिफिकेशन जारी किया था.'

इस बीच, गंगा संरक्षण को लेकर स्वामी सानंद के प्राण त्यागने के बाद 'मातृसदन' के प्रमुख परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद ने उनके निधन को हत्या करार दिया है और उनकी मौत की उच्च्स्तरीय जांच की मांग की है.

बता दें कि आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर रहे स्वामी सानंद वर्ष 2008 में उस वक्त चर्चा में आए थे, जब वह उत्तरकाशी में मणिकर्णिका घाट पर भागीरथी पर बन रही पनबिजली परियोजनाओं को तत्काल बंद करने की मांग को लेकर अनशन पर बैठे थे. उन्होंने नौ सितंबर को घोषणा की थी कि वह अक्टूबर में जल त्याग देंगे, जिसके बाद 11 सितंबर को नेशनल मिशन फॉर गंगा क्लीनिंग के निदेशक ने उनसे वार्ता की और 13 सितंबर को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने उन्हें समर्थन दिया था.
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