बसंत पंचमी: स्नान के बाद भीगे कपड़ों में घर आने पर होगी धन की बारिश
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बसंत पंचमी: स्नान के बाद भीगे कपड़ों में घर आने पर होगी धन की बारिश

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अर्ध कुम्भ के दो स्नान सकुशल संपन्न हो चुके हैं.

तीसरा और महत्वपूर्ण बसंत पंचमी का स्नान अर्ध कुम्भ के दौरान विशेष महत्त्व रखता है. इस दिन देवी सरस्वती की पूजा और गंगा स्नान का विशेष महत्त्व है.

बसंत पंचमी में सुबह सात बजे से नौ बजे का समय सर्वोत्तम कहा गया है. इस दिन स्नान से धन, वैभव और ऐष्वर्य की प्राप्ति होती है. इसी दिन सरस्वती जी का जन्मदिन और लक्ष्मी जी लक्ष्मीपति भी बनी थी.



प्रख्यात ज्योतिषाचार्य पंडित प्रतीक मिश्रपुरी के अनुसार माघ अमावस्या के बाद के आठ दिन गुप्त नवरात्र होते हैं जिसमे पंचमी तिथि सर्वाधिक महत्वपूर्ण होती है इसी दिन माँ सरस्वती का जन्मदिन भी होता है.
इस दिन गंगा स्नान से बल बुद्धि विद्या और लक्ष्मी की प्राप्ति होती है. इसी दिन मां लक्ष्मी लक्ष्मीपति बनी थी. इस दिन विशेष ध्यान रखने वाली बात ये है की गंगा स्नान के वाद कपडे वहीँ न निचोड़ें उसके साथ आने वाली रेट को घर लाने से लक्ष्मी की प्राप्ति होती है.

बसंत पंचमी में सुबह सात बजे से नौ बजे का स्नान करने का विशेष महत्त्व है. इस दिन स्नान करने से लक्ष्मी ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है. इस दिन लक्ष्मी और श्री सूक्त का पाठ गंगा किनारे बैठकर करना चाहिए.

इस दिन गंगा स्नान से कम बुद्धि के बच्चों को बुद्धि, परिक्षा में लाभ मिलता है. इस दिन गंगा जल को घर लेकर आना चाहिए. पंडित प्रतीक मिश्रपुरी के अनुसार मेष सिंह और वृश्चिक राशि वाले लाल रंग के वस्त्र पहन पूरब की ओर मुख कर स्नान करें. लाल डोरी और चावल को गंगा में अर्पण करें.

ज्योतिशचर्यों के अनुसार अर्ध कुम्भ भृस्पति के सिंह राशि में प्रवेश होने से होता है. इसमें पांचवी राशि सिंह राशि है और बसंत पंचमी है. ये पांच-पांच का योग अपने में विशेष है. ये योग मोक्ष अर्थ काम को प्रदान करने वाला है.
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