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28 साल बाद भी नहीं शुरू हो पाई लखवाड़ और व्यासी जल विद्युत परियोजना

28 साल बाद भी नहीं शुरू हो पाई लखवाड़ और व्यासी जल विद्युत परियोजना

उत्‍तराखंड को ऊर्जा प्रदेश बनाने के लिए प्रयास तो बहुत किए गए पर यह जमीन पर नहीं उतर पाई। प्रदेश की अधिकांश जल विद्युत परियोजनाएं केंद्र की एनओसी नहीं मिलने के चलते अटकी है। कुछ परियोजनाओं में स्थानीय लोग और कंपनी प्रबंधन के विवाद के चलते अधर में लटकी हुई हैं। कुछ यही हाल है लखवाड़़ और व्यासी जल विद्युत परियोजनाओं का।

उत्‍तराखंड को ऊर्जा प्रदेश बनाने के लिए प्रयास तो बहुत किए गए पर यह जमीन पर नहीं उतर पाई। प्रदेश की अधिकांश जल विद्युत परियोजनाएं केंद्र की एनओसी नहीं मिलने के चलते अटकी है। कुछ परियोजनाओं में स्थानीय लोग और कंपनी प्रबंधन के विवाद के चलते अधर में लटकी हुई हैं। कुछ यही हाल है लखवाड़़ और व्यासी जल विद्युत परियोजनाओं का।

उत्‍तराखंड को ऊर्जा प्रदेश बनाने के लिए प्रयास तो बहुत किए गए पर यह जमीन पर नहीं उतर पाई। प्रदेश की अधिकांश जल विद्युत परियोजनाएं केंद्र की एनओसी नहीं मिलने के चलते अटकी है। कुछ परियोजनाओं में स्थानीय लोग और कंपनी प्रबंधन के विवाद के चलते अधर में लटकी हुई हैं। कुछ यही हाल है लखवाड़़ और व्यासी जल विद्युत परियोजनाओं का।

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उत्‍तराखंड को ऊर्जा प्रदेश बनाने के लिए प्रयास तो बहुत किए गए पर यह जमीन पर नहीं उतर पाई। प्रदेश की अधिकांश जल विद्युत परियोजनाएं केंद्र की एनओसी नहीं मिलने के चलते अटकी है। कुछ परियोजनाओं में स्थानीय लोग और कंपनी प्रबंधन के विवाद के चलते अधर में लटकी हुई हैं। कुछ यही हाल है लखवाड़़ और व्यासी जल विद्युत परियोजनाओं का।

तीन सौ मेगावाट की लखवाड़ और सौ बीस मेगावाट की व्यासी जल विद्युत परियोजनाओं की नींव तो 1987 में ही रख दी गई थी पर आज तक ये परियोजनाएं पूरी नहीं हो सकी हैं।

1987 में काम शुरू हुआ और 1992 तक चला और 30 प्रतिशत काम भी हुआ। उसके बाद से आज तक दो बार और भूमि पूजन किया गया। एक बार तो प्रदेश के मुख्यमंत्री हरीश रावत भी भूमि पूजन कर चुके हैं पर वास्तविकता तो यही है कि काफी समय से परियोजना में काम कर रहे सभी कर्मचारी और श्रमिक हड़ताल पर हैं और काम पूरी तरह से ठप्प पड़ा है।

परियोजना निर्माण का काम गैमन इंडिया कम्पनी के पास है। शुरू से ही स्थानीय लोग और कंपनी प्रबंधन की नहीं बनी। नौबत यहां तक आ गई कि कंपनी प्रबंधन और स्थानीय लोगों में मारपीट तक हुई, जिसमें दोनों ही पक्षों की तरफ से मुकदमा भी दर्ज हुआ। अब आलम ये है कि बिना अपनी मांगों के पूरा हुए न ही कर्मचारी औऱ श्रमिक काम पर आने को तैयार हैं तो वहीं कंपनी प्रबंधन भी झुकने को तैयार नहीं है।

जब इस गंभीर मसले पर प्रदेश के मुख्यमंत्री हरीश रावत से पूछा गया तो उन्होंने बड़ी ही सहजता से कह दिया कि मामला मेरे संज्ञान में है और जल्द सबकुछ ठीक होगा।

बल्कि वास्तविकता तो यह है कि हर साल परियोजना के नाम पर करोड़ों का खर्च दिखाया जा रहा है पर काम तो शुरू ही नहीं हो पा रहा है फिर कैसे क्षेत्र की जनता को राहत मिलेगी और कैसे उत्तराखण्ड बनेगा ऊर्जा प्रदेश।

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Tags: Harish rawat

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