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उत्तराखंड के संगीत से भी था लता मंगेशकर का नाता, इस गढ़वाली गीत को दी थी आवाज

उत्तराखंड के संगीत से भी था लता मंगेशकर का नाता, इस गढ़वाली गीत को दी थी आवाज

उत्तराखंड के गढ़वाली गीत 'मन भरमैगे मेरी सुध -बुध ख्वे गे' को दिए थे लता मंगेशकर ने स्वर.

उत्तराखंड के गढ़वाली गीत 'मन भरमैगे मेरी सुध -बुध ख्वे गे' को दिए थे लता मंगेशकर ने स्वर.

Lata Mangeshkar story: स्वर कोकिला भारत रत्न लता मंगेशकर के निधन से पूरे देश में शोक है. लता मंगेशकर ने जो गाने गाए उन्हें पूरी दुनिया में पसंद किया गया. उनके गीत कई दशकों तक सिरमौर रहे तो उत्तराखंड से भी उनका गहरा नाता रहा है. 1980 में गढ़वाली फिल्म रैबार में उनका 'मन भरमैगे मेरी सुध -बुध ख्वे गे' विशेष रूप से याद किया जाएगा. लता मंगेशकर ने इस गीत के एक एक बोल का अर्थ समझकर चार घंटे में रिकॉर्ड किया था.

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देहरादून. स्वर कोकिला भारत रत्न लता मंगेशकर (Bharat Ratna Lata Mangeshkar) के निधन से पूरे देश में शोक है. लता मंगेशकर ने जो गाने गाए उन्हें पूरी दुनिया में पसंद किया गया. उनके गीत कई दशकों तक सिरमौर रहे तो उत्तराखंड से भी उनका गहरा नाता रहा है. 1980 में गढ़वाली फिल्म रैबार में उनका ‘मन भरमैगे मेरी सुध -बुध ख्वे गे’ विशेष रूप से याद आएगा. उत्तराखंड के संगीत को लता मंगेशकर का यह तोहफा यादगार है.

निर्देशक सोनू पंवार की गढ़वाली फिल्म रैबार में मन भरमेगे गीत को लता मंगेशकर ने गाया था. तकरीब छह मिनट के यह गीत गीत देवी प्रसाद ने बनाया, जबकि बीना रावत और शिवेंद्र रावत ने अभिनय किया था. उस समय इस गीत के लिए लता मंगेशकर ने चार घंटे का समय निकाला और एक एक शब्द का अर्थ समझ कर गाया.

लता मंगेशकर उत्तराखंड के लोक संगीत और लोक कलाकारों को बहुत पसंद करती रही हैं. उत्तराखंड के लोक कलाकार जब भी उनसे मिलने मुंबई गए तो लता जी उन्हें प्रोत्साहित करते हुए उत्तराखंड का हालचाल भी पूछा करती रहीं. निधन की खबर से दुखी लोकगायक नरेंद्र सिंह ने नेगी ने कहा कि मेरा भी मन था कि लता मंगेशकर के साथ गढ़वाली गीत गाऊं, लेकिन मुझे कभी मौका नहीं मिल पाया.

लोकगायक पद्मश्री डा. प्रीतम भरतवाण ने कहा कि लता मंगेशकर ने हजारों गीतों को स्वर देकर पूरी दुनिया को दीवाना बनाया है. उन जैसे कलाकार सदियों नहीं कई सदियों में जन्म लेते हैं. वे स्वरों की सरस्वती स्वरूप थीं. लोक गायिका संगीता ढौंडियाल का कहना है कि मेरा काफी समय से मन था कि मुंबई जाकर उनका आशीर्वाद लूं, लेकिन ये संभव नहीं हो सका. मैंने उन्हीं के गीत से गुनगुनाते हुए गीतों की शुरुआत की. उन्हें सरस्वती की अवतार कहना गलत नहीं होगा.

लोकगायिका कल्पना चौहान ने कहा कि 1984-85 में राजस्थानी कार्यक्रम के रिकार्ड के दौरान मुम्बई स्टूडियो में लता मंगेशकर से उनकी मुलाकात हुई तो उनके विचारों से लगा जैसे वह भी उत्तराखंड से हों. पहाड़ और यहां के लोग के बारे में भी पूछकर उनकी सादगी को सराहा था.

Tags: Lata Mangeshkar, Lata Mangeshkar Garhwali Songs, Lata mangeshkar passed away, Uttarakhand news

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