उत्तराखंड के इस जिले में मंदिरों में नहीं बजता है लाउडस्पीकर, जानें क्या है वजह
Udham-Singh-Nagar News in Hindi

उत्तराखंड के इस जिले में मंदिरों में नहीं बजता है लाउडस्पीकर, जानें क्या है वजह
जिले में सिर्फ खास मौकों पर ही लाउडस्पीकर बजाने की इजाजत दी जाती है. (प्रतीकात्‍मक फोटो)

जिले में स्थित 1100 से ज्यादा मंदिरों या अन्य धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर (Loudspeaker) हटाए गए हैं.

  • Share this:
रुद्रपुर. उत्तराखंड का उधम सिंह नगर जिला (US Nagar) प्रदेश का पहला ऐसा जिला बन गया है, जहां के धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर हटा दिए गए हैं. जिले में स्थित 1100 से ज्यादा मंदिरों या अन्य धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर हटाए गए हैं. ध्वनि प्रदूषण कम करने के लिए जिला प्रशासन के एक अभियान और स्थानीय लोगों के सहयोग से US नगर ने यह अनोखा रिकॉर्ड बना लिया है. हाईकोर्ट ने दो साल पहले इस तरह का एक आदेश जारी किया था, जिसके बाद प्रशासन ने जिले के धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर हटाने का अभियान शुरू किया. प्रशासन के इस अभियान के तहत बिना किसी सख्ती के जिले के मंदिरों या अन्य स्थलों से लाउडस्पीकर उतार लिए गए.

उधम सिंह नगर के एसएसपी बरिंदरजीत सिंह ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि जिले में कार्यरत कई धार्मिक संगठनों के सदस्यों के साथ लगातार बैठकों के बाद प्रशासन ने इस मुहिम को अंजाम तक पहुंचाया है. अखबार की एक रिपोर्ट के मुताबिक एसएसपी ने बताया कि धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर हटाने में पुलिस-प्रशासन को न तो सख्ती करनी पड़ी और न ही पुलिसबल का प्रयोग ही करना पड़ा. दरअसल, हाईकोर्ट के आदेश के बाद लोगों ने खुद हमारी बातों को समझा और उस पर अमल किया. इसी का सुखद परिणाम है कि आज 1100 से ज्यादा स्थलों से लाउडस्पीकर हटाने में हम कामयाब हो पाए हैं.

2018 में दिया था आदेश
नैनीताल हाईकोर्ट ने दो साल पहले 2018 में ध्वनि प्रदूषण कम करने के मद्देनजर लाउडस्पीकर से होने वाले शोर पर नियंत्रण लगाने का आदेश दिया था. अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि जिले में लाउडस्पीकर का उपयोग दिन में भी 5 डेसीबल से अधिक न हो. अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक जमीन पर किसी पिन के गिरने की आवाज भी 10 डेसीबल तक होती है. ऐसे में हाईकोर्ट के आदेश के तहत यह कार्य कठिन था, लेकिन प्रशासन ने आम लोगों के सहयोग से इसे पूरा कर लिया. एसएसपी ने बताया कि अब जिले में सिर्फ खास मौकों पर ही लाउडस्पीकर बजाने की इजाजत दी जाती है. इसके लिए भी पहले से अनुमति लेने के साथ-साथ अन्य शर्तों को मानना पड़ता है.



य‍ह भी पढ़ें: 

लॉकडाउन का पालन करवाएं लेकिन मुर्गा बनाने या उठक-बैठक जैसे तरीके न अपनाएं
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज