महाकुंभ 2021: अखाड़ों, आश्रमों को सस्ती दरों पर 18 सौ मीट्रिक टन राशन देगी सरकार, इतनी होगी कीमत

हरिद्वार कुंभ में लोगों को भोजन कराने के लिए सरकार सस्ती दरों पर आश्रमों और अखाड़ों को राशन उपलब्ध कराएगी.

हरिद्वार कुंभ में लोगों को भोजन कराने के लिए सरकार सस्ती दरों पर आश्रमों और अखाड़ों को राशन उपलब्ध कराएगी.

हरिद्वार महाकुंभ (Mahakumbh) में उत्तराखंड सरकार अन्नक्षेत्र चलाने के लिए अखाड़ों और आश्रमों को सस्ती दरों पर राशन (Ration) उपलब्ध कराएगी. इसके लिए सरकार ने 1800 मीट्रिक टन राशन आवंटित कर दिया है.

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पुलकित शुक्ला

हरिद्वार . हरिद्वार (Haridwar) कुंभ मेले में सरकार की ओर से अखाड़ों, आश्रमों मठ-मंदिरों को अन्नक्षेत्र चलाने के लिए सस्ती दरों पर राशन (Ration) मुहैया कराया जाता है. कुंभ मेले (Kumbh Mela) की अधिसूचना जारी होने के साथ ही सरकार की ओर से अखाड़ों आश्रमों के लिए क़रीब 18 सौ मीट्रिक टन राशन आवंटित किया गया है. जल्द ही यह राशन खाद्य आपूर्ति विभाग के गोदाम तक पहुंच जाएगा.

हरिद्वार में इन दिनों कुंभ मेला चल रहा है. कुंभ मेले के दौरान अखाड़ों आश्रमों और मठों में लगातार अन्नक्षेत्र, भंडारे चलाए जाते हैं. इन भंडारों में ना सिर्फ साधु-संत बल्कि आम श्रद्धालु भी भोजन करते हैं. हजारों लोगों को भोजन कराने के लिए भारी मात्रा में गेहूं चावल चीनी आदि की जरूरत पड़ती है. ऐसे में सरकार की ओर से भी आश्रमों को सस्ती दरों पर राशन उपलब्ध कराया जाता है. कुंभ मेले की अधिसूचना जारी होने के साथ ही सरकार की ओर से करीब 18 सौ मीट्रिक टन राशन आवंटित कर दिया गया है.

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हरिद्वार के जिला खाद्य आपूर्ति अधिकारी के. के. अग्रवाल ने बताया कि अगले सप्ताह तक राशन गोदाम में पहुंच जाएगा और आश्रमों को राशन वितरण का काम शुरू कर दिया जाएगा. इसके तहत गेहूं 5 रुपये किलो चावल 6 रुपए किलो और 17 रुपये किलो की दर से चीनी दी जाती है, जिससे भंडारा चलाने वाली धार्मिक संस्थाओं पर आर्थिक बोझ कम पड़ता है.

आम श्रद्धालु भी ले सकते हैं लाभ

सिर्फ अखाड़ों के साधु संत ही नहीं बल्कि कुंभ मेले में पहुंचे आम श्रद्धालु भी सरकार की इस योजना का लाभ उठा सकते हैं. जिला खाद्य आपूर्ति अधिकारी ने बताया कि सभी आश्रमों और धर्मशालाओं को उनकी मांग के अनुसार राशन उपलब्ध कराया जाता है, जो आम श्रद्धालु भी खुद खाना बनाकर ही खाना चाहते हैं. वह भी सस्ती दरों पर राशन प्राप्त कर सकते हैं.



साधु संत कर रहे हैं सराहना

अखाड़ों के साधु संत भी सरकार की योजना को सराह रहे हैं. निरंजनी अखाड़े के सचिव महंत रविंद्र पुरी का कहना है कि कुंभ मेले जैसे आयोजन में सैकड़ों अन्य क्षेत्र और भंडारे चलाए जाते हैं. हर दिन हजारों लोग भोजन करते हैं. इसके लिए सिर्फ अखाड़ों के संसाधन काफी नहीं हैं. सरकार की ओर से सस्ती दरों पर जो राशन उपलब्ध कराया जाता है, उसे धार्मिक संस्थाओं को काफी लाभ होता है.
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