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उत्तराखंड को कुपोषण मुक्त करने की योजना शुरू, सीएम ने दो बच्चों का लिया जिम्मा

उत्तराखंड को कुपोषण मुक्त करने की योजना शुरू, सीएम ने दो बच्चों का लिया जिम्मा

किसी भी समाज का भविष्य होते हैं नन्हें बच्चे. ये कलियों की तरह होते हैं जो आगे खिलकर हमारी दुनिया की रंग बिरंगी बगिया बनाते हैं, लेकिन कई बार कुपोषण का शिकार होकर ये कलियां खिलने से पहले ही मुरझा जाती हैं.

किसी भी समाज का भविष्य होते हैं नन्हें बच्चे. ये कलियों की तरह होते हैं जो आगे खिलकर हमारी दुनिया की रंग बिरंगी बगिया बनाते हैं, लेकिन कई बार कुपोषण का शिकार होकर ये कलियां खिलने से पहले ही मुरझा जाती हैं.

किसी भी समाज का भविष्य होते हैं नन्हें बच्चे. ये कलियों की तरह होते हैं जो आगे खिलकर हमारी दुनिया की रंग बिरंगी बगिया बनाते हैं, लेकिन कई बार कुपोषण का शिकार होकर ये कलियां खिलने से पहले ही मुरझा जाती हैं.

    किसी भी समाज का भविष्य होते हैं नन्हें बच्चे. ये कलियों की तरह होते हैं जो आगे खिलकर हमारी दुनिया की रंग बिरंगी बगिया बनाते हैं, लेकिन कई बार कुपोषण का शिकार होकर ये कलियां खिलने से पहले ही मुरझा जाती हैं.

    देवभूमि में आगे ऐसा न हो इसके लिए राज्य सरकार ने पहल की है. प्रदेश में बाल पोषण अभियान शुरू किया गया है, जिसके तहत कुपोषित बच्चों को पुष्टाहार देकर एक साल में राज्य को कुपोषण मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है.

    कार्यक्रम के शुभारंभ पर मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि इस तरह की योजनाओं में सहभागिता जागृत समाज का परिचायक है. सीएम ने कहा कि यह शुरुआत केवल औपचारिक बन कर न रहे इसके लिए हम सभी का दायित्व है कि जिन बच्चों को गोद लिया गया है उनके बारे में लगातार जानकारी लेते रहें.

    देवभूमि में से तीन हजार सात सौ बच्चे हैं, जो कुपोषण का शिकार हैं, लेकिन उत्तराखंड कुपोषण मुक्त हो इसके लिए प्रदेश सरकार ने कमर कस ली है. सरकार ने 'खिलती कलियां-बाल पोषण अभियान' शुरू किया है, जिसका शुभारंभ मुख्यमंत्री हरीश रावत ने किया.

    अभियान के तहत कुपोषित बच्चों को नियमित मात्रा में पुष्टाहार दिया जाएगा और समय समय पर उनके स्वास्थ्य की जांच की जाएगी. कार्यक्रम के शुभारंभ पर सीएम हरीश रावत ने दो बच्चों का जिम्मा लिया, तो वहीं राज्य के मुख्य सचिव सहित शासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी कुपोषित बच्चों की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ली.

    योजना का खाका तैयार करने वाले महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों ने कहा कि बच्चों को पुष्टाहार देने के साथ ही उनके स्वास्थ्य की भी नियमित जांच की जाएगी. विभाग की प्रमुख सचिव ने बताया किएक साल में राज्य को कुपोषण मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है. वहीं योजना शुरू होने पर कुपोषित बच्चों की माताओं ने इसका स्वागत किया.

    कुपोषण की मार झेलते बच्चों का बचपन फिर खिलखिलाए, इसके लिए बाल पोषण अभियान एक अच्छी शुरुआत कही जा सकती है. इससे इतना तो सुनिश्चित होगा ही कि वर्तमान की ये कलियां भविष्य में खिलेंगी, खिलने से पहले मुरझाएंगीं नहीं.

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