2022 की तैयारी में तीरथ सरकार, होली से पहले बनाए 13 प्रभारी मंत्री, पढ़ें किस चेहरे को मिली कहां की जिम्मेदारी

सीएम तीरथ सिंह रावत ने लोक सीएम रावत ने अपने मंत्रियों को नई जिम्मेदारी दी है.  (फाइल)

सीएम तीरथ सिंह रावत ने लोक सीएम रावत ने अपने मंत्रियों को नई जिम्मेदारी दी है. (फाइल)

Uttarakhand Politics: होली (Holi) से ठीक पहले रावत सरकार ने सभी 13 जिलों के प्रभारी मंत्री बना दिए हैं. ये राज्य और केंद्र सरकार की योजनाओं के बारे में अधिकारियों और जनता के बीच कोऑर्डिनेशन का काम करेंगे. 

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हल्द्वानी. तीरथ सिंह रावत ( Tirath Singh Rawat) की नई सरकार रोज नए-नए फैसले ले रही है. अब सीएम तीरथ सिंह रावत ने होली से ठीक पहले अपने मंत्रियों को एक और अहम जिम्मेदारी दे दी है. विकास कार्यों की देखभाल के लिए सीएम तीरथ सिंह ने सभी 13 जिलों के प्रभारी मंत्री बना दिए हैं जो जिलों में चल रही राज्य और केंद्र सरकार की योजनाओं के बारे में अधिकारियों और जनता के बीच कोऑर्डिनेशन का काम करेंगे. साथ ही आम जनता भी इन प्रभारी मंत्रियों से विकास कार्यों को लेकर शिकायत कर सकती है. तीरथ सिंह रावत के फैसले के बाद उनकी कैबिनेट के आठ मंत्री और तीन राज्य मंत्री सीधे इन जिलों के लिए उत्तरदायी होंगे.

इन मंत्रियों को मिला इन जिलों का प्रभार

सिंचाई और पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज को ऊधम सिंह नगर, शहरी विकास मंत्री बंशीधर भगत को देहरादून, वन मंत्री  हरक सिंह रावत को अल्मोड़ा, पेयजल मंत्री बिशन सिंह चुफाल को पौड़ी, परिवहन मंत्री यशपाल आर्य को हरिद्वार, शिक्षा और खेल मंत्री अरविंद पांडे को पिथौरागढ़ और बागेश्वर, कृषि मंत्री सुबोध उनियाल को नैनीताल, सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी को उत्तरकाशी, राज्यमंत्री धन सिंह रावत को चमोली और रुद्रप्रयाग,  महिला विकास मंत्री रेखा आर्या को चंपावत और गन्ना मंत्री स्वामी यतीश्वरानंद टिहरी जिले के  प्रभारी बनाए गए हैं.

प्रभारी मंत्रियों पर रहेगा चुनावी दारोमदार 
2022 चुनाव से पहले प्रभारी मंत्री बनाए गए आठ कैबिनेट और एक राज्य मंत्री पर न केवल सरकार के विकास कार्यों को लोगों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी होगी बल्कि चुनाव के दौरान भी जिलों में फैली विधानसभा सीटों को लेकर भी इनका रोल अहम होगा. क्योंकि विकास कार्यों की कमजोर स्थिति में इसका खामियाजा 2022 के चुनाव नतीजों के रूप में भुगतना होगा.

त्रिवेंद्र सरकार में गंभीर नहीं रहे प्रभारी मंत्री 

​पिछले सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी जिलों में प्रभारी मंत्रियों की व्यवस्था की थी. लेकिन ज्यादातर प्रभारी मंत्री इसको लेकर गंभीर नहीं थे. एक बार बैठक के बाद प्रभारी मंत्री जिलों में जाने से तौबा कर लेते थे, जिसका नतीजा अधिकारियों की मनमानी के रूप में सामने आया.
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