हल्द्वानीः सुशीला तिवारी अस्पताल से 'हवा खाने' के लिए भाग गए तीन Corona पॉज़िटिव कैदी

बुधवार शाम हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल से तीन कोरोना पॉज़ीटिव कैदी अस्पताल की खिड़की तोड़कर फरार हो गए थे.

कुमाऊं के सबसे बड़े अस्पताल (Sushila Tiwari Hospital) से भागे 3 कैदी मरीजों को पकड़ने में पुलिस को करनी पड़ी 5 घंटे की कड़ी मशक्कत. नैनीताल जेल में COVID-19 जांच रिपोर्ट पॉजिटिव पाए जाने के बाद तीनों को सुशीला तिवारी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था.

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हल्द्वानी. कोरोना वायरस संक्रमित मरीजों के इलाज के लिए कोविड-केयर सेंटर हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल में भर्ती तीन कोरोना पॉज़िटिव कैदी बुधवार शाम अस्पताल की खिड़की तोड़कर फरार हो गए. इसके बाद अस्पताल प्रशासन से लेकर पुलिस महकमे तक में हड़कंप मच गया. आनन-फानन में पुलिस ने शहर में कई जगह नाकेबंदी कर दी और जिले की सीमाओं पर भी चेकिंग को कड़ा कर दिया. तकरीबन पांच घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद इन फ़रार कैदियों को पकड़ लिया गया. हैरानी की बात यह थी कि तीनों एक साथ बेहिचक शहर की व्यस्त नहर कवरिंग वाली सड़क पर घूम रहे थे.

तीनों कैदी जैसे ही पकड़ में आए पुलिस से लेकर अस्पताल प्रशासन ने तक चैन की सांस ली. सीओ शांतनु पाराशर के मुताबिक पुलिस की मुस्तैदी के कारण तीनों कैदियों को समय रहते पकड़ लिया गया. साथ ही सीओ ने कहा कि कैदियों की सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों की लापरवाही की जांच होगी.​

हवा खाने के लिए भागे 

ध्रुव विश्वास चोरी, राजेंद्र बोरा एनडीपीएस यानी नशीली चीजों का काराबोर करने और मनप्रीत आर्म्स एक्ट यानी अवैध हथियार रखने के आरोप में गिरफ्तार हैं. तीनों नैनीताल जेल में बंद थे. 5 अगस्त को तीनों कोरोना पॉज़िटिव पाए गए थे जिसके बाद इन्हें सुशीला तिवारी अस्पताल लाया गया था. शुक्रवार को इनकी छुट्टी होने वाली थी लेकिन इससे पहले ही बुधवार को ये अस्पताल की खिड़की तोड़ फरार हो गए हालांकि बाद में पकड़े गए.

पकड़े जाने के बाद इन्होंने पुलिस वालों को भागने की जो वजह बताई वह हैरान करने वाली है. तीनों ने बताया कि अस्पताल में वे घुटन महसूस कर रहे थे, इसलिए उन्होंने अस्पताल की पुरानी और कमजोर हो चुकी खिड़की को तोड़कर बाहर निकलने और ठंडी हवा खाने का फैसला किया. ताकि बाहर जाकर ताजगी महसूस कर सकें.


नैनीताल जेल से लाए गए तीनों कैदियों को अस्पताल के एक कमरे में रखा गया था लेकिन अस्पताल का पिछला हिस्सा होने के कारण यह सुनसान इलाका है. हालांकि कमरे के बाहर इनकी सुरक्षा में पुलिस वाले तैनात थे लेकिन जबतक पुलिस वालों को जब तक इनके मंसूबों की खबर मिलती ये फ़रार हो चुके थे. कैदियों का फरार होना पुलिसकर्मियों की लापरवारी माना जा रहा है. हालांकि इससे पहले भी चार बार अस्पताल में भर्ती कोरोना मरीज फरार हो चुके हैं. एक मरीज को दो दिन बाद अस्पताल के वॉशरूम में ही मरा हुआ मिला. इससे अस्पताल की व्यवस्था सवालों के घेरे में है.

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