जैव विविधता के लिए महत्पूर्ण क्षेत्र है औली, पर्यावरण के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी निभाए सरकारः हाईकोर्ट
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जैव विविधता के लिए महत्पूर्ण क्षेत्र है औली, पर्यावरण के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी निभाए सरकारः हाईकोर्ट
केस की सुनवाई के दौरान औली में कूड़ा, कचरा, प्लास्टिक और गंदगी फैलाए जाने पर हाईकोर्ट ने नाराज़गी व्यक्त की थी. (File Photo)

औली में गुप्ता परिवार की शादी को लेकर नैनीताल हाईकोर्ट ने जारी किया आदेश, डिटेल्ड ऑर्डर का इंतज़ार

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नैनीताल. औली में गुप्ता परिवार की 200 करोड़ की शाही शादी पर उत्तराखंड हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है. हाईकोर्ट की जस्टिस सुधांशू धूलिया व जस्टिस रमेश चन्द्र खुल्बे की कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि सरकार की मंशा भले ही ऐसी न हो मगर सरकार को पर्यावरण के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी निभानी होगी. हालांकि बुग्याल वाले मामले में कोर्ट ने आदेश नहीं दिया लेकिन कहा कि अगर औली बुग्याल नहीं है तो भी जैव विविधता के लिए महत्पूर्ण इलाका है और उसको बनाए रखना होगा. स मामले पर विस्तृत ऑर्डर अभी आना बाकी है.

पर्यटन और पर्यावरण के बीच तालमेल रखें

हाईकोर्ट ने पर्यटन सचिव की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई है जो ऐसे आयोजनों की अनुमति पर काम करेगी. कोर्ट ने अपने आदेश में साफ कर दिया है कि टूरिज्म व पर्यावरण के बीच में तालमेल रखा जाए. कोर्ट ने कहा है कि औली में क्षमतानुसार ही पर्यटकों को भेजा जाए और सरकार विंटर खेलों के साथ एडवेंचर टूरिज़्म को ही यहां बढावा दे.



बता दें कि औली बुग्याल में गुप्ता परिवार में एक शादी के लिए राज्य सरकार ने औली में आयोजन करने की अनुमति दी थी. इसके ख़िलाफ़ अधिवक्ता रक्षित जोशी ने जनहित याचिका दाखिल कर कहा था कि ऐसे आयोजन से न सिर्फ पर्यावरण को बल्कि ईको सिस्टम को भी हानि पहुंचेगी. याचिका में सरकार पर कानून के विरुद्ध अनुमति देने और दोषियों पर कार्रवाई करने के साथ ही शादी को रोकने की मांग की गई थी.
कोर्ट ने इस मामले में शादी पर रोक लगाने से इनकार करते हुए गुप्ता परिवार को 3 करोड़ रुपये जमा करने का आदेश दिया था जिससे बाद में पर्यावरण के नुकसान की भरपाई के लिए इस्तेमाल किया गया था.

बुग्याल नहीं है औली?

सुनवाई के दौरान औली में कूड़ा, कचरा, प्लास्टिक और गंदगी फैलाए जाने पर हाईकोर्ट ने नाराज़गी व्यक्त की तो सरकार ने अपने बचाव में कहा कि औली बुग्याल नहीं है इसीलिए वहां शादी समारोह की अनुमति दी गई थी. इस पर हाईकोर्ट ने वाडिया, जीबी पंत, फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट और एनआईएम संस्थानों से स्परष्टीकरण मांगा था कि औली बुग्याल है या नहीं.

माना जा रहा है कि बाद में आने वाले कोर्ट के विस्तृत फ़ैसले में इस बारे में कुछ तफ़सील हो सकती है.
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