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खनन पर प्रतिबंध से सरकार को सैकड़ों करोड़ की चपत, बिगड़ा बजट

खनन पर प्रतिबंध से सरकार को सैकड़ों करोड़ की चपत, बिगड़ा बजट

खनन सचिव का कहना है कि खनन पर प्रतिबंध से सरकार को करीब 350 करोड़ की चपत लगेगी, जिससे प्लान खर्च गड़बडाएगा.

खनन सचिव का कहना है कि खनन पर प्रतिबंध से सरकार को करीब 350 करोड़ की चपत लगेगी, जिससे प्लान खर्च गड़बडाएगा.

उत्तराखंड सरकार के सामने पहले ही अपने स्तर पर आर्थिक संसाधन जुटाकर राजस्व बढ़ाने की बड़ी चुनौती है. खनन पर नैनीताल हाईकोर्ट की रोक के बाद निर्माण कार्यों पर तो असर पड़ेगा ही साथ ही आर्थिक नुकसान भी होगा. मुख्यमंत्री का कहना है कि इस पूरे मामले का परीक्षण कर जल्दी ही आगे की कार्रवाई की जाएगी. उधर खनन सचिव का कहना है कि इससे सरकार को करीब 350 करोड़ की चपत लगेगी, जिससे प्लान खर्च गड़बडाएगा.

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    उत्तराखंड सरकार के सामने पहले ही अपने स्तर पर आर्थिक संसाधन जुटाकर राजस्व बढ़ाने की बड़ी चुनौती है. खनन पर नैनीताल हाईकोर्ट की रोक के बाद निर्माण कार्यों पर तो असर पड़ेगा ही साथ ही आर्थिक नुकसान भी होगा. मुख्यमंत्री का कहना है कि इस पूरे मामले का परीक्षण कर जल्दी ही आगे की कार्रवाई की जाएगी. उधर खनन सचिव का कहना है कि इससे सरकार को करीब 350 करोड़ की चपत लगेगी, जिससे प्लान खर्च गड़बडाएगा.

    नैनीताल हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 4 महीने के लिए हर तरह के खनन पर रोक लगाते हुए एक उच्चाधिकार प्राप्त कमेटी गठित करने के निर्देश दिए हैं. कमेटी में नोडल अधिकारी कमिश्नर कुमाऊं एस. पांडियल और सचिव पीसीसीएफ राजेंद्र महाजन समेत बतौर विशेषज्ञ उसमें अन्य शामिल होंगे.

    ये कमेटी खनन से पर्यावरण और प्राकृतिक संपदा को हो रहे नुकसान का अध्ययन कर हाईकोर्ट को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी. उत्तराखंड में अवैध खनन और उसके नुकसान को लेकर हमेशा आवाज उठती रही है.

    मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का कहना है कि सरकार कोर्ट के आदेश का परीक्षण करा रही है. उनका मानना है कि खनन पर पूर्ण रोक से निर्माण कार्यो पर बड़ा असर पड़ेगा.

    हाईकोर्ट ने संवेदनशील पर्यावरणीय पहलुओं के मद्देनजर फिलहाल खनन पर रोक लगाई है. चूंकि राज्य को खनन से राजस्व प्राप्त होता है, लिहाजा उसे फौरी तौर पर माली नुकसान भी होगा.

    अगर राज्य की आमदनी की बात करें तो उसे केंद्रीय करों में हिस्सेदारी मिलती है. इसके अलावा राज्य स्तर पर आमदनी के जरियों में आबकारी, व्यापारकर, भूराजस्व, वाहन कर और खनन की अहम भूमिका रही है.

    पिछले दो वित्त वर्षों के राजस्व पर तुलनात्मक नजर
    मद ---2014-15--- 12015-16
    आबकारी--- 1486.65--- 1735.39 करोड़
    स्टांप शुल्क --- 714.05 --- 870.67 करोड़
    व्यापार एवं बिक्री कर--- 5464.83 --- 6105.43 करोड़
    भूराजस्व--- 39.25--- 27.88 करोड़
    वाहन कर--- 393.70--- 470.87 करोड़
    खनन---223.7--- 272.65 करोड़
    करोड़ों का नुकसान
    उत्तराखंड सरकार खनन पर रोक लगाने संबधी हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल अपील की तैयारी में हैं सचिव खनन की दलील है कि ना सिर्फ राजस्व बल्कि पांच जिलों में लोगों का रोजगार प्रभावित हो रहा है वहीं वित्त सचिव का कहना है कि शराब और खनन पर रोक से राज्य सरकार को करीब 350 सौ करोड की चपत लगी है जिससे प्लान खर्च का बजट गडबडाएगा.

    उन्होंने कहा कि खनन पर 4 महीने की रोक से फौरी तौर पर कमोबेश 150 करोड के राजस्व का नुकसान होगा. लेकिन देहरादून, हरिद्वार, उधमसिंहनगर, नैनीताल और बागेश्वर में खनन कारोबार से जुडे लोगों के सामने रोजगार का भी संकट हो गया है.

    सचिव खनन शैलेष बगौली का कहना है कि हाईकोर्ट के आदेश का पालन किया जा रहा है, लेकिन राज्य हित में सरकार सुप्रीम कोर्ट में खनन पर रोक के खिलाफ स्पेशल अपील दायर करने जा रही है.

    बजट की दिक्कत
    शासन में तैनात वित्त सचिव अमित सिंह नेगी का कहना है कि राज्य में नान प्लान खर्च की एक तिहाई भरपाई खनन राजस्व से होती है. साथ ही तीन जिलों में लिकर बैन और दुकान सिफटिंग से भी आबकारी विभाग को 50 से 100 करोड का रिवेन्यू लास होगा.  इससे विभाग को फिर बजट रिस्ट्रक्चर करना पड़ेगा.

    इसमें कोई शक नहीं है कि उपखनिजों के चुगान की अनुमति लेकर राजनैतिक संरक्षण में अवैध खनन किया जाता है, लेकिन दूसरा पक्ष ये भी है कि नदियों से निर्धारित तरीकों से चुगान भी जरूरी होता है. सरकार खनन रोक मामले में राहत के लिए सुप्रीम कोर्ट जा रही है, लेकिन उसे वैध और पारदर्शी खनन के इंतजाम भी करने होंगे.

    Tags: Uttarakhand news

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