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जिन कांग्रेसी को कोसते रहे, अब वही बन गए भाजपाई

जिन कांग्रेसी को कोसते रहे, अब वही बन गए भाजपाई

उत्तराखंड में कांग्रेस से कई बागी नेता भले ही बीजेपी में शामिल होकर टिकट पाने में कामयाब हो चुके हैं. लेकिन भाजपा नेताओं को अब इन्हीं नेताओं का बचाव करते नहीं बन रहा है.

उत्तराखंड में कांग्रेस से कई बागी नेता भले ही बीजेपी में शामिल होकर टिकट पाने में कामयाब हो चुके हैं. लेकिन भाजपा नेताओं को अब इन्हीं नेताओं का बचाव करते नहीं बन रहा है.

उत्तराखंड में कांग्रेस से कई बागी नेता भले ही बीजेपी में शामिल होकर टिकट पाने में कामयाब हो चुके हैं. लेकिन भाजपा नेताओं को अब इन्हीं नेताओं का बचाव करते नहीं बन रहा है.

    उत्तराखंड में कांग्रेस से कई बागी नेता भले ही बीजेपी में शामिल होकर टिकट पाने में कामयाब हो चुके हैं. लेकिन भाजपा नेताओं को अब इन्हीं नेताओं का बचाव करते नहीं बन रहा है.

    बागी नेताओं के कांग्रेस में रहते वक्त बीजेपी के सीनियर नेताओं ने उन्हें सार्वजनिक तौर पर कई मुद्दों पर घेरते हुए आलोचना की थी. अब ऐसे में उनके लिए इन्हीं नेताओं को जनता के सामने सकारात्मक रूप से पेश करना परेशानी बन रहा है.

    हरिद्वार से भाजपा सांसद निशंक का कहना है कि हां मैंने नेताओं के खिलाफ खूब बोला है. अब लोग मुझसे कहते है कि वो खराब लोग है तो पार्टी का हिस्सा क्यों हैं. ऐसे में मेरा यही जवाब है कि भारतीय जनता पार्टी खराब को ही ठीक करने के लिए बनी है.

    70 विधानसभा सीटों पर होंगे मतदान

    उत्तराखंड की 70 विधानसभा सीटों पर 15 फरवरी को एक ही चरण में मतदान होना है. वोटों की गिनती 11 मार्च को होगी. इस बार मुख्य मुकाबला कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच है. हालांकि, उत्तराखंड क्रांति दल, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी सहित दूसरे सियासी दल भी अपना प्रभाव छोड़ने को बेताब हैं. ऐसे में इस बार विधानसभा चुनाव बेहद दिलचस्प होने जा रहा है.

    अभी हरीश रावत की अगुवाई में प्रदेश में कांग्रेस की सरकार है. पिछली बार 2012 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 32 सीटें जीती थी. भाजपा को 31, बहुजन समाज पार्टी को 3, उत्तराखंड क्रांति दल को 1 और निर्दलियों को 3 सीटें मिली थी. इस चुनाव में कांग्रेस को 33.79 और 33.13 फीसदी वोट मिले थे.

    नतीजे आने के बाद कांग्रेस ने बसपा, उत्तराखंड क्रांति दल और निर्दलियों के सहयोग से विजय बहुगुणा की अगुवाई में प्रदेश में सरकार बनाई थी. बहुगुणा के इस्तीफे के बाद हरीश रावत प्रदेश में मुख्यमंत्री बने.

    ये होंगे मुद्दे

    केंद्र में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने के बाद जिस तरह से भाजपा को दिल्ली और बिहार में करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा है, ऐसे में उत्तराखंड का चुनाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है. मुख्यमंत्री चेहरे को सामने न लाकर एक बार फिर भाजपा ने पीएम मोदी के चेहरे पर देवभूमि में दांव खेला है. इसका कितना फायदा उसे इस चुनाव में मिलेगा, वह 11 मार्च को सामने आ ही जाएगा.

    इस बार उत्तराखंड चुनाव में प्रदेश की कानून-व्यवस्था, सर्जिकल स्ट्राइक, नोटबंदी और विकास का मुद्दा प्रमुख रहने वाला है. माना जा रहा है कि नोटबंदी के बाद उत्तराखंड में पर्यटन पर काफी नकारात्मक असर पड़ा है. ऐसे में यह चुनाव नतीजे को प्रभावित कर सकता है. इसके अलावा, गरीबी, बेरोजगारी और पहाड़ों से पलायन भी मुख्य मुद्दे हैं.

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