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उपभोक्ताओं पर बढ़ी बिजली दरों का बोझ और कर्मचारियों को मुफ़्त बिजली क्यों... UPCL हाईकोर्ट में देगा जवाब

Virendra Bisht | News18 Uttarakhand
Updated: November 7, 2019, 6:03 PM IST
उपभोक्ताओं पर बढ़ी बिजली दरों का बोझ और कर्मचारियों को मुफ़्त बिजली क्यों... UPCL हाईकोर्ट में देगा जवाब
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने प्रदेश में बिजली की दरें बढ़ाने और कर्मचारियों को मुफ़्त बिजली देने पर यूूपीसीएल से सफ़ाई मांगी है.

नैनीताल हाईकोर्ट के चीफ़ जस्टिस (Chief Justice of Nainital High Court) ने टिप्पणी की कि इतनी सुविधा तो जजों को भी नहीं मिलती है.

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नैनीताल. उत्तराखंड हाईकोर्ट (Uttarakhand High Court) ने प्रदेश में बिजली की दरें (Electricity rates) बढ़ाने और कर्मचारियों को मुफ़्त बिजली (Free Electricity) देने पर कड़ा रुख अपनाया है. एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सरकार को नोटिस जारी किया है. इसके साथ ही उत्तराखंड पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (Uttarakhand Power Corporation Limited) को नोटिस जारी कर विस्तृत शपथ पत्र दाखिल करने को कहा है. याचिका में यूपीसीएल (UPCL) की गलत नीतियों की वजह से जनता पर भार पड़ने की बात कही गई है और इस गड़बड़झाले को दुरुस्त करने की मांग की गई है.

इतनी सुविधा को जजों को भी नहीं मिलती 

राज्य में बिजली की दरों को बढ़ाने और बिजली विभाग के कर्मचारियों को मुफ़्त बिजली दिए जाने पर हाईकोर्ट ने गम्भीर रुख अपनाया है. एक जनहित याचिका का संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सरकार को नोटिस जारी कर आदेश दिया है कि इस मामले पर वह अपना जवाब दाखिल करे. इसके साथ ही यूपीसीएल को भी कोर्ट ने विस्तृत शपथ पत्र दाखिल करने का आदेश दिया है.

कोर्ट ने इस मामले पर भी गम्भीर रुख अपनाया कि क्यों यूपीसीएल के एक जीएम के घर से बिजली की ही रीडिंग तक नहीं ली गई. सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने टिप्पणी की कि इतनी सुविधा तो जजों को भी नहीं मिलती है.

एक लाख से ज़्यादा बिल, चुकाया 425 

बता दें कि आरटीआई क्लब उत्तराखण्ड ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर राज्य में लगातार बढ़ाए जा रहे बिजली शुल्क को चुनौती दी है. याचिका में यह भी कहा गया है कि विभाग अपने कर्मचारियों को लगभग मुफ़्त बिजली देता है.

याचिका के अनुसार उच्च अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए विभाग ने अधिकतम 500 और 100 से रुपये बिल तय किया है. बिजलीकर्मी चाहे कितनी भी बिजली खर्च करें उन्हें इससे ज़्यादा बिल नहीं देना होता. याचिका के अनुसार यूपीसीएल के एक ने एक महीने में 92000 यूनिट बिजली खर्च की, जिसका बिल एक लाख रुपये से ऊपर होता है लेकिन उन्होंने जमा किए सिर्फ़ 425 रुपये.
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मीटर खराब हैं या हैं ही नहीं  

याचिका में यह भी कहा गया है कि इन अधिकारियों और कर्मचारियों के घरों में जो मीटर लगे हैं, वे या तो ख़राब हैं या फिर हैं ही नहीं. याचिका में कहा गया है कि ये लोग जो बिजली खर्च कर रहे हैं उसका पैसा भी जनता से ही लिया जा रहा है. याचिका में इस फ़र्ज़ीवाड़े और बिजली घोटाले को बंद करने की मांग की गई है.

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First published: November 7, 2019, 4:32 PM IST
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