ट्यूशन फ़ीस के अलावा कोई और फ़ीस ले नहीं सकते, CBSE मांग रहा लाखों... हाईकोर्ट पहुंचे प्राइवेट स्कूल

ऊधम सिंह नगर के प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है.
ऊधम सिंह नगर के प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है.

सीबीएसई बोर्ड ने सभी प्राइवेट स्कूलों से 10000 रुपये स्पोर्ट्स फ़ीस, 10000 रुपये टीचर ट्रेनिंग फ़ीस और प्रति छात्र 300 रुपये रजिस्ट्रेशन फ़ीस जमा करने को कहा है.

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नैनीताल. उत्तराखण्ड दरअसल सरकार ने सभी प्राइवेट स्कूलों को आदेश दिया है कि जब तक स्कूल नहीं खुल जाते तब तक ऑनलाइन क्लास लेने वाले स्कूल सिर्फ़ ट्यूशन फ़ीस ले सकते हैं. दूसरी तरफ़ सीबीएसई ने सभी प्राइवेट स्कूलों से स्पोर्ट्स फ़ीस, टीचर ट्रेनिंग फ़ीस और स्टूडेंट्स की रजिस्ट्रेशन फ़ीस जमा करने को कहा है. ऐसे में सीबीएसई से मान्यता प्राप्त स्कूल सरकार और बोर्ड के बीच फंस गए हैं और इसलिए हाईकोर्ट की शरण में पहुंच गए हैं. हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस कोर्ट ने इस मामले में सरकार और सीबीएसई बोर्ड को नोटिस जारी कर 2 हफ़्ते के भीतर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है.

दबाव न डाले CBSE

ऊधम सिंह नगर के प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने इस मामले में हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है. याचिका के अनुसार राज्य सरकार ने 22 जून, 2020 के आदेश में कहा है कि लॉकडाउन में प्राइवेट स्कूल किसी भी बच्चे का नाम स्कूल से नहीं काटेंगे और उनसे ट्यूशन फ़ीस के अलावा कोई अन्य शुल्क नहीं लिया जाएगा. लेकिन एक सितंबर को सीबीएसई बोर्ड ने सभी प्राइवेट स्कूलों को नोटिस जारी कर कहा है कि बोर्ड से संचालित सभी स्कूल 10000 रुपये स्पोर्ट्स फ़ीस, 10000 रुपये टीचर ट्रेनिंग फ़ीस और प्रति छात्र 300 रुपये रजिस्ट्रेशन फ़ीस बोर्ड में 4 नवम्बर तक जमा करें.



याचिका में कहा गया है कि सीबीएसई बोर्ड ने कहा है कि अगर 4 नवम्बर तक पैसा जमा नहीं किया गया तो 2 हज़ार रुपये प्रति छात्र के हिसाब से पेनल्टी देनी होगी. याचिका में कहा गया है कि प्राइवेट स्कूल न तो किसी बच्चे का रजिस्ट्रेशन रद्द कर सकते हैं, न ही उनसे ट्यूशन फ़ीस के अलावा फ़ीस ले सकते हैं.  याचिका में यह भी कहा गया है कि इस समय न तो टीचर्स की ट्रेनिंग हो रही है और न ही कोई खेल हो रहा है, इसलिए सीबीएसई बोर्ड के भुगतान के दबाव डालने पर रोक लगाई जाए.


हाईकोर्ट ने भी दिया था आदेश

दरअसल लॉकडाउन के दौरान स्कूलों ने अभिभावकों पर फ़ीस के लिए दबाव बनाया तो देहरादून के आकाश यादव और बीजेपी नेता कुंवर जपिंदर सिंह हाईकोर्ट पहुंच गए और हाईकोर्ट से फ़ीस माफ़ करवाने की मांग की. इस मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने 12 मई को आदेश पारित कर ईमेल, मैसेज, वॉट्सएप या फोन कॉल से अभिभावकों से फ़ीस मांगने पर रोक लगा दी.

हाईकोर्ट ने ऐसे मामलों पर निगरानी रखने, शिकायतें करने और उनकी जांच के लिए ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों को नोडल अधिकारी बना दिया. कोर्ट ने इस आदेश में कहा था कि स्कूल सिर्फ ट्यूशन फ़ीस ही ले सकते हैं.
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