चारधाम यात्रा: पर्यटन सचिव के जवाब से संतुष्ट नहीं नैनीताल हाईकोर्ट, कहा- ढिलाई बर्दाश्त नहीं

पिछली तारीख को हाईकोर्ट ने सचिव पर्यटन को स्थलीय निरीक्षण करने का आदेश दिया था.

कोर्ट ने साफ कर दिया है कि चारधाम यात्रा में कोर्ट कतई ढिलाई बर्दास्त नहीं होगी. चीफ जस्टिस कोर्ट ने सरकार को कहा है कि अगर चारधाम और पर्यटन को खोलना चाहते हैं तो समय पर निर्णय लें.

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नैनीताल. कोरोना से बंद राज्य में चारधाम को लेकर हाईकोर्ट पर्यटन सचिव के जवाब से संतुष्ट नहीं है. हाईकोर्ट ने सचिव पर्यटन दिलीप जावलकर को 21 जून तक सभी सभी तैयारियों पर जवाब मांगा है. कोर्ट ने कहा है कि अंतिम समय पर निर्णय लेने से हमेशा दिक्कतें आती हैं और कुम्भ में भी अंतिम समय मे निर्णय लेने से सभी व्यवस्थाएं गड़बड़ा गई थीं. कोर्ट ने सचिव पर्यटन से पूछा है कि अगर चारधाम यात्रा को खोला जाता है तो श्रद्धालुओं के रहने-खाने और मेडिकल की क्या व्यवस्था है. साथ ही स्थानीय स्तर पर वैक्सीनेशन की क्या स्थिति है. कोर्ट ने साफ कर दिया है कि चारधाम यात्रा में कोर्ट कतई ढिलाई बर्दास्त नहीं होगी. चीफ जस्टिस कोर्ट ने सरकार को कहा है कि अगर चारधाम और पर्यटन को खोलना चाहते हैं तो समय पर निर्णय लें. हाईकोर्ट ने 23 जून को सचिव पर्यटन को सुनवाई में मौजूद रहने का आदेश दिया है. पिछली तारीख को हाईकोर्ट ने सचिव पर्यटन को स्थलीय निरीक्षण करने का आदेश दिया था. कोर्ट ने राज्य में कोरोना जांच में फर्जीवाड़ा पर भी 23 मार्च को सुनवाई करेगा.

कोविड़ से मौत वाले शवों का बिजली शवग्रह में हो अंतिम संस्कार
राज्य में कोरोना से मरने वालों का विधुत शवदाह से अंतिम संस्कार करने के मामले में हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव के साथ प्रमुख सचिव शहरी विकास और 13 जिलों के डीएम को नोटिस जारी किया है. तीन हफ्तों में जवाब फाइल करने का आदेश दिया है. हरिद्वार के समाजसेवी ईश्वर बर्मा ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर कहा है कि कोरोना से मारने वालों का अंतिम संस्कार विधुत शवदाह से हो और राज्य के सभी नगर पालिका नगर निगम और नगर पंचायतों में बिजली से चलने वाले शवदाह गृह बनें. याचिका में हरिद्वार में बने शवदाह गृह को चालू करने की मांग भी की गई है. पूरे मामले को सुनने के बाद चीफ जस्टिस कोर्ट ने नोटिस जारी किया है.

हाईकोर्ट के अधिवक्ता विरेन्द्र अधिकारी ने कहा कि इस याचिका में जो भी मांग रखी गई हैं, उससे कोरोना फैलने का खतरा कम रहेगा. साथ ही पर्यावरण को भी नुकसान कम होगा क्योंकि एक शव को जलाने के लिये 6 कुंतल लकड़ी का इस्तेमाल होता है और शव को जलाने के दौरान तीन हजार तक का खर्चा आता है और गंदगी और प्रदूषण का भी खतरा रहता है वहीं बिजली संचालित शव ग्रह में समय की बचत के साथ कम खर्च आता है.

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