दोस्ती के बहाने पीठ में छुरा भोंकता है चीन... चीनी सामान का पूरी तरह करेंगे बहिष्कारः तिब्बती व्यापारी
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दोस्ती के बहाने पीठ में छुरा भोंकता है चीन... चीनी सामान का पूरी तरह करेंगे बहिष्कारः तिब्बती व्यापारी
तिब्बती व्यापारियों ने कहा कि चीन से लड़ने से समाधान नहीं निकलेगा. उनके सामान का बहिष्कार करना होगा और लोगों को यह बात जल्द समझनी होगी.

पंचशील अभियान के दौरान भारत ने चीन को यह नहीं कहा होता कि तिब्बत आपका अंदरूनी मामला है तो आज ऐसी स्थिति नहीं हुई होती.

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नैनीताल. लद्दाख के गलवां घाटी में भारत-चीन की सेनाओं में हिंसक झड़प के दौरान शहीद सैनिकों के बाद देश में उबाल है. चीन की इस हरकत के बाद चीनी दमन के शिकार और आज़ादी की जंग लड़ रहे तिब्बतियों ने भी चीन के ख़िलाफ़ आवाज़ बुलंद की है. नैनीताल में तिब्बती दुकानदारों ने ऐलान किया है कि वे आगे से चीन का सामना नहीं बेचेंगे और उनकी दुकानों में जो सामान है भी उसे औने-पौने दामों में निकालकर चीन को आर्थिक तौर पर जख्म देंगे. उन्होंने कहा कि चीन ने सभी पड़ोसियों को परेशान किया हुआ है और लड़ने से समाधान नहीं निकलेगा. उनके सामान का बहिष्कार करना होगा और लोगों को यह बात जल्द समझनी होगी.

दोस्ती के बहाने कब्ज़ा करेगा

व्यापारी तेनजिंग सालडेन ने कहा कि सरकार को भी इस और कदम उठाने होंगे. तिब्बती दुकानदारों ने तो जाड़ों के दौरान पूरे देश में 78 जगहों पर लगने वाली दुकानों में चीन का सामान तीन साल पहले ही बैन कर दिया है. अब इस बाज़ार में भी इसका बहिष्कार किया जा रहा है.



तिब्बत 60 साल से चीन से अपनी ज़मीन वापस लेने की जंग लड़ रहा है. साल 1949 में चीन मित्र के रूप में तिब्बत में घुसा और 10 मार्च 1959 को तिब्बत पर कब्ज़ा कर लिया. तिब्बत आज़ादी संघर्ष समिति के सचिव सेयरिंग तोपगिल कहते हैं कि चीन दोस्ती के बहाने पीठ में छुरा भोंकने का काम करता है. उसने हमारे धर्मगुरु पंचेनलामा को भी 1995 में गायब कर दिया और इतने सालों बाद भी उनका कोई पता नहीं है.
चीन नहीं तिब्बत बॉर्डर है यह

तिब्बत फ्रीडम समिति के कोषाध्यक्ष येशी थुप्तेन कहते हैं कि लड़ाई से समाधान नहीं निकलेगा लेकिन यह तय है कि इस प्रकरण से तिब्बत की आज़ादी का मुद्दा विश्वस्तर पर उठ जाएगा. 60 साल से दुनिया में हम लोग अपनी आज़ादी की लड़ाई में साथ मांग रहे हैं ताकि 1949 से पहले जैसे तिब्बत रहे.

येशी थुप्तेन कहते हैं कि भारतीय सीमा पर भारत तिब्बत बॉर्डर पुलिस रहती है क्योंकि वह हमारे देश की सीमा थी जिस पर चीन ने कब्ज़ा किया है. अगर पंचशील अभियान के दौरान भारत ने चीन को यह नहीं कहा होता कि तिब्बत आपका अंदरूनी मामला है तो आज ऐसी स्थिति नहीं हुई होती. भारत को न बॉर्डर पर इतना पैसा सुरक्षा में खर्च करना पड़ता और न ही अपने बेटों की शहादत देनी पड़ती.

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