खेती में प्रयोग किए जा रहे फैक्ट्रियों व अस्पतालों के दूषित पानी

राज्य में फैक्ट्रियों व अस्पतालों का दूषित पानी और बायोमेडिकल वेस्ट खेती में प्रयोग किया जा रहा है.

Virendra Bisht | News18 Uttarakhand
Updated: June 27, 2019, 5:24 PM IST
खेती में प्रयोग किए जा रहे फैक्ट्रियों व अस्पतालों के दूषित पानी
उत्तराखंड हाईकोर्ट, नैनीताल
Virendra Bisht | News18 Uttarakhand
Updated: June 27, 2019, 5:24 PM IST
राज्य में फैक्ट्रियों व अस्पतालों का दूषित पानी और बायोमेडिकल वेस्ट खेती में प्रयोग किया जा रहा है. आज हाईकोर्ट में राज्य प्रदूषण बोर्ड ने जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान इसकी जानकारी दी है. प्रदूषण मानकों का उलंघन कर रही फैक्ट्रियों मामले में अपना पक्ष रखते हुए राज्य प्रदूषण बोर्ड ने कोर्ट में कहा कि 90 फैक्ट्रियों के लिए सितारगंज में बने सीईटीपी यानी कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट एक है और वह सही कार्य नहीं कर रही है. कोर्ट ने 90 फैक्ट्रियों को आदेश दिया है कि वे अपना ट्रीटमेंट प्लांट को चालू करें.

कोर्ट ने 10 दिनों में मांगा जवाब
इसके साथ ही सुनवाई के दौरान सामने आया है कि 520 अस्पतालों के पास भी बायोमेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट नहीं है और जो है वो कार्य नहीं कर रहा है. इसके चलते दूषित पानी को आगे खेती के लिए छोड़ा जा रहा है. कोर्ट ने इसपर नाराजगी जताते हुए कहा है कि अगर इस सीईटीपी को बंद करना पड़े तो क्या कदम प्रदूषण बोर्ड द्वारा उठाए जा सकते हैं. कोर्ट ने इस पर 10 दिनों के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है.

भूगर्भीय पानी भी हो रहा प्रदूषित

बता दें कि अशोक कुमार व अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा था कि पूरे राज्य में पेपर मील, फैक्ट्रियां व उद्योग मानकों के खिलाफ संचालित हो रहे हैं. इन फैक्ट्रियों से निकलने वाले जहरीले रसायनों को बिना किसी ट्रीटमेंट के नदी नालों में बहाया जा रहा है. इससे भूगर्भीय पानी में भी प्रदूषण फैल रहा है. इसका असर राज्य के लोगों पर गम्भीर बीमारियों के रूप में सामने आ रहा है.

फैक्ट्रियां कर रहीं मानकों का उलंघन
पिछले साल 17 अगस्त 2018 को हाईकोर्ट ने केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को स्थलीय निरीक्षण कर रिपोर्ट मांगी थी. उस पर आज कोर्ट में रिपोर्ट पेश की गई. इसमें बताया गया कि 793 फैक्ट्रियों की जांच की गई, जिनमें 323 फैक्ट्रियां मानकों का उलंघन करती पाई गई हैं. आज सुनवाई के बाद कोर्ट ने प्रदूषण बोर्ड को 10 दिन का समय और दिया है.
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First published: June 27, 2019, 5:24 PM IST
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