देवभूमि के इस मंदिर में नहीं होती देवताओं की पूजा, जानिए क्‍यों?

नैनीताल के ओखलकांडा ब्लॉक में मौजूद देवगुरु पर्वत की चोटी पर मौजूद इस मंदिर को दुनिया के गिने-चुने बृहस्पति मंदिरों में से एक माना जाता है.

Shailendra Singh Negi | News18 Uttarakhand
Updated: July 17, 2019, 3:53 PM IST
देवभूमि के इस मंदिर में नहीं होती देवताओं की पूजा, जानिए क्‍यों?
मान्यता है कि मंदिर में आने से मन की मुरादें पूरी होती हैं.
Shailendra Singh Negi
Shailendra Singh Negi | News18 Uttarakhand
Updated: July 17, 2019, 3:53 PM IST
उत्तराखंड को वैसे तो देवभूमि कहा जाता है, लेकिन आपको ये जानकर हैरानी होगी कि इसी देवभूमि का एक मंदिर ऐसा भी है जहां देवताओं की पूजा नहीं होती. यहां मेले लगते हैं और हजारों श्रद्धालु जुटते हैं. जबकि घने जंगल और पहाड़ की कठिन चोटी होने के बावजूद भक्तों का रेला लगा रहता है.

मान्यता है कि मंदिर में आने से मन की मुरादें पूरी होती हैं, लेकिन ये सब होता है बिना देवताओं की पूजा पाठ के. आप सोच रहे होंगे कि आखिर ऐसा कौन सा ऐसा मंदिर है जहां देवताओं की पूजा किए बिना ही मुरादें पूरी होती है? आखिर कौन है वो चमत्‍कारी जिसकी पूजा से कष्ट दूर होते हैं? जी हां, वो हैं देवताओं के गुरु देवगुरु बृहस्पति, जिनकी तपस्थली उत्तराखंड के नैनीताल में है.

ये है मान्यता
नैनीताल के ओखलकांडा ब्लॉक में मौजूद देवगुरु पर्वत की चोटी पर मौजूद इस मंदिर को दुनिया के गिने-चुने बृहस्पति मंदिरों में से एक माना जाता है. मान्यता है कि देवताओं के गुरु बृहस्पति ने इस जगह पर तपस्या की थी. देवगुरु की तपस्थली होने के कारण यहां आस-पास के गांवों में भी बृहस्पति पूजा की परंपरा है.

आस-पास के गांवों में लोग देवगुरु को कुल देवता की तरह पूजते हैं.


लोग देवगुरु से साझा करते हैं हर खुशी
बृहस्पति धाम कमेटी के अध्यक्ष मदन सिंह नौलिया बताते हैं कि आस-पास के गांवों में लोग देवगुरु को कुल देवता की तरह पूजते हैं. घर में होने वाले हर शुभ कार्य की शुरुआत देवगुरु की पूजा के साथ होती है. यहां तक गाय, भैंस का पहला दूध देवगुरु को ही चढ़ाया जाता है. यही नहीं, नई फसल, सब्जियां और फल भी देवगुरु को सबसे पहले अर्पित किए जाते हैं.
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First published: July 17, 2019, 3:48 PM IST
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