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Diwali 2021: गन्ने से तैयार लक्ष्मी की मूर्ति पूजने की परंपरा है पहाड़ों की, ऐसे तैयार होती है मूर्ति

Diwali 2021: गन्ने से तैयार लक्ष्मी की मूर्ति पूजने की परंपरा है पहाड़ों की, ऐसे तैयार होती है मूर्ति

नींबू से बनाया जाता है मां लक्ष्मी का चेहरा. चावल और अनाज से की जाती है पूजा.

नींबू से बनाया जाता है मां लक्ष्मी का चेहरा. चावल और अनाज से की जाती है पूजा.

Uttarakhand tradition : गन्ने को तीन भागों में काटा जाता है. उसके बाद कांसे की थाली में चावल अनाज रखकर मूर्ति का निर्माण किया जाता है. नीबू से मां लक्ष्मी का मुखौटा तैयार किया जाता है और इसे घूंघट में रखा जाता है. इसके बाद जेवरों से शृंगार कर दरबार में खील-बतासे, मिठाई और चावल से मां की पूजा होती है. पहाड़ के लोग नई पीढ़ी को भी इस परंपरा से जोड़ रहे हैं.

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नैनीताल. पहाड़ के लोग अपनी समृद्ध संस्कृति, लोक मान्यताओं और रीति-रिवाजों के प्रति आज भी प्रतिबंद्ध हैं. लोक मान्यताओं और यहां के त्यौहारों में विविधता भी देखने को मिलती है. अब दीपावली में लक्ष्मी पूजा की बात हो तो पहाड़ में गन्ने से होने वाली पूजा की अपनी अलग पहचान है.

गन्ने से तैयार लक्ष्मी की होती है पूजा

दीपावली के दिन पहाड़ में गन्ने की लक्ष्मी को पूजने का विधान है. सालों से पुरानी यह परंपरा आज भी जीवित है. कुमाऊं अंचल में घर-घर में गन्ने से लक्ष्मी की मूर्ति तैयार की जाती है. इसके लिए गन्ने को तीन भागों में काटा जाता है. उसके बाद कांसे की थाली में चावल अनाज रखकर मूर्ति का निर्माण किया जाता है. नीबू से मां लक्ष्मी का मुखौटा तैयार किया जाता है और इसे घूंघट में रखा जाता है. इसके बाद जेवरों से शृंगार कर दरबार में खील-बतासे, मिठाई और चावल से मां की पूजा होती है. पहाड़ के लोग नई पीढ़ी को भी इस परंपरा से जोड़ रहे हैं. नैनीताल की रेखा त्रिवेदी कहती हैं कि वे लगातार अपनी परंपरा को निभा रही हैं और अपने बच्चों को भी इसकी जानकारी दे रही हैं. रेखा त्रिवेदी के मुताबिक, अगर हम ही अपने बच्चों को अपने रीति-रिवाज नहीं सिखाएंगे, तो परंपरा आगे नहीं बढ़ेगी.

ये है किवदंती

दरअसल, मानस खंड व पुराणों में गन्ने के वृक्ष को शुभ व फलदायी माना गया है. यही कारण है कि पहाड़ों में शादी, जनेऊ समेत सभी शुभ कार्यों में गन्ने की पूजा का विधान है. जानकार ब्रज मोहन जोशी कहते हैं कि महालक्ष्मी का एक नाम गजलक्ष्मी भी है और समुद्र मंथन के दौरान उनके स्वागत के लिए हाथियों द्वारा अभिषेक किया गया और हाथी को सबसे प्रिय गन्ना है. कहा जाता है कि दीपावली के दिन इस गन्ने की पूजा से महालक्ष्मी की कृपा भी बनी रहती है और पूजा के बाद इसको प्रसाद के रूप में लेने की भी बात लोग करते हैं. हालांकि कई और भी कहानियां इस मूर्ति निर्माण के पीछे प्रचलित हैं. ब्रज मोहन जोशी कहते हैं कि लक्ष्मी धन की देवी हैं और नारी का स्वरूप भी. नारी का आभूषण लज्जा है, इसलिए लक्ष्मी को ढंककर रखा जाता है.

Tags: Diwali 2021, Laxmi puja, Nainital news

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