कुमाऊं विश्वविद्यालय की शिक्षा लौटेगी पटरी पर, 1 नवम्बर में शुरू हो जाएंगे नए सत्र

ओटो प्रमोट किये गये छात्रों पर कुलपति ने कहा कि पिछले कई दिनों से उनकी ऑनलाइन क्लास जारी है. इसमें 85 प्रतिशत छात्रों को लाभ मिल रहा है.
ओटो प्रमोट किये गये छात्रों पर कुलपति ने कहा कि पिछले कई दिनों से उनकी ऑनलाइन क्लास जारी है. इसमें 85 प्रतिशत छात्रों को लाभ मिल रहा है.

कुमाऊं विश्वविद्यालय (Kumaon University) के कुलपति एनके जोशी ने कहा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की गाइडलाइन के अनुसार नवम्बर महीने में क्लास शुरू की जानी है.

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नैनीताल. कुमाऊं विश्वविद्यालय (Kumaon University) में शिक्षा को पटरी पर लाने की तैयारियां शुरू हो गई है. नवम्बर महीने में विश्वविद्यालय नए सत्र को शुरू करने जा रहा है. हांलाकि, इस बार कोरोना (Corona) के चलते छात्रों की पढ़ाई पर असर पड़ा है. वहीं, विश्वविद्यालय ने सभी महाविद्यालयों को निर्देश जारी किया है कि वो 31 अक्टूबर (31 October) तक प्रथम वर्ष में प्रवेश प्रक्रिया को पूरी कर लें, ताकि छात्रों का आगे नुकसान नहीं हो सके.

वहीं, कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति एनके जोशी ने कहा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की गाइडलाइन के अनुसार नवम्बर महीने में क्लास शुरू की जानी है. इसको लेकर विश्वविद्यालय तैयार है. इसके साथ ही कुलपति कुमाऊं विश्वविद्यालयने कहा कि छात्रों की पढ़ाई का नुकसान न हो इसके लिये इस सत्र में सर्दी और गर्मी की छुट्टियों को भी कम किया जाएगा, ताकि कोर्स पूरा किया जा सके. वहीं, ओटो प्रमोट किये गये छात्रों पर कुलपति ने कहा कि पिछले कई दिनों से उनकी ऑनलाइन क्लास जारी है. इसमें 85 प्रतिशत छात्रों को लाभ मिल रहा है.

बिना मान्यता के छात्रों को ग्रेजुएशन कोर्स करवा रहे हैं
बता दें बीते बीते दिनों खबर सामने आई थी कि  उत्तराखंड के देहरादून में कालेज प्रशासन की गलतियों का खामियाजा छात्रों (Students) को उठाना पड़ रहा है. दून में करीब 81 कॉलेज ऐसे हैं, जो बिना मान्यता के छात्रों को ग्रेजुएशन कोर्स करवा रहे हैं. ये मामला तब प्रकाश में आया जब बिना मान्यता के चल रहे इन कालेजों से कोर्स करने वाले छात्रों को स्कॉलरशिप मिलनी बन्द हो गयी. अब छात्र परेशान हैं कि कैसे वे अपनी पढ़ाई पूरी करेंगे.
देहरादून शिक्षा का बड़ा हब है


देश में राजधानी देहरादून शिक्षा का बड़ा हब है. यहां देश ही नहीं विदेशों के भी छात्र भी पढ़ने आते हैं. लेकिन इस हब में कई ऐसे कालेज हैं जो केवल पैसा बनाने पर लगे हुए हैं. देहरादून में स्थित 81 कालेजों के पास कई प्रकार के कोर्सों का एफिलेशन सर्टिफिकेट नहीं है. ये मामला तब प्रकाश में आया जब कालेजों में पड़ने वाले एससी- एसटी छात्रों की स्कॉलरशिप पर प्रशासन ने रोक लगा दी. अब इनछात्रों को भटकना पड़ रहा है. मामले में छात्रनेता कमलेश भट्ट का कहना है कि छात्रों के साथ बड़ी नाइन्साफी हो रही है. सभी छात्र गरीब तबके के हैं. अगर प्रशासन इनको स्कॉलरशिप नहीं मुहैया करेगी, तो छात्रों की पढ़ाई अधर में लटक जाएगी. जिससे छात्रों का भविष्य खराब होगा.
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