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Uttarakhand के 4 विधायकों के चुनाव पर क्यों उठे सवाल? हाई कोर्ट ने चुनाव आयोग से भी मांगा जवाब

उत्तराखंड के चार विधायकों के चुनाव को उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई.

उत्तराखंड के चार विधायकों के चुनाव को उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई.

Uttarakhand Assembly Elections : उत्तराखंड के जिन चार विधायकों के चुनाव पर सवाल उठाए गए हैं, उनमें से दो हरिद्वार ज़िले के हैं. असल में चुनाव के दौरान नामांकन के समय चुनाव आयोग को उम्मीदवार जो हलफ़नामा देते हैं, सवाल उसे लेकर उठे हैं. देखें पूरी रिपोर्ट.

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नैनीताल. उत्तराखंड में चार विधायकों के चुनाव को हाईकोर्ट में चुनौती मिली है. हाईकोर्ट ने इन सभी विधायकों के साथ चुनाव आयोग और जिला निर्वाचन अधिकारी समेत चुनाव आरओ को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है. इनमें से तीन विधायकों पर झूठा शपथ पत्र देने के आरोप लगे हैं, जबकि एक विधायक के खिलाफ फैक्ट्स गलत ढंग से देते हुए सरकारी कोष रकम जारी करने के आरोप लगे हैं. कोर्ट ने इन सभी मामलों में नोटिस जारी करते हुए ज़िम्मेदारों से जवाब मांगे हैं.

लोहाघाट से बीजेपी नेता पूरन फर्त्याल ने खुशहाल सिंह अधिकारी के चुनाव को चुनौती दी है और गलत शपथ पत्र चुनाव आयोग को देने का आरोप लगाया है. इसी तरह, मंगलौर से हारे पूर्व विधायक काज़ी निज़ामुद्दीन ने सर्वत करीम अंसारी के चुनाव को चुनौती दी है. उन्होंने भी चुनाव के दौरान अंसारी द्वारा झूठा हलफ़नामा देने का आरोप लगाया. वहीं, खानपुर विधायक उमेश शर्मा के खिलाफ भी चुनाव आयोग को गलत शपथ पत्र देने का आरोप लगाने वाली याचिका दाखिल की गई.

शर्मा के खिलाफ कई तथ्यों को छिपाने का भी आरोप याचिका में लगाया गया. इधर, ऋषिकेश विधायक प्रेमचन्द्र अग्रवाल के चुनाव को चुनौती देने का कारण है कि उन्होंने चुनाव के दौरान 5 करोड़ की रकम विवेकाधीन कोष से बांट डाले क्योंकि चुनाव के समय वह विधानसभा अध्यक्ष थे. साथ ही, चुनाव के दौरान कई तथ्य गलत तरीके से दाखिल करने का आरोप भी अग्रवाल पर लगा है. कोर्ट ने इन सभी मामलों में नोटिस जारी कर दिए हैं.

आरोपों पर क्या है जिरह?
निज़ामुद्दीन ने न्यूज़18 से बातचीत में कहा कि अंसारी ने अपने शपथ पत्र में अपनी संपत्तियों का ब्योरा और आपराधिक रिकॉर्ड छुपाया है, जिसके चलते याचिका दाखिल की गई. वहीं, याचिकाकर्ताओं के वकील का कहना है कि रेप समेत कई मुकदमे उमेश शर्मा के खिलाफ चल रहे हैं, लेकिन उन्होंने हाई कोर्ट का नोटिस सर्व होने के बाद भी हलफ़नामे में कई तथ्य छुपाए.

यही नहीं, उन्होंने 30 के बजाय सिर्फ 13 ही आपराधिक मामलों का ज़िक्र एफिडेविट में किया. याचिकाकर्ता का यह भी आरोप है कि शर्मा ने चुनाव की आदर्श संहिता का भी उल्लंघन किया. इधर, राज्य चुनाव आयोग की तरफ से हाई कोर्ट में वकील संजय भट्ट ने बताया चूंकि शपथ पत्र के तथ्य महत्वपूर्ण होते हैं. उन्होंने अदालत द्वारा नोटिस दिए जाने की पुष्टि भी की.

Tags: MLA, Uttarakhand Assembly Election, Uttarakhand high court

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