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पूर्व मुख्यमंत्रियों का बकाया मामलाः सरकार और पूर्व मुख्यमंत्रियों आखिरी मौका, 4 हफ़्ते में देना होगा जवाब

Virendra Bisht | News18 Uttarakhand
Updated: October 18, 2019, 12:43 PM IST
पूर्व मुख्यमंत्रियों का बकाया मामलाः सरकार और पूर्व मुख्यमंत्रियों आखिरी मौका, 4 हफ़्ते में देना होगा जवाब
पूर्व मुख्यमंत्रियों के बकाया मामले पर सरकार के अध्यादेश पर अब 18 नवम्बर को नैनीताल हाईकोर्ट सुनवाई करेगा.

3 मई 2019 को हाईकोर्ट (High Court) ने पूर्व मुख्यमंत्रियों के बकाये (Ex CM Due) की बाज़ार भाव से वसूली के आदेश दिए थे. सरकार अध्यादेश ले आई ताकि Ex CM को सभी सुविधाएं मुफ़्त मिलती रहें.

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नैनीताल. पूर्व मुख्यमंत्रियों के बकाया मामले (Ex CMs Due Case) पर सरकार के अध्यादेश (Ordinance) पर अब 18 नवम्बर को नैनीताल हाईकोर्ट (Nainital High Court) सुनवाई करेगा. हाईकोर्ट ने अब राज्य सरकार व पूर्व मुख्यमंत्रियों को 4 हफ्ते का अन्तिम समय देते हुए जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है. आज उत्तराखंड सरकार (Uttarakhand Government) ने कोर्ट में सभी पक्षकारों को नोटिस सर्व करने की बात कही जिसके बाद याचिकाकर्ता के वकील ने इसका विरोध किया और कहा कि पूर्व मुख्यमंत्रियों के प्राइवेट सचिवों को नोटिस दिया गया है. सरकार ने नोटिस देने को रिकॉर्ड में लेने की गुहार लगाई तो कोर्ट ने इसे मान लिया.

फ़ैसले के ख़िलाफ़ अध्यादेश 

बता दें कि 3 मई 2019 को हाईकोर्ट की डबलबेंच ने आदेश दिया था कि 6 महीने के भीतर इन मुख्यमंत्रियों पर बकाया की बाज़ार भाव से वसूली की जाए. लेकिन सरकार कोर्ट के आदेश के बचाव में अध्यादेश लेकर आ गई और 5 सितम्बर को राज्यपाल ने इसको स्वीकृति भी दे दी. इससे हाईकोर्ट का फ़ैसला निष्प्रभावी हो गया था.

उत्तराखंड सरकार के अध्यादेश में कहा गया कि राज्य के सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों के बंगलों, गाड़ी के किराए का भुगतान सरकार करेगी और इन लोगों के लिए पहले की तरह सभी सुविधाएं मुफ्त रहेंगी.

अध्यादेश को चुनौती 

इस मामले में पीआईएल डालने वाले आरटीआई कार्यकर्ता अवधेश कौशल ने 11 सितंबर को उत्तराखंड सरकार के अध्यादेश को असंवैधानिक घोषित करने को लेकर हाईकोर्ट में फिर याचिका दाखिल की. याचिका में कहा गया कि राज्य सरकार का अध्यादेश संविधान के आर्टिकल 14 और 21 के ख़िलाफ़ जाता है.

याचिकाकर्ता अवधेश कौशल के वकील कार्तिकेय हरि गुप्ता ने कहा कि इसी तरह का मामला उत्तर प्रदेश में भी सामने आया था. उत्तर प्रदेश सरकार ने भी पूर्व मुख्यमंत्रियों की सुविधाएं जारी रखने का कानून बनाया था जिसे सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया था.
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First published: October 18, 2019, 12:36 PM IST
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