पूर्व मुख्यमंत्रियों को देना ही होगा बाज़ार भाव से बंगलों का किराया, हाईकोर्ट ने कहा यह

पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी और विजय बहुगुणा ने पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी.

Virendra Bisht | News18 Uttarakhand
Updated: August 7, 2019, 12:43 PM IST
पूर्व मुख्यमंत्रियों को देना ही होगा बाज़ार भाव से बंगलों का किराया, हाईकोर्ट ने कहा यह
पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी और विजय बहुगुणा ने पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी.
Virendra Bisht | News18 Uttarakhand
Updated: August 7, 2019, 12:43 PM IST
नैनीताल हाईकोर्ट से उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्रियों को फिर झटका लगा है. हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्रियों के बंगलों के बाज़ार भाव से किराया वसूले जाने के फ़ैसले को बरकरार रखा है. इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ दायर पुनर्विचार याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया. पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी और विजय बहुगुणा ने पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी. हाईकोर्ट ने साफ़ कर दिया कि अन्य सुविधाओं का भी इन मुख्यमंत्रियों को बाज़ार भाव से ही भुगतान करना होगा. पूर्व मुख्यमंत्रियों करोड़ों रुपये का बकाया है.

एक महीने पहले हो गई थी सुनवाई पूरी

बता दें कि नैनीताल हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्रियों से बाज़ार भाव से बंगलों और अन्य सुविधाओं का किराया वसूलने के आदेश दिए थे. पूर्व भगत सिंह कोश्यारी और विजय बहुगुणा इस बकाया पर राहत की मांग करते हुए हाईकोर्ट चले गए थे. हाईकोर्ट ने जुलाई की पांच तारीख को उनके मामले में सुनवाई पूरी कर ली थी और फ़ैसला सुरक्षित रखा था. आज हाईकोर्ट ने इस मामले पर फ़ैसला सुनाया है.

पूर्व मुख्यमंत्रियों पर आवास के किराए के रूप में राज्य संपत्ति विभाग के करोड़ों रुपये बकाया हैं. इनमें सबसे ज़्यादा बकाया दिवंगत एनडी तिवारी पर हैं. यह राशिर 1 करोड़ 13 लाख रुपये है. तिवारी के बाद पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी पर 47.57 लाख रुपये, बीसी खण्डूड़ी पर 46.59 लाख रुपये, डॉक्टर रमेश पोखरियाल निशंक पर 40.95 लाख रुपये, विजय बहुगुणा पर 37.50 लाख रुपये बकाया हैं.

अध्यादेश की तैयारी

इस बकाए का निर्धारण बाज़ार दर पर किया गया है और यही सबसे बड़ी वजह है कि पूर्व मुख्यमंत्री राज्य संपत्ति विभाग को यह पैसा नहीं जमा कर पा रहे हैं. अमूमन राज्य संपत्ति का सामान्य किराया बाज़ार किराए के मुकाबले लगभग एक चौथाई है.

नैनीताल हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों से आवास किराए के रूप में बकाया धनराशि बाजार दर पर वसूला जाए. उसके बाद राज्य संपत्ति विभाग ने बाजार दर पर किराए का आकलन करके धन राशि तय की थी लेकिन अब तक किसी भी पूर्व मुख्यमंत्री ने यह किराया नहीं चुकाया है.
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इसी बीच राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि त्रिवेंद्र सरकार पूर्व मुख्यमंत्रियों को राहत देने के लिए अध्यादेश लाने की तैयारी कर चुकी है ताकि हाईकोर्ट के आदेश से बचकर पूर्व मुख्यमंत्रियों को राहत दी जा सके.

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First published: August 7, 2019, 10:45 AM IST
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