चार धाम देवस्थानम एक्ट पर आज से अंतिम सुनवाई... अदालत तय करेगी किसके पास रहेगी मंदिरों की व्यवस्था
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चार धाम देवस्थानम एक्ट पर आज से अंतिम सुनवाई... अदालत तय करेगी किसके पास रहेगी मंदिरों की व्यवस्था
इस साल सीमित मात्रा में शुरु हुई चार धाम यात्रा का संचालन अब चार धाम देवस्थानम बोर्ड ही कर रहा है.

PIL में कहा गया है कि सरकार को मन्दिर चलाने का कोई अधिकार नहीं है मन्दिर को भक्त या फिर उनके लोग ही चला सकते हैं.

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  • Last Updated: June 29, 2020, 10:05 AM IST
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नैनीताल. बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री समेत उत्तराखंड के 51 मंदिरों को नियंत्रित करने के लिए बनाए गए चारधाम देवस्थानम एक्ट पर आज से हाईकोर्ट फ़ाइनल सुनवाई करेगा. हाईकोर्ट की चीफ़ जस्टिस रमेश रंगनाथन व जस्टिस रमेश चन्द्र खुल्बे की कोर्ट इस मामले पर फाइनल हियरिंग कर रही है. हालांकि केदारनाथ के तीर्थ पुरोहितों ने भी इस मामले में याचिका दाखिल कर दी है और कोर्ट इस पर भी सुनवाई करेगा. बता दें कि तीर्थ पुरोहितों और हक-हकूकधारियों के लगातार विरोध के बावजूद सरकार ने पिछले साल नवंबर-दिसंबर में यह कानून बनाया था.

सरकार को मंदिर चलाने का अधिकार नहीं

भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी है लेकिन कोरोना वायरस के चलते इस मामले पर सुनवाई नहीं हो सकी और सीमित मात्रा में शुरु हुई चार धाम यात्रा का संचालन अब चार धाम देवस्थानम बोर्ड ही कर रहा है.



हाईकोर्ट में सरकार के एक्ट को चुनौती देते हुए भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा है कि राज्य सरकार का कानून असंवैधानिक है और सुप्रीम कोर्ट के 2014 के आदेश का उल्लंघन भी करता है. याचिका में कहा गया है कि सरकार को मन्दिर चलाने का कोई अधिकार नहीं है मन्दिर को भक्त या फिर उनके लोग ही चला सकते हैं लिहाजा सरकार के एक्ट को निरस्त किया जाए.
एक्ट एकदम सही 

राज्य सरकार ने कोर्ट में दाखिल अपने जवाब में कहा गया कि सरकार का एक्ट एकदम सही है और वह किसी के अधिकारों को कोई हनन नहीं करता है.

इस मामले में देहरादून की रुलक संस्था ने भी प्रार्थना पत्र दाखिल किया है और सरकार के एक्ट का समर्थन किया है. इस पत्र में कहा गया है कि सरकार का एक्ट हिन्दू धार्मिक भावनाओं का हनन नहीं करता और संविधान के अनुच्छेद 14 का भी उलंघन नहीं करता है.

श्री केदार सभा केदारनाथ के तीर्थ पुरोहितों ने भी इस मामले में याचिका दाखिल की है याचिका में अध्यक्ष व उपाध्यक्ष समेत अधिकारियों को बोर्ड़ में स्थान देने को चुनौती दी है. याचिका में कहा गया है कि तीर्थ पुरोहितों के हक हकूकों को सुरक्षित करे बगैर एक्ट बनाया गया है जो असंवैधानिक है.
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